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रिपोर्ट / भारतीय नेताओं को सिर्फ छबि की चिंता, जमीनी हक़ीकत ‘भयावह’

प्रतीकात्मक चित्र।

भारतीय नेता कोरोना महामारी के वक्त में भी अपनी छबि बनाए रखने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं। राज्यों के जनसंपर्क विभाग राज्य सरकार और नेताओं का महिमामंडन करने में व्यस्त है, जो सत्ता में मौजूद नेताओं की थोड़ी सी मदद को विहंगमय बनाकर सोशल मीडिया में प्रस्तुत किया जा रहा है।

मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले की चंदेरी तहसील में तैनात पुलिसकर्मी अपने पति के लिए अशोकनगर अस्पताल में गुहार लगाती रहीं लेकिन बेड तक नहीं मिला मृतक पटवारी कमलेश भगत मुंगावली में पदस्थ थे महिला एसआई अपने दोनों बच्चों के साथ बिलखती रहीं, पति भी कोरोना कंटेंटमेंट जोन के प्रभारी के रूप में तैनात थे। उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधा तो दूर अस्पताल का इलाज तक नसीब नहीं हुआ। मप्र के रतलाम में कोरोना संक्रमित एक वकील ने बाइक पर ही दम तोड़ दिया, परिजनों का कहना है मेडिकल कॉलेज लेकर गए थे लेकिन वहां बेड नहीं मिला दो घंटे बाद बाइक में निजी अस्पताल ले जाने लगे लेकिन रास्ते में उन्होंने अंतिम सांस ली।

तो शिवपुरी में एक 40 वर्षीय महिला की मौत के बाद उसके तीन बच्चे अनाथ हो चुके हैं। इस बीच फिल्म अभिनेता सोनू सूद ने अपील की है कि केंद्र और राज्य सरकार ऐसे सभी बच्चों के लिए शिक्षा का प्रबंध करे। दूसरी ओर, मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रदेश में सब कुछ बेहतर होने की बात कह रहे हैं।

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट पहले ही चेतावनी दे चुका है कि वह नागरिकों के खिलाफ किसी भी पुलिस या अन्य अधिकारी द्वारा की गई कार्रवाई को अवमानना की तरह मानेगा कि लेकिन मध्यप्रदेश के इंदौर के देपालपुर के तहसीलदार द्वारा पिछले दिनों मास्क ने पहनने वाले लोगों को मेंढ़क की तरह चलवाया गया, जहां तहसीलदार आम लोगों को पैर से मारते हैं। जबकि समझाने का तरीका कुछ ओर भी हो सकता था।

प्रदेश की राजधानी भोपाल में कोरोना के कारण हो रही मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है, प्रशासन कोशिश कर रहा है ताकि कोरोना को नियंत्रित किया जा सके, लेकिन भोपाल की सांसद प्रज्ञा ठाकुर बंगाल चुनाव मे हुई हिंसा पर सामाजिक द्वेष को बढ़ाने वाले ट्वीट कर रही हैं। मप्र के कई बीजेपी-कांग्रेस व अन्य पार्टी के नेता इस महामारी में अपनी, उस भूमिका में नजर नहीं आते जिसके लिए जनता ने उन्हें चुना है। ह्यूमन राइट्स वॉच का दावा, नेता अपनी छबि की चिंता में काम कर रहे हैं, जमीनी स्तर पर बिल्कुल सटीक बैठता है।

विफलताओं पर नाराजगी दिखाती सरकार

हालही में, ह्यूमन राइट्स वॉच की दक्षिण एशिया निदेशक मीनाक्षी गांगुली ने अपने ब्लॉग में लिखा कि कोरोना महामारी झेल रहे भारत में नेताओं को ऑक्सीजन और दूसरी मेडिकल चीज़ों की कमी के बजाए अपनी आलोचना और छवि की चिंता है, जब कि गैर-सरकारी संस्थाएं नेताओं से ज्यादा मदद कर रही है। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा मेडिकल सुविधाएं पहुंचाने की बात कही जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ ओर ही बयां कर रही हैं।

मीनाक्षी का कहना है कि जब इन विफलताओं के लिए सरकार की आलोचना होती है तो सरकार ने इस पर अपनी नाराजगी जताई है और इस संबंध में दिए गए किसी भी सलाह-मशविरे का अधिकारियों ने मज़ाक़ ही उड़ाया है। भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने ऑक्सीजन की कमी को लेकर हुई एक सुनवाई के दौरान अदालत में कहा, ‘हम सब मिलकर कोशिश करें और हमेशा बच्चों जैसे रोने वाला ना बनें।’

…ताकि प्रधानमंत्री की छवि खराब ना हो?

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह के सुझावों को झिड़कते हुए उनकी विपक्षी कांग्रेस पार्टी पर कोरोना के बारे में झूठ फैलाने का आरोप लगाया। तो वहीं, ऑक्सीजन और दूसरी किसी भी चीज़ की कमी के आरोपों को ख़ारिज करते हुए यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वास्थ्यकर्मियों सहित किसी भी शिकायत करने वालों के ख़िलाफ़ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लगाकर उनकी संपत्ति जब्त करने की धमकी दी।

भारत में हर दिन क़रीब चार लाख लोग संक्रमित हो रहे हैं और तीन हज़ार से ज्यादा लोगों की मौत हो रही है, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बात में लगे हैं कि उनकी छवि ख़राब ना हो। लोगों का कहना है कि कोरोना महामारी को हैंडल करने में मोदी सरकार पूरी तरह विफल रही है। कई लोगों ने तो इस बात पर भी आपत्ति जताई है कि इस सरकार की प्राथमिकताएं क्या हैं?

भारत के वैक्सीन निर्माताओं ने दुनियाभर को कोरोना वैक्सीन देने का वादा तो कर लिया लेकिन अब वो सप्लाई पूरी नहीं कर पा रहे हैं। इस दौरान, वैक्सीन निर्माता कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला ने कहा है कि उन्हें धमकी के कारण भारत छोड़ना पड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर वो यह कहते कि चुनावों के दौरान बड़ी-बड़ी रैलियों और हिंदुओं के धार्मिक आयोजन (कुंभ मेला) के कारण कोरोना फैलने में तेजी हुई तो उनका सिर कलम कर दिया जाता।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तो यहां तक कहा था कि राज्य में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। कई देशों के वरिष्ठ लोगों ने कोरोना महामारी को संभालने में भारतीय प्रशासन की विफलता पर टिप्पणी की है, भले ही भारत में निःशुल्क टीका लगाने का वादा चुनावी रैलियों में किया गया हो लेकिन भारत का प्राथमिक वैक्सीन निर्माता अब अनुबंधों को पूरा करने में विफल रहा है।

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