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संस्कृति / यहां कीजिए, अद्वैत वेदांत दर्शन का आत्मिक बोध

आदि शंकराचार्य भारत के एक महान दार्शनिक और धर्मप्रवर्तक थे। उन्होने ईश्वर द्वारा बताए गए अद्वैत वेदान्त दर्शन को ठोस आधार दिया। सदियों पहले उन्होंने अद्वैत वेदांत दर्शन को जन-सामान्य तक पहुंचाने के लिए संस्कृत भाषा में भाष्य लिखे, आदि शंकराचार्य द्वारा श्रीमद्भगवद्गीता, उपनिषदों और वेदांतसूत्रों पर लिखी हुई टीकाएं बहुत प्रसिद्ध हैं।

शंकराचार्य ने कहा कि ज्ञान के दो प्रकार का होता है, ‘पराविद्या और अपराविद्या’ पहला पराविद्या सगुण ब्रह्म (ईश्वर) होता है लेकिन दूसरा अपराविद्या निर्गुण ब्रह्म होता है।

आदि शंकराचार्य ने अद्वैत दर्शन के बारे में कहा है कि ब्रह्म और जीव मूलतः और तत्वतः एक हैं। आम लोगों के जीवन में अद्वैत वेदांत क्यों जरूरी है, इस प्रश्न के बारे में आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास के असिस्टेंट डायरेक्टर डॉ. शैलेन्द्र मिश्र: बताते हैं कि अगर हमें इस चीज का बोध हो जाए कि हम दो नहीं हैं। हम सभी ब्रह्म का अंश हैं, तब हम किसी दूसरे के प्रति द्वेष, ईर्ष्या आदि सांसारिक बुराईयों के मन में नहीं रखेंगे यही अद्वैत है। यही कारण है कि अद्वैत का बोध करना जनसामान्य के लिए कितना जरूरी है यदि यह बात हर व्यक्ति को समझ में आ जाती है और वह इसे आत्मसात कर अपनी जीवन में शामिल करता है तो श्रेष्ठ व्यक्ति, समाज और देश का निर्माण संभव है।

अद्वैत दर्शन से जुड़ने का सुनहरा अवसर

अद्वैत वेदांत दर्शन को जन-सामान्य तक पहुंचाने के लिए न्यास द्वारा शंकर व्याख्यानमाला का आयोजन किया जा रहा है, कोविड-19 संक्रमण के दौरान व्याख्यानमाला ऑनलाइन कराई जा रही हैं। अद्वैत जागरण शिविर का आयोजन भी प्रारंभ किया गया है, जिसका रजिस्ट्रेशन न्यास की वेबसाइट पर कर, अद्वैत वैदांत दर्शन में रुचि और दर्शन के जन-प्रसार करने की रुचि रखने वाले व्यक्ति इस शिविर का हिस्सा बन सकते हैं। न्यास द्वारा 20 लोगों का चयन किया जाता है, जिन्हें साप्ताहिक प्रशिक्षण के लिए पहले दौर में माऊंट आबू जहां संवित सोमगिरि आश्रम में अद्वैत वेदांत दर्शन के बारे में बताया जाता है। यहां उन प्रतिभागियों को श्रवण-मनन के जरिए प्रशिक्षित किया जाता है।

इसके बाद माउंट आबू से प्रशिक्षित व्यक्तियों को केरल के वेलियानाद (Veliyanad) स्थित चिन्मय मिशन द्वारा संचालित विश्वविद्यालय में अतिरिक्त कोर्स के लिए भेजा जाएगा। यहां अद्वैत दर्शन के कोर्स की डिग्री उपलब्ध की जाती है। यहां उन प्रतिभागियों को 10 दिन का प्रशिक्षण होगा जहां पर अद्वैत क्या है? अद्वैत की भावनाएं क्या हैं? ऐसे कई प्रश्नों के उत्तर और उनको आम जीवन में कैसे उतारा जा सकता है यह सब कुछ बताया जाएगा। इसके बाद यह प्रतिभागी न्यास द्वारा बनाए गए अद्वैत जागरण क्लब के सदस्य के रूप में अद्वैत वेदांत दर्शन को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य करेंगे। यह क्रम चलता रहेगा। यह दोनों प्रशिक्षण निःशुल्क न्यास द्वारा करवाया जाएगा।

न्यास द्वारा भविष्य में अद्वैत आपके आस-पास कहां है इसका बोध कराने के लिए शंकर फैलो शुरू की जाएगी। जिसमें एक हायर लेवल की ज्यूरी, भारत के नागरिक जो अद्वैत दर्शन विषय पर शोश करेंगे। वह इस बात की जानकारी संग्रहित करेंगे कि अद्वैत लोक-संगीत, जनजाती, विज्ञान सामाजिक विज्ञान और अन्य में कहां है इस बेहद सरल तरह से जन-सामान्य तक पहुंचाया जाएगा।

डॉ. शैलेन्द्र मिश्रः बताते हैं कि शंकर संगीत पर भी कार्य जारी है। इसमें आचार्य शंकर द्वारा रचित लगभग 2 हजार श्लोक को संगीतवद्ध कराने का कार्य भारतीय शास्त्रीय संगीत गायकों सें करवाया जा रहा है। आचार्य शंकर की ज्यादातर रचनाएं समय के साथ मिलना कठिन था लेकिन भारत में श्रृंगेरी मठ और चिन्मय मिशन जैसी संस्थाओं के पास यह लगभग उपलब्ध है। इसके अलावा आचार्य शंकराचार्य ने जिन 82 स्थानों पर भारत-यात्रा के दौरान गए वहां भी से जो जानकारी मिल रही है, आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास द्वारा संग्रहित की जा रही है।

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