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विपदा / तो क्या भारत सरकार की इस गलती से मंडरा रहा, ‘मौत का संकट’

  • डॉ. वेदप्रताप वैदिक।

अमेरिका जैसे कुछ देशों में लोग बिना मास्क लगाए इस मस्ती में घूम और झूम रहे हैं, जैसे कि कोरोना की महामारी खत्म हो चुकी है। उन्होंने दो टीके क्या लगवा लिए, वे सोचते हैं कि अब उन्हें कोई खतरा नहीं है लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टी.ए. ग्रेब्रोसिस ने सारी दुनिया को अभी से चेता दिया है।

उनका कहना है कि यह दूसरा साल, कोविड-19 का, पिछले साल से भी ज्यादा खतरनाक हो सकता है। उसने तो सिर्फ एक खतरा बताया है। वह यह कि कोरोना की इस महामारी के सिर पर अब एक नया सींग उग आया है। वह है ‘बी.1.617.2.’ यह बहुत तेजी से फैलता है।

यह तो फैल ही सकता है लेकिन भारत की तरह अफ्रीका ओर एशिया के गांवों में यह नया संक्रमण फैल गया तो क्या होगा? हमारे गांवों में रहने वाले करोड़ों लोग भगवान भरोसे हो जाएंगे। न उनके पास दवा है, न डॉक्टर है और न ही अस्पताल। उनके पास इतने पैसे भी नहीं हैं कि वे शहरों में आकर अपना इलाज करवा सकें।

इस समय भारत में 18 करोड़ से ज्यादा लोगों को कोरोना का टीका लग चुका है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है लेकिन अगर कोरोना का तीसरा हमला हो गया तो क्या पता कि अकेला भारत ही दुनिया का सबसे अधिक दुखी देश बन जाए।

भारत अपने भोलेपन पर शायद खुद पछताए। उसने छह करोड़ से ज्यादा टीके दुनिया के दर्जनों देशों को बांट दिए लेकिन अब भी कई देशों के पास करोड़ों टीकों का भंडार भरा हुआ है लेकिन वे उन्हें भारत को देने में आनाकानी कर रहे हैं।

रुस-जैसे देश वैक्सीन (टीका) दे रहे हैं लेकिन जो टीका भारत में 100-150 रु. का बनता है, उसे वह हजार रु. में बेच रहा है। यह भी कितना विचित्र है कि भारत की कुछ कंपनियां, जो रेमडेसिविर इंजेक्शन बनाती है, सिर्फ निर्यात के लिए, उनको अभी तक भारत सरकार ने देश के अंदर इस्तेमाल की इजाजत नहीं दी है।

लाखों इंजेक्शन मुंबई हवाई अड्डे पर पड़े धूल खा रहे हैं। यह ठीक है कि दुनिया के कई छोटे-मोटे देश भारत को ऑक्सीजन-यंत्र, दवाइयां, कोरोना-किट आदि भेंट कर रहे हैं लेकिन वे यह क्यों नहीं सोचते कि भारत के बुजुर्गों को टीके सबसे पहले लगने चाहिए। उन देशों के बच्चों और नौजवानों को उतना खतरा नहीं है, जितना भारत के बुजुर्गों को है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दुनिया के देशों से अपील की है कि वे फ्रांस और स्वीडन का अनुकरण करें, जिन्होंने अपने वरिष्ठ नागरिकों को टीके लगाने के बाद उन्हें अन्य देशों के जरुरतमंदों को उपलब्ध करवाना शुरु कर दिया है।

बहरहाल, भारत के 140 करोड़ से ज्यादा लोगों को अपनी कमर कसनी होगी। अगर तीसरा हमला हुआ तो उसका मुकाबला भी डट कर करना होगा। टीका, इंजेक्शन, ऑक्सीजन वगैरह तो जुटाएं ही जाएं, उनके साथ-साथ मुखपट्टी, शारीरिक दूरी, प्राणायाम, काढ़ा, घरेलू इलाज और अपना मनोबल बुलंद बनाकर रखा जाए।

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