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भविष्य / भारत में टूरिज्म का बढ़ता बाजार इन विकल्पों पर रखें नजर

भारत में पर्यटन की संभानाएं तेजी से बढ़ रही हैं। हालही में वर्ल्ड ट्रैवल एंड टूरिज्म काउंसिल (डब्ल्यूटीटीसी) की रिपोर्ट के अनुसार भारत 2028 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी टूरिज्म इकोनॉमी बन सकता है।

इस रिपोर्ट में कहा कि 2028 तक इस क्षेत्र देश में लगभग 1 करोड़ नई नौकरियां भी आएंगी। साथ ही ट्रैवल और टूरिज्म में सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से साल 2028 तक नौकरियां 42.9 मिलियन से बढ़कर लगभग 52.3 मिलियन हो जाएंगी।

इस रिपोर्ट को जारी करते हुए डब्ल्यूटीटीसी की अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी ग्लोरिया गेवेरा ने कहा कि भारत को अपने टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए काम करने की आवश्यकता है । समाजिक तौर पर देखा जाए तो यदि टूरिज्म के अन्य पहलुओं पर भी काम किया जाए तो देश से बेरोजगारी को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

एस्ट्रो टूरिज्म भी है एक विकल्प

देश में अंतरिक्ष पर्यटन की शुरुआत हो चुकी है। फिलहाल यह बहुत महंगा है। इसलिए नया कॉन्सेप्ट एस्ट्रो टूरिज्म आ गया है। विदेशों में तो यह चलन में है, लेकिन भारत में भी इसकी अपार संभावनाएं है। प्राचीन मंदिर व गिरजाघरों समेत देश के विभिन्न शहरों में स्थापित जंतर-मंतर को इस पर्यटन से जोड़ा सकता है।

दरअसल, आसमान में होने वाली रोमांचक खगोलीय घटनाओं को कहीं से भी देखा जा सकता है। इनके अलावा भी जमीनी स्तर पर ऐतिहासिक धरोहरों का अंबार है, जिनकी महत्ता खगोल विज्ञान के लिहाज से कहीं अधिक बढ़ जाती है। हमारे देश में प्राचीन काल में बनी कई महत्वपूर्ण इमारतें सूर्य की दिशा के अनुसार ही बनी हैं।

गिरजाघरों की नींव ‘अयनांत’ व ‘विषुव’ के हिसाब से पड़ती थी, जबकि मंदिरों का निर्माण भी दिशा के हिसाब से ही होता था। इनके अलावा दिल्ली, उज्जैन, बनारस के जंतर-मंतर खगोल की ही देन है। इनके बल पर देश में खगोलीय पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है।

विलुप्त पक्षियों को बचाने की पहले बर्ड टूरिज्म

ठीक इसी तरह देश में बर्ड टूरिज्म को भी बढ़ावा दिया सकता है खासतौर पर हिमालय के नजदीकी प्रदेशों में जहां ऐसे कई तरह के पक्षी निवास करते हैं। जो विलुल्ती की कगार पर पहुंच रहे हैं। यहा विलुप्त होने वाले हैं, ऐसे में इन पक्षियों को उचित संरक्षण दिया जा सकता है।बता दें कि उत्तराखंड के पं. गोविंद बल्लभ उच्च स्थलीय प्राणी उद्यान में इस तरह की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है। जिसके चलते

क्रूज पर्यटन में अपार संभावनाएं

भारत में सागरमाला परियोजना के तहत क्रूज पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। केंद्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे प्रोजेक्ट ‘द डॉन ऑफ क्रेज टूरिज्म इन इंडिया’ ने केवल रोजगार बल्कि भारत में आने वाले लोगों के लिए एक नया अनुभव मिल रहा है। मोदी सरकार का फोकस टूरिज्म इंडस्ट्री को बढ़ावा देने पर है।

यूरोप की तर्ज पर ज्योग्राफिक टूरिज्म

भारतीय भूगर्भ सर्वेक्षण जीएसआई ने कुछ समय पहले ही उत्तराखंज में 64 ऐसे स्थानों की खोज की है, जहां गर्म पानी के झरने हैं। ज्योग्राफिक टूरिज्म को बढ़ावा देने के पहले के तहत भारतीय भूगर्भ सर्वेक्षण विभाग अब देश के बहुत से स्थानों पर गुफाओं गरम झरनों और ऐसी ही योजनाओं पर वर्क चल रहा है।

इस योजना के तहत राजस्थान में भी कुछ समय पहले प्रदेश के नौ स्थलों की पहचान जीएसआई काम कर रहा है। अमेरिका और यूरोप में जिस तेजी से भौगोलिक पर्यटन लोकप्रिय हो रहे हैं उसको देखते हुए भारत और विशेषकर राजस्थान में ज्योग्राफिक टूरिज्म की संभावनों को तलाश कर प्रयास किए जाएं तो इसके बेहतर परिणाम पर्यटन विकास के रूप में सामने आ सकते हैं।

ईको, अध्यात्मिक और हेरिटेज टूरिज्म

यदि मप्र की बात करें तो यहां हेरिटेज और ईको टूरिज्म की संभावनाएं चंदेरी में काफी हैं। बॉलीवुड ने इन संभावनाओं को देखते हुए यहां रुख करना शुरू कर दिया है। तो वहीं राज्य सरकार द्वारा साहसिक, आध्यात्मिक और ईको पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए खंडवा के नजदीक इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर बांध के बैक वॉटर के टापुओं पर मध्यद्वीप को विकसित किया जा रहा है।

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