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कोरोना वायरस / कुछ इस तरह गिरती अर्थव्यवस्था को संभाल रहा है चीन

  • अखिल पाराशर, लेखक चीन के बीजिंग शहर में रहते हैं वो चाइना मीडिया ग्रुप में वरिष्ठ पत्रकार हैं।

चीन में जानलेवा कोरोना वायरस का कहर लगातार जारी है, पर चीनी सरकार इसकी रोकथाम में कोई कसर नहीं छोड़ रही। चीनी नववर्ष के दौरान जब महामारी का प्रकोप फैलने लगा, तब इसके प्रभाव की गंभीरता पहली बार में स्पष्ट नहीं हुई, क्योंकि आमतौर पर उस समय ज्यादातर बिजनेस और कंपनियों का कारोबार बंद होता है।

अब, त्योहार बीत चुका है और कोरोनावायरस के चलते लगभग दो हफ्तों तक छुट्टियां बढ़ाई गईं हैं, और कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में, खासकर ‘प्रमुख उद्योगों’ जैसे कि भोजन और फार्मास्यूटिकल्स में काम फिर से शुरू हो गया है। हालांकि, अभी भी कई ऐसे उद्योग-धंधे हैं जहां अभी तक काम पूरी तरह से शुरू नहीं हुआ है।

लेकिन अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए चीन सरकार के पास पर्याप्त नीतियां हैं। उसकी अर्थव्यवस्था के दीर्घकालिक सकारात्मक रुझान में बदलाव आने के कोई आसार नहीं है। चीन निश्चित रुप से आर्थिक और सामाजिक विकास के लक्ष्यों और कार्यों को पूरा करने के लिए आश्वस्त है। नए कोरोना वायरस महामारी के फैलने से दुनिया भर के शेयर बाजारों और विशेष रूप से एशियाई बाजारों में गिरावट देखने को मिली है, जिससे निवेशकों के पसीने छूटने लगे हैं, और अर्थशास्त्री चिंतित हैं।

शंघाई कम्पोजिट इंडेक्स में 2.8% और हांगकांग के हांग सेंग में 1.5% की गिरावट देखी गई। विश्लेषक, जिन्होंने पहले चीन की पहली तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर को 6.1% का अनुमान लगाया था, अब यह आंकड़ा 5.9% (या उससे कम) के करीब पहुंच गया है, जो सीधे नये कोरोनावायरस के फैलने से उत्पन्न हुआ है।

हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रभाव बस थोड़े समय के लिए ही है और जैसे ही महामारी फैलना रुक जाएगी तो घरेलू अर्थव्यवस्था अपनी सामान्य पटरी पर लौट आएगी। पिछले समय में आयी समान आपदाओं की ओर इशारा करते हुए विश्लेषक V-आकार की रिकवरी प्रवृत्ति की बात कर रहे हैं, वो इसलिए क्योंकि बाजार मांग में तेजी है जिससे अर्थव्यवस्था की सेहत दुरुस्त होने में मदद मिल सकेगी, और यह लगभग दूसरी तिमाही के मध्य या अंत में होने की संभावना है।

चीन सक्रिय रूप से विभिन्न उद्योगों के उत्पादन और कार्य बहाली पर जोर दे रहा है। कुछ विदेशी निवेश वाले उद्यमों का उत्पादन भी लगातार बहाल हो रहा है। महामारी के बावजूद, चीन के उच्च-स्तरीय अधिकारी आर्थिक विकास को बनाए रखने के लिए इस साल के आर्थिक और सामाजिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सभी स्तरों की समितियों और अधिकारियों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। नई कर नीतियों और अन्य राजकोषीय उपायों को शुरू किया जा रहा है, ताकि क्षतिग्रस्त उद्योगों को बोझ से निपटने में मदद मिल सके।

चीन के केंद्रीय बैंक ने मंदी से निपटने के उपायों को लागू करके सहायता बढ़ाने की अपनी मंशा जाहिर कर दी है। केंद्रीय बैंक ने 3 खरब युआन का विशेष ऋण दिया है और महामारी से लड़ने वाले प्रमुख उद्यमों को ख़ास तरजीह दी है। चीन के वित्त मंत्रालय ने चिकित्सा देखभाल और अन्य संबंधित उपकरणों पर कुछ 1.6 बिलियन डॉलर की सब्सिडी जारी की है। देश की मीडिया संस्थाओं से भी आग्रह किया गया है कि वे आर्थिक सुधार पर ध्यान दें।

चीन में महामारी की रोकथाम में सकारात्मक प्रगति हासिल करने के साथ कारोबारों की बहाली पर भी जबरदस्त तरीके से जोर दिया गया है। अर्थव्यवस्था की दशा सुधारने के लिए चीन द्वारा किये जा रहे प्रयासों को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और अंतर्राष्ट्रीय बिरादरियों का सकारात्मक मूल्यांकन मिला है।

चीन का अमेरिका के साथ व्यापार युद्ध चल रहा है, और पहले से ही धीमी अर्थव्यवस्था (2017 के 6.9 प्रतिशत से 2019 के 6.1 प्रतिशत तक कम हुआ) है, जिनके चलते यह नई चुनौती चीन की ताकत और शासन क्षमता की अग्निपरीक्षा है। आने वाले वक्त में इसका असर कितनी दूर तक फैलेगा, यह अभी देखना बाकी है, और इस समय अनुमान लगाना भी मुश्किल है।

साल 2002 में जब सार्स महामारी फैली थी, तब चीन की अर्थव्यवस्था पर उसका प्रभाव ‘उल्लेखनीय लेकिन अल्पकालिक’ था, और इसके नौ महीने बाद सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि में 1-2 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। विश्व की अर्थव्यवस्था को भी करीब 40 अरब अमेरिकी डॉलर का नुकसान पहुंचा था। लगभग दो दशक बाद, क्षति-नियंत्रण प्रबंधन के मामले में चीन की क्षमताएं स्पष्ट रूप से काफी उन्नत हुई हैं।

सुनिश्चित करने के लिए एक बात यह है कि इस कठिन समय में शांति, स्थिरता और एकता बनाए रखने के लिए कई प्रयास सफलतापूर्वक किए गए हैं, और समस्या को बड़े ही सुरक्षित तरीके से नियंत्रित किया जा रहा है। उम्मीद है कि इस संघर्ष में चीन और ज्यादा मजबूती से उभर कर आएगा, और जल्द ही कठिनाइयों को दूर करेगा। चीन जल्द ही अपने देश की अर्थव्यवस्था को वापिस सामान्य पटरी पर लाने में सफल होगा।

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