Press "Enter" to skip to content

रिसर्च / कौन सी खबर ‘फेक न्यूज’ है इसे कुछ इस तरह पहचानें

दुनिया भर में फेक न्यूज एक चर्चित शब्द बन चुका है। सूचना के युग में ये बेहद खतरनाक है। अमूमन फेक न्यूज भ्रामक सूचनाएं, अफवाहों और निजी प्रचार-प्रसार के लिए उपयोग में लाई जाती है। हालही में पेंसिलवानिया स्टेट यूनिवर्सिटी की ओर से फेक न्यूज की पहचान और इसे रोकने के लिए कुछ तरीकों की पहचान की गई है जो हर उस व्यक्ति को जानना जरूरी है जो कहीं न कही, किसी न किसी तरह से सूचनाओं से जुड़ा हुआ है।

यूनिवर्सिटी से जारी एक रिपोर्ट में कहा गया कि फाल्स न्यूज, ध्रुवीकरण वाली खबरें, व्यंग्य, गलत रिपोर्टिंग, कॉमेंट्री, उत्तेजित करनेवाली सूचनाएं और सिटिजन जर्नलिज्म में बांटा गया है। जनरल अमेरिकन बिहेवियरल साइंटिस्ट में प्रकाशित खबर में खास तौर उन कॉन्टेंट की पहचान भी की गई है जो सही खबर होती हैं।

शोधकर्ताओं की टीम का निष्कर्ष है कि सही खबर के कुछ विशेष पैमाने होते हैं और इस आधार पर उसे फेक न्यूज से अलग किया जा सकता है। उनका कहना है कि पत्रकारिता की शैली के आधार पर इन्हें पहचाना जा सकता है। झूठी खबरों में आम तौर पर व्याकरण की काफी गलतियां होती हैं, उनमें तथ्यों की कमी होती है और भावनात्मक पक्षों को ज्यादा तूल दिया जाता है। इसके साथ ही उनकी हेडलाइंस भी काफी भ्रम फैलाने वाली होती हैं।

रिसर्च टीम का कहना है कि फेक न्यूज की पहचान उनके सोर्स से भी की जा सकती है। किस सूत्र के जरिए खबर कही जा रही और आम तौर पर सूत्रों के आधार पर जैसे खबर तैयार की जाती है उसमें फर्क होता है। फेक न्यूज के अक्सर नॉन-स्टैंडर्ड वेब अड्रेस होते हैं और पर्सनल ईमेल संपर्क के लिए दी जाते हैं।

आमतौर पर सोशल मीडिया पर ऐसी फेक न्यूज सबसे तेजी से फैलती हैं। सोशल मीडिया पर फैलने के बाद ही मेनस्ट्रीम मीडिया तक इनकी पहुंच होती है। रिसर्च टीम की सदस्य मारिया मोलिना ने कहा कि फेक न्यूज की पहचान के लिए अतिरिक्त सतर्कता की जरूरत होती है और इसे नेटवर्क, भाषा, स्त्रोत आदि के आधार पर पहचाना जा सकता है।

क्या होती है फेक न्यूज

फेक न्यूज वह ‘न्यूज’ है जो यह जानते हुए बनाई जाती है कि यह सच नहीं है। यदि कोई अखबार या मीडिया संस्थान गलत न्यूज जारी करता है, तो वह उसके लिए खेद प्रकट करते हैं, लेकिन फेक न्यूज में ऐसा नहीं होता। फेक न्यूज संयोगवश नहीं बनाई जाती बल्कि यह जानबूझकर की गई गलती है। यह एक सफेद झूठ होती है और इसका मकसद सिर्फ लोगों को गुमराह करना होता है। फेक न्यूज अमूमन फेसबुक, ट्विटर और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया वेबसाइट्स पर तेजी से वायरल की जाती हैं।

क्या कहता है कानून

भारतीय कानून ‘फेक न्यूज’ शब्द का इस्तेमाल नहीं करता। यह कहना है साइबर लॉ विशेषज्ञ मान्या वत्स का, वो बताती हैं कि, ‘साइबर सिक्योरिटी के तहत यदि कोई व्यक्ति सोशल मीडिया में भड़काऊ भाषण, अश्लील कंटेंट या हिंसा फैलाने वाले पोस्ट करता है, तो उन पर कार्रवाई की जाती है।’

Support quality journalism – Like our official Facebook page The Feature Times

More from सोशल हलचलMore posts in सोशल हलचल »

Be First to Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *