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कानून / यदि जापान में जॉब करने का है प्लान तो हो जाएं सावधान

जापान में बुज़ुर्गों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है और कुल जनसंख्या सिमटती जा रही है, इस वजह से जापान में मज़दूरों की कमी को दूर करने की ज़रूरत और बढ़ गई है। इसके अलावा जापान दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है जहां कुछ समय से डेमोग्राफ़ि‍क (आबादी से जुड़ी) चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

ओआरएफ की एक रिपोर्ट के अनुसार जापान की कुल आबादी में 20 फ़ीसदी लोग 65 साल से ज़्यादा उम्र के हो चुके हैं। दुनिया भर के देशों में बुज़ुर्गों का यह हिस्सा जापान में सबसे ज़्यादा है। नवंबर 2018 में जापानी संसद ने एक नियम पारित किया है जिसमें विदेशी कामगारों के देश में आने को मंज़ूरी दी गई है। यह प्रस्ताव आने वाले अप्रैल से लागू किया जाएगा लेकिन विपक्ष इसका यह कहकर विरोध कर रहा है कि इस कानून में विदेशियों के शोषण होने का खतरा है।

क्यों है खतरा?

वह इसलिए कि जापान एक ऐसा देश है जो बाहरी लोगों का अपने देश में स्वागत न करके अपनी संस्कृति और एकरूपता को बढ़ावा देता है। जापान ने लंबे समय से दुनिया में अपनी पहचान एकल-संस्कृति वाले देश के रूप में बनाई है। 1990 के दशक में जापान को कामगारों की कमी की समस्या का गंभीर सामना करना पड़ा था, तब उस समय जापान ने दूसरे विश्वयुद्ध के समय लैटिन अमेरिका जा बसे जापानियों से संबंधित नियम-कानूनों में बदलाव किए थे, तब उनके लिए खत्‍म हो चुके वीजा को नए सिरे से जारी किया गया और लंबे समय तक के‍ लिए वीजा दिया गया।

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अब जबकि फिर से जापान की जनसंख्या सिमट रही है, आबादी का एक बड़ा हिस्‍सा बूढ़ा हो रहा है तो ऐसे में प्रशासन के लिए आप्रवासियों को लेकर पारंपरिक (रूढ़िवादी) सोच और जापानी अर्थव्‍यवस्था के लिए ज़रूरी हुनरमंद नौजवानों की ज़रूरत के बीच तालमेल बैठाना मुश्किल हो रहा है इसीलिए जापान और अधिक विदेशी कामगारों को अपने यहां आने की अनुमति देने का ये आइडिया लेकर आया है।

अप्रवासी मजदूर को परिवार लाने की इजाजत नहीं

अप्रैल 2019 में लागू होने वाले इस रेग्युलेशन में मजदूरों की कमी वाले सेक्‍टर के लिए दो तरह के वीज़ा स्टेटस बनाए गए हैं। पहली कैटेगरी में वीज़ा को 5 साल तक बढ़ाया जा सकता है, इसके तहत काम करने वाले को उस सेक्‍टर में एक स्‍तर तक काम का अनुभव और हुनर होना चाहिए हांलाकि इस श्रेणी के कामगारों को देश में अपना परिवार लाने की इजाज़त नहीं होगी।

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दूसरी कैटेगरी में अनिश्चितकालीन वीज़ा का प्रावधान है, जिसकी वैधता समय-समय पर बढ़ाई जाती रहेगी। इसके लिए ऊंचे दर्जे का कौशल और रोज़गार का वैध कॉन्ट्रैक्‍ट होना चाहिए। इस श्रेणी के मजदूरों को अपने साथ परिवार लाने की इजाज़त होगी। जापान के मुख्य कैबिनेट सचिव योशिहिदे सूगा के मुताबिक देश की जनसंख्या ढलान पर है, लोगों की कमी के कारण व्यापार को नुकसान उठाना पड़ रहा है, ऐसे में विदेशी कामगारों को नया रेसीडेंस स्‍टेटस यानी देश में रहने का दर्जा देना बहुत ज़रूरी हो गया है।

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माना जाता रहा है कि अगर नई इमीग्रेशन पॉलिसी लागू की जाती है तो विदेशियों को कंस्‍ट्रक्शन, खेती, नर्सिंग, ट्रेड और फाइनेंस जैसे सेक्टर में काम करने काम करने का मौका मिलेगा। ये वो सेक्टर हैं जिनमें काम करने वालों की सबसे ज़्यादा कमी है। इसके अलावा इस पॉलिसी से अधिक हुनर वाले पेशेवरों का आना मुमकिन होगा, जो पहले संभव नहीं था। इस नीति के तहत प्रधानमंत्री शिंजो आबे को ऐसा कदम लेना पड़ा जो पहले नहीं उठाया गया था, अब कामगारों की कमी को दूर करने के लिए और ज़्यादा विदेशियों को आने दिया जाएगा।

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