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मुद्दा / एप्पल के वार्षिक कारोबार का 43 गुना है महिलाओं द्वारा किया जाने वाला अवैतनिक काम

दुनिया भर में महिलाओं द्वारा किया जाने वाला अवैतनिक काम हर साल लगभग 10 ट्रिलियन डॉलर का होता है। यह राशि एप्पल के वार्षिक कारोबार का 43 गुना है। बाजार मूल्य के मामले में एप्पल (एप्पल एक अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनी है जो इलेक्ट्रॉनिक्स और कंप्यूटर सॉफ्टवेयर उत्पादों का डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग करती है।) दुनिया की अग्रणी कंपनियों में से एक है। यह खुलासा 21 जनवरी को जारी ऑक्सफैम की रिपोर्ट में हुआ है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में महिलाओं द्वारा घरों और उनके बच्चों की देखरेख में किए गए अवैतनिक कार्य देश के सकल घरेलू उत्पाद का 3.1% है। उल्लेखनीय रूप से, शहरी क्षेत्रों में रहने वाली महिलाएं प्रति दिन 312 मिनट अवैतनिक काम करती हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं प्रति दिन 291 मिनट खर्च करती हैं। यह संख्या पुरुषों द्वारा अवैतनिक देखभाल कार्य पर बिताए जाने वाले मिनटों की संख्या से 10 गुना है। शहरी क्षेत्रों में रहने वाले पुरुष दिन में सिर्फ 29 मिनट बिताते हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में पुरुष प्रतिदिन 32 मिनट अवैतनिक कार्य में बिताते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘एक महिला की प्राथमिक भूमिका घर और उसके परिवार की देखभाल करना है और आय-सृजन का कोई काम इस भूमिका के लिए जरूरी है।’ रिपोर्ट में पुरुषों और महिला श्रमिकों के बीच मौजूद भारी वेतन पर भी प्रकाश डाला गया है। भारत के लिए लिंग आधारित वेतन में अंतर 34% है। अध्ययन में 2018 के वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स पर भारत की खराब रैंकिंग 108 का हवाला दिया गया है। यह रैंक 2006 में वैश्विक औसत से काफी नीचे होने के साथ-साथ 10वें पायदान से भी कम है। इस रैंकिंग में भारत चीन और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों से पीछे है।

स्विट्जरलैंड के दावोस में डब्ल्यूईएफ वार्षिक बैठक की शुरुआत से पहले अंतरराष्ट्रीय अधिकार समूह द्वारा जारी एक रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत सहित दुनिया भर में महिलाएं और लड़कियां बढ़ती आर्थिक असमानता की वजह से सबसे कठिन समय से गुजर रही हैं। साथ ही, दुनिया भर के 119 सदस्यीय अरबपति क्लब में सिर्फ 9 महिलाएं हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पितृसत्तात्मक समाज के कारण, महिलाओं के खिलाफ हिंसा से निपटने वाले कई कानूनों का क्रियान्वयन बेहद चिंताजनक हैं। इसमें बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश में किए गए 1,000 घरों के सर्वेक्षण का भी हवाला दिया गया। सर्वेक्षण में शामिल 53% लोगों का मानना है उन्होंने कभी न कभी महिलाओं की ‘कठोर आलोचना’ की है वो इस बात को स्वीकार करते हैं। यदि वह बच्चों की अच्छी देखभाल करने में विफल रही, तो 33% ने कहा कि इस कारण उन्होंने महिलाओं के साथ हिंसा भी की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्थिक असमानता और खराब सार्वजनिक सेवाओं में महिलाएं और लड़कियां प्रमुख शिकार हैं।

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