Press "Enter" to skip to content

मीडिया विमर्श / यदि आप पत्रकार हैं तो ये 17 बातें हैं ‘ज्ञान का केंद्र’

प्रख्यात साहित्यकार एवं युगतेवर पत्रिका के संपादक श्री कमलनयन पांडेय को 12वें पं. बृजलाल द्विवेदी स्मृति अखिल भारतीय साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित किया गया। रविवार को भोपाल के गांधी भवन में मीडिया विमर्श एवं मूल्यानुगत मीडिया अभिक्रम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सम्मान समारोह में उनको सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता एवं विचारक रघु ठाकुर, कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो. कमल दीक्षित और त्रैमासिक पत्रिका युगतेवर के संपादक कमलनयन पांडेय ने अपने विचार रखे। ये विचार उन पत्रकारों के साथ उन विद्यार्थियों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं जो मीडिया की बाहर से जगमगाती दुनिया में प्रवेश कर चुके हैं और जो यहां अपने संघर्ष को जारी रखे हुए हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता रघु ठाकुर ने कहा, ‘विज्ञापन क्या एक रोग है?’

  • समाज में व्याप्त खामियां और समस्याओं को बदलने की शक्ति होनी चाहिए।
  • अगर अखबार पढ़ने से तनाव पैदा होता है, बेचैनी होती है, तो होनी भी चाहिए।
  • पत्रकारिता के लिए विज्ञापन एक रोग है, किंतु विज्ञापन के बिना पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन कठिन कार्य है।
  • अगर समाज में लोगों के साथ अन्याय हो रहा है तो उसके लिए बेचैनी होनी चाहिए, उसके साथ खड़े होना चाहिए।
  • पत्रकारिता की डिग्री के लिए साहित्य पढ़ना भले जरूरी न हो लेकिन एक अच्छा इंसान होने के लिए साहित्य पढ़ना जरूरी है।
  • साहित्यकारों के बारे में, उनके सृजन के बारे में लोगों को जानकारी देनी चाहिए, अखबारों में साहित्यकारो को प्रमुखता से स्थान देना चाहिए।
  • आज के अखबारों में नेताओं के बारे में, उनके निजी जीवन के बारे में तो बहुत कुछ छपता है लेकिन साहित्यकारों के बारे में, उनके निजी जीवन के बारे में नहीं छपता है।

मुख्य वक्ता प्रो. कमल दीक्षित बताते हैं मीडिया का मूल्यानुगत होना क्यों है जरूरी

  • पिछले कुछ वर्षों में पत्रकारिता सामाजिक सरोकारों और मूल्यों से कट गई है।
  • मीडिया का मूल्यानुगत होना जरूरी है। पिछले कुछ वर्षों से हम इसी दिशा में प्रयास कर रहे हैं।
  • पत्रकारिता देश और समाज के लिए नहीं होती बल्कि मनुष्यता के लिए होती है। इसलिए पत्रकारिता के केंद्र में मनुष्य होना चाहिए।

संपादक कमलनयन पांडेय बताते हैं, ‘आज भी नारद जीवित हैं, लेकिन कुछ इस तरह’

  • एक पत्रकार के रूप में आज भी नारद जीवित हैं।
  • शब्दों और प्रतीकों का अपना उत्कर्ष और अपकर्ष होता है।
  • जब रचनाकार रचना करता है तो वह प्रतीकों में रच बस जाता है।
  • शब्द सिर्फ शब्द नहीं होता है। शब्द संस्कृति होता है, प्रतीक होता है।
  • नारद हमेशा कमजोर और शोषित वर्ग के लिए खड़े रहे और संचार संवाद का काम किया।
  • समाज में असहमति जरूरी है। जहां असहमति नहीं होती है, वहां सत्य का विस्फोट नहीं होता है।
  • पत्रकार नारद का उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ लोग उन्हें चुगलखोर की संज्ञा देते हैं लेकिन यह सत्य नहीं है।

Support quality journalism – Like our official Facebook page The Feature Times

More from सोशल हलचलMore posts in सोशल हलचल »

Be First to Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *