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मुद्दा / बीजेपी उवाच, ‘हमने कब रोका’, तो कश्मीर के क्या हैं वास्तविक हालात!

कश्मीर में यूरोप के 27 सांसदों के जाने पर मोदी सरकार से विपक्ष के सवाल पर विवाद बरकरार है। बीजेपी प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने मंगलवार को कहा, ‘कश्मीर जाना है तो कांग्रेस वाले सुबह की फ्लाइट पकड़कर चले जाएं। गुलमर्ग जाएं, अनंतनाग जाएं, सैर करें, घूमें-टहलें। किसने उन्हें रोका है? अब तो आम पर्यटकों के लिए भी कश्मीर को खोल दिया गया है। जब कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटा था, तब शांति-व्यवस्था के लिए ऐहतियातन कुछ कदम जरूर उठाए गए थे, मगर हालात सामान्य होते ही सब रोक हटा ली गई।’

हुसैन ने कहा कि अब हमारे पास कुछ छिपाने को नहीं, सिर्फ दिखाने को है। जब कश्मीर में तनाव फैलने की आशंका थी, तब बाबा बर्फानी के दर्शन को भी तो रोक दिया गया था। यूरोपीय संघ के सांसद कश्मीर जाना चाहते थे। वे पीएम मोदी से मिले तो अनुमति दी गई। कश्मीर को जब आम पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है तो विदेशी सांसदों के जाने पर हायतौबा क्यों? विदेशी सांसदों के प्रतिनिधिमंडल के कश्मीर जाने से पाकिस्तान का ही दुष्प्रचार खत्म होगा।

ये तो बात हुई सरकार के पक्ष की विपक्ष यानी कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट कर पूछा था, ‘यूरोप के सांसदों का जम्मू-कश्मीर में एक निर्देशित दौरे का स्वागत किया जा रहा है जबकि भारतीय सांसदों के जाने पर पाबंदी लगी है। इस बात का उत्तर देते हुए शहनवाज हुसैन ने पार्टी की बात कही है।

बात तीन महीने पहले की यानी 5 अगस्त, 2019 ये वो तारीख है जब भारत के अभिन्न अंग जम्मू कश्मीर से विशेष दर्जा खत्म कर दिया गया। कई लोगों ने समर्थन किया तो कुछ लोगों ने असहमति अपने-अपने माध्यमों के द्वारा दर्ज की। तब से यह पहली बार यूरोप के 27 सांसदों का दल राज्य का दौरा करने जा रहा है। कहा जा रहा है कि सांसदों का यह दल जम्मू-कश्मीर के अलग-अलग इलाकों में जाकर जमीनी सच्चाई देखेगा।

जम्मू-कश्मीर के दौरे से पहले इस दल ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल से मुलाकात की।

तो वहीं, ब्रिटेन, फ़्रांस, जर्मनी और पोलैंड के इन सांसदों के बारे में कहा जा रहा है कि ये कोई आधिकारिक दौरे पर नहीं जा रहे बल्कि ये निजी यात्रा पर आए हैं। कहने वाले बहुत कुछ कह रहे हैं, लेकिन भारत सरकार द्वारा इन सांसदों का कश्मीर जाा निजी नहीं हो सकता। हालांकि ये बातें सोशल मीडिया पर ये बात कही जा रही है कि इनमें से ज्यादातर सांसद दक्षिणपंथी विचार के करीबी लोग हैं। वैसे इस बात पर भी गौर करना चाहिए कि इससे पहले भारत ने अमरीकी सीनेटर क्रिस वान हॉलेन के कश्मीर जाने के अनुरोध को ठुकरा दिया था।

सोमवार शाम यूरोपीय यूनियन के प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और उनसे कश्मीर समेत व्यापार से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की। प्रधानमंत्री ने इस मौक़े पर किसी देश का नाम लिए बगैर कहा कि विश्व के सामने आज सबसे बड़ी समस्या आतंकवाद और आतंकवाद का वित्तपोषण करने वाले हैं।

प्रतिनिधिमंडल में शामिल ब्रिटेन की लिबरल पार्टी के नेता बिल न्यूटन डन ने कहा, ‘मैंने कश्मीर की स्थिति के बारे में लोगों से काफ़ी कुछ सुना है और हम यहां की ज़मीनी सच्चाई जानना चाहते हैं और जानना चाहते हैं कि लोग कैसे हैं। हम कुछ स्थानीय लोगों से बात करेंगे क्योंकि हम चाहते हैं कि सभी की जिंदगी खुशहाल हो।’

कश्मीर पर कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक मोहम्मद तकी द डिप्लोमेट को बताते हैं कि पिछले तीन महीनों से सरकार ने न किसी राजनीतिक प्रतिनिधिमंडल को, न बाहर के किसी एनजीओ को, यहां तक कि विदेशी पत्रकारों पर भी एक तरह से पाबंदी लगा रखी थी।

लोग बात करना नहीं चाहते क्योंकि उन्हें लगता है कि अगर वो बात करते हैं तो फिर से उन पर किसी तरह की ज़ोर जबर्दस्ती होगी। क्या इनके सामने वो खुल के बेझिझक बात कर सकेंगे? यही सबसे बड़ा सवाल है। ऐसे में फिर इस टीम के नतीजे भी एकतरफा रहेंगे। उसमें सभी पक्ष तो नहीं रहेंगे।

अभी भी कई बड़े नेता और अलगाववादी नेता या तो गिरफ्तार हैं या फिर हिरासत में हैं। आला नेता ही नहीं बल्कि दूसरी क़तार और तीसरी क़तार के नेता भी हिरासत में हैं या फिर गिरफ्तार हैं। और तो और ब्लॉक स्तर के नेता भी कैद में है। व्यापार समूह के लोग, वकील, एनजीओ के लोग, अकादमिक लोग भी कै़द में हैं या फिर नज़रबंद हैं। तो ऐसे में ये प्रतिनिधिमंडल बातचीत किससे करेगा।

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