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रिपोर्ट / तो क्या बीजेपी की यूएस विंग, विदेशी एजेंट है?

चित्र : भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 22 सितंबर, 2019 को टेक्सस, यू.एस. में हाउडी मोदी सामुदायिक शिखर सम्मेलन के दौरान मंच पर हाथ पर हाथ रखते हुए।

पिछले कुछ साल में, भारत की सत्तारुढ पार्टी बीजेपी ने अमूमन विवादास्पद नीतियों को बढ़ावा देने के लिए प्रवासी भारतियों का आक्रमक रूप से सहारा लिया है। बेशक! यह पेड कैंपेन का हिस्सा रहा है। ऐसी कई मीडिया रिपोर्ट्स हैं, जो इस बात की पूरी तरह से पुष्टि करती हैं।

सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पुष्टि की है कि उसके यू.एस. विंग, ओवरसीज फ्रेंड्स ऑफ बीजेपी-यूएसए (ओएफ-बीजेपी-यूएसए) ने यू.एस. फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट (एफएआरए) के तहत खुद को पंजीकृत किया है

27 अगस्त को हुए इस पंजीकरण, एक मुख्यधारा की भारतीय राजनीतिक पार्टी के लिए, पहले ओएफ-बीजेपी-यूएसए, न्यू जर्सी में शामिल एक गैर-लाभकारी संस्था को शामिल किया गया है, विदेशी मापदंड और नियमों के साथ गतिविधियों को करने के लिए यह संस्थाएं मौजूदा भारतीय जनता पार्टी की मदद करती है। इन गतिविधियों के समर्थन में, अमेरिकी न्याय विभाग (डीओजे) के अनुसार एफएआरए प्रवर्तन इकाई डीओजे के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रभाग के काउंटर इंटेलिजेंस और एक्सपोर्ट कंट्रोल सेक्शन के अंतर्गत आती हैं।

अंग्रेजी अखबार द हिंदू की एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2020 में, डीओजे ने घोषणा की कि वह एफएआरए को और अधिक सख्ती से लागू करना चाह रहा था, और संदिग्ध विदेशी एजेंटों को अधिनियम के तहत पंजीकरण करने या विदेशी रियासतों का प्रतिनिधित्व करने से रोकने के लिए नोटिस भेजा था। अखबार के अनुसार, ‘बीजेपी ने इस तरह के किसी भी नोटिस को प्राप्त करने से इनकार किया है।’

ओएफ-बीजेपी-यूएसए का एफएआरए पंजीकरण ऐसे समय में आता है जब बीजेपी ने आगामी अमेरिकी चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के चुनाव के लिए एक खुली प्राथमिकता दिखाई है। सबसे मज़बूती से किया गया, कार्य वो था जब पिछले साल सितंबर में ह्यूस्टन में एक रैली में, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने, ट्रम्प का समर्थन किया था।

बीजेपी के विदेश मामलों पर कड़ी नजर रखने वाले विभाग प्रमुख, विजय चौथाईवाले ने ओएफ बीजेपी-यूएसए के सदस्यों को लिखा है कि वे अमेरिकी चुनावों में प्रचार करते समय पार्टी (बीजेपी) का उल्लेख नहीं करें।

मोदी के निर्णय, ट्रम्प और उनकी पार्टी को भारतीय-अमेरिकी समुदाय के वर्गों में आगे पर विवादास्पद कारण बने जैसे कि कश्मीर की स्वायत्तता को रद्द करने के अगस्त 2019 के फैसले को बढ़ावा देना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रभावी निरस्तीकरण के समय, जिसने देश के संघीय ढांचे के भीतर जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा दिया, ओएफ-बीजेपी-यूएसए के अध्यक्ष कृष्ण रेड्डी ने कहा कि यह मोदी सरकार के लिए एक ऐतिहासिक दिन हो सकता है। धारा 370 को खत्म करने के एक लंबे सम तक इंतजार करने के बाद यह निर्णय लिया गया है। ट्रम्प प्रशासन भारत के इस कदम की आलोचना करने से हमेशा बचता है।

इसी समय, मोदी सरकार विदेशी आलोचना के प्रति संवेदनशील बनी हुई थी और इसे संतुलित करने या चुनौती देने की कोशिश की गई। पिछले साल नवंबर 2019 में नई दिल्ली में एक सार्वजनिक व्याख्यान देते हुए, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट रूप से कहा कि उनकी प्रतिष्ठा, ‘न्यूयॉर्क के एक समाचार पत्र द्वारा तय नहीं की गई थी।’

भारत के बारे में विदेश में बढ़ती आलोचना के संदर्भ में। (न्यूयॉर्क टाइम्स, विशेष रूप से कहा कि भाजपा सदस्यों के लिए आलोचना का एक पसंदीदा लक्ष्य बना हुआ है।) और फिर भी, ओएफ-बीजेपी-यूएसए के निगमन प्रमाण पत्र के अनुसार, ‘भारत और वहां के नेताओं की सकारात्मक और सही छवि पेश करने की दिशा में काम करते हैं।’ अमेरिकी विदेशी मीडिया और भारत में होने वाली वर्तमान घटनाओं की मीडिया रिपोर्टिंग इसके मुख्य उद्देश्यों में एक है।

लेकिन अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में बीजेपी के आक्रामक आउटरीच का एक हिस्सा काम करता है,- जो कभी-कभी इस तरह के संचालन पर कटाक्ष करता है। हालांकि रुसी और चीनी के भारत विदेशी हस्तक्षेप के प्रति कितने संवेदनशील हैं। इसको आप देख रहे हैं, भारत-चीन सीमा विवाद इसका ताजा उदाहरण है।

यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई सबूत नहीं है कि ओएफबीजेपी-यूएसए भारत सरकार की ओर से काम करता है ये एक तरह का खतरा है, जैसा कि कहा जाता हैं, चीनी संयुक्त मोर्चा कार्य संचालन करते हैं। लेकिन यह तथ्य कि यह एक ही लीग में होने का वाला जोखिम है जो बीजेपी और भारत दोनों को ही नुकसान दे सकता है।

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