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प्रकृति / यास चक्रवात के बाद, जीवन को व्यवस्थित करने की गूंज

चित्र सौजन्य : गूंज/पश्चिम बंगाल में यास चक्रवात के दौरान मौसम की मनमानी।

मई 2021, एक तरफ देश में कोरोना की दूसरी लहर का कहर और दूसरी ओर देश के पश्चिम बंगाल में आए यास चक्रवात ने तबाही का मंजर बना दिया था।

पश्चिम बंगाल में, अनुमान लगाया गया है कि चक्रवात यास ने लगभग 10 करोड़ से ज्यादा लोगों को प्रभावित किया। आज भी कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है, गांवों में भीषण बिजली कटौती के कारण अधिकांश घरों में बिजली कनेक्शन नहीं है। सरकारी सूत्रों ने बताया कि लगभग 30 लाख से अधिक घर क्षतिग्रस्त हो गए और करीब 134 नदी तटबंध टूट गए हैं, जिनकी मरम्मत का कार्य जारी है।

गूंज सामाजिक सरोकार विषयों पर कार्य करने वाला एनजीओ है। गूंज पश्चिम बंगाल के सुंदरबन क्षेत्र के दक्षिण में यास चक्रवात के प्रभावित लोगों की सहायता कर रही है। इस दौरान 25 वर्षीय महिला रूपारानी (परिवर्तिन नाम) ने अपनी कहानी साझा की, वो बताती हैं, ‘जब मैंने अपने जीवन में इस तरह के विनाशकारी चक्रवात को देखा, तो मैंने परिवार को बचाने के लिए भगवान से प्रार्थना की। उस समय मेरी एकमात्र चिंता मेरा परिवार था। लेकिन मैंने चक्रवात के लिए अपने पति को खो दिया। अब मेरे साथ मेरे दो बच्चों की सारी जिम्मेदारी है, मुझे उम्मीद है मैं विषम परिस्थिति में उन्हें एक सफल इंसान बनाउंगी।’

यास चक्रवात के कारण शहरी क्षेत्रों की अपेक्षा ग्रामीण अंचल में नुकसान ज्यादा हुआ है। यह प्राकृतिक आपदा ठीक उस तरह की है जैसे जब आप किसी तारे को आकाश से नीचे गिरते हुए देखते हैं, तो सोचते हैं कि तारा आकाशगंगा से गायब हो जाएगा, लेकिन ये तारा उम्मीद, महत्वाकांक्षाओं का एक नया ग्रह बनाएगा।

यहां तक ​​कि जब कोई व्यक्ति जीवन के सबसे अंधेरे हिस्से में जीवित रहता है, तो वह खुद को एक पल के लिए हारा हुआ महसूस कर सकता है, उम्मीद खो सकता है, लेकिन रूपारानी जैसी महिला एक जीवंत उदाहरण हैं जो इस विपदा में अपने पति को खोने के बाद अपने बच्चों के बड़े होने की पर्याप्त संभावनाओं को तलाशने की उम्मीद रखती हैं।

यास चक्रवात ने कई लोगों की जिंदगी को चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया, जब उनके पास आश्रय भोजन, राशन और अन्य आवश्यक चीजें खरीदने का कोई विकल्प नहीं था। तब टीम गूंज ने इस संकट की घड़ी में हजारों व्यक्तियों और परिवारों तक राशन किट, सूखा भोजन, तिरपाल और अन्य आवश्यक चीजों के साथ पहुंच रहे हैं।

टीम गूंज 28 मई 2021 से वहां मौजूद है। राहत के प्रयास अभी भी जारी हैं। इससे पहले पश्चिम बंगाल में गूंज ने चक्रवात अम्फान के दौरान भी लोगों की मदद की, उन्होंने लोगों को चेतावनी देते हुए उस समय सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने के लिए सुनिश्चित किया।

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