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समाधान / …तो क्या ये है ‘तिब्बत समस्या’ का हल?

तिब्बत के दूसरे सर्वोच्च आध्यात्मिक नेता,गेदुन चोएक्यी न्यिमा। चित्र सौजन्य : दार्जलिंग अनलिमिटेड

  • प्रो. श्यामनाथ मिश्र। लेखक राजनीति विज्ञान विभाग, राजकीय महाविद्यालय, तिजारा (राजस्थान) में कार्यरत हैं।

यह घटना है, 14 मई, 1995 की, तब चीन ने सिर्फ छः वर्षीय पंचेन लामा गेदुन चोएक्यी न्यिमा का उनके परिजनों सहित अपहरण कर लिया था। यह चीन द्वारा मानवाधिकार हनन के निंदनीय उदाहरणों में से एक है। ऐसे में अब मांग है कि लोकतांत्रिक मूल्यों, अंतरराष्ट्रीय कानून तथा मानवीय आदर्श का सम्मान करते हुए चीन सरकार को तिब्बती धर्मगुरु पंचेन लामा को जल्द रिहा करे?

तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने तिब्बती परंपराओं का पालन करते हुए गेदुन चोएक्यी न्यिमा को पंचेन लामा का अवतार घोषित किया था। दलाई लामा द्वारा पंचेन लामा के पुनर्जन्म को मान्यता देते ही साम्यवादी चीन सरकार ने गेदुन चोएक्यी न्यिमा को गायब कर दिया।

तिब्बती समुदाय अब भी दलाई लामा द्वारा घोषित गेदुन चोएक्यी न्यिमा को ही पंचेनलामा का अवतार मानता है। तिब्बती उनकी ही उस तस्वीर के प्रति समर्पित हैं जिसमें वे छः साल के बच्चे हैं। उसके बाद की उनकी कोई तस्वीर उपलब्ध नहीं है। विश्व जनमत की घोर उपेक्षा करते हुए चीन सरकार उनके एवं उनके परिजनों के बारे में कुछ नहीं बता रही है।

चित्र : ग्यानकेन नोरबू जिन्हें पंचेन लामा
के रूप में चीन का समर्थन प्राप्त है।

लगातार बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव में 2019-20 में चीन सरकार ने कुछ भ्रामक जानकारी दी थी। उसके अनुसार गेदुन चोएक्यी न्यिमा स्नातक कर चुके हैं और सरकारी नौकरी में हैं। तिब्बतियों एवं लोकतंत्र समर्थकों का कहना है कि गेदुन चोएक्यी न्यिमा के मानवाधिकारों का चीन सरकार संरक्षण करे। वे ही तिब्बतियों के पंचेन लामा हैं। उनको मान्यता दलाई लामा ने समस्त पांरपरिक प्रक्रियाओं को अपनाकर दी है।

लेकिन, चीन सरकार ने ग्यानकेन नोरबू को पंचेन लामा बनाया है उन्हें तिब्बती परंपरानुसार पंचेन लामा का अवतार नहीं माना जा सकता! विश्व समुदाय अब भी चीन के व्यवहार को लेकर आशंकित है। यह चीन के दोहरे व्यवहार के कारण है। भौतिकवादी साम्यवादी दर्शन पर चलने वाली चीन सरकार द्वारा तिब्बतियों के धर्म में हस्तक्षेप अनावश्यक तथा निंदनीय है।

विश्व समुदाय चीन सरकार के धर्म संबंधी ऑर्डर नंबर पांच से स्वाभाविक रूप से चिंतित है। इसके कई साल पहले ही पंचेन लामा गेदुन चोएक्यी न्यिमा के मामले में चीन सरकार की क्रूरतापूर्ण अमानवीय छवि उजागर हो चुकी है। चीन इसी प्रकार दलाई लामा के पद को भी नियंत्रित करना चाहता है। चीन जानता है कि दलाई लामा ने तिब्बत के सवाल को अंतरराष्ट्रीय सवाल बना दिया है।

चीन की नजर में दलाई लामा विघटनकारी हैं। नोबल शांति पुरस्कार समेत अनेक राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय पुरस्कारों तथा सम्मानों को प्राप्त कर चुके दलाई लामा बौद्ध दर्शन की नालंदा विवि परंपरा के प्रचारक हैं। वे शांति, अहिंसा, करुणा तथा मैत्री के पक्षधर हैं। तिब्बत के ऊपर अवैध कब्जा जमाए चीन के प्रति भी उनके मन में करुणा है। यही कारण है कि विश्व समुदाय दलाई लामा को उनके संघर्ष में भरपूर सहयोग एवं समर्थन सुव्यवस्थित ढंग से दे रहा है।

चीन, लोकतांत्रिक तरीके से निर्वाचित ‘तिब्बत की निर्वासित सरकार’ पसंद नहीं करता है। दलाई लामा स्वयं तिब्बत के राजप्रमुख पद से मुक्त हो गए हैं। वे सिर्फ आध्यात्मिक कार्यों एवं मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पित हैं। इसी अप्रैल, 2021 में तिब्बत सरकार के गठन हेतु मतदान प्रक्रिया का अंतिम चरण समाप्त हो चुका है।

बहरहाल, तिब्बत मामले का हल यह हो सकता है कि चीन, दलाई लामा और लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई निर्वासित तिब्बत सरकार के प्रतिनिधियों के साथ वार्ता करे। तिब्बत को वास्तविक स्वायत्तता दे, यह चीन के संविधान एवं राष्ट्रीयता कानून के अनुकूल है। चीन की संप्रभुता एवं तिब्बत के स्वशासन के अधिकार का संरक्षण इस तरह संभव है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति द फीचर टाइम्स उत्तरदायी नहीं है। इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना या तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार द फीचर टाइम्स के नहीं हैं एवं द फीचर टाइम्स उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

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