Press "Enter" to skip to content

जानकारी / 18 की उम्र में सीखी डेटा पॉलिटिक्स कर चुके हैं ये खुलासा

कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया में जन्में क्रिस्टोफर वायली एक डेटा साइंटिस्ट हैं। वह साइकोलॉजिकल प्रोफाइलिंग के एक्सपर्ट भी हैं। जब वह 18 साल के थे तब पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के राजनीतिक रणनीतिकार केन स्ट्राज्म ने उन्हें इलेक्शन के माइक्रोटारगेटिंग और डेटा पॉलिटिक्स के बारे में पारंगत बनाया था।

इसके बाद वायली कैंब्रिज एनालिटिका के रिसर्च हेड बने और इसी दौरान उन्होंने वोटर्स को प्रभावित करने के तरीकों पर काम किया। वायली ने साइकोलॉजिस्ट की एक टीम के साथ मिलकर साइकोलॉजिकल प्रोफाइलिंग का सिस्टम तैयार किया।

क्रिस्टोफर वायली इन दिनों सोशल चर्चा में बने हुए हैं। वायली ही वह व्यक्ति हैं, जिन्होंने हालही में फेसबुक डेटा लीक का खुलासा किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक क्रिस्टोफर वायली ने कहा है कि कैम्ब्रिज एनालिटिका भारत में बड़े पैमाने पर काम करती थी। वायली इस ब्रिटिश फर्म में रिसर्च हेड के पद पर काम कर चुके हैं।

मेरे पास दो कंपनियों से जॉब के ऑफर थे

उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि भारत में कांग्रेस उसकी (कैम्ब्रिज एनालिटिका) क्लाइंट थी। मुझे नेशनल प्रोजेक्ट तो याद नहीं, लेकिन रीजनल प्रोजेक्ट था।’ उनके इस बयान के बाद भारत में पक्ष-विपक्ष के बीच बहसबाजी का दौर चल रहा है। बता दें कि वायली ने यह बयान ब्रिटिश पार्लियामेंट की डिजिटल, कल्चर, मीडिया और स्पोर्ट्स कमेटी के सामने दिया है।

‘द ऑब्जर्वर’ को दिए इंटरव्यू में वायली ने कहा था, ‘मेरे पास दो कंपनियों से जॉब के ऑफर थे। अफसोस कि इसमें से मैनें कैंब्रिज एनालिटिका को चुना। अपनी रिसर्च के लिए मैं माफी मांगता हूं। कैंब्रिज एनालिटिका सांस्कृतिक युद्ध के लिए हथियारों का जखीरा है। मुझे कैम्ब्रिज एनालिटिका ज्वॉइन करने पर अफसोस है।’

क्या है फेसबुक डेटालीक मामला

दरअसल, कैम्ब्रिज एनालिटिका पर 5 करोड़ फेसबुक यूजर्स का डेटा चुराकर अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में गलत इस्तेमाल करने का आरोप है। गार्डियन और न्यूयॉर्क टाइम्स ने रिपोर्ट्स में भी यही खुलासा किया था कि ट्रम्प कैंपेन से जुड़ी ब्रिटिश फर्म एनालिटिका ने 2014 में फेसबुक यूजर्स का डेटा गलत तरीके से हासिल किया था।

फेसबुक को इस बारे में जानकारी थी, लेकिन उसने यूजर्स को अलर्ट नहीं किया। फेसबुक ने एनालिटिका को अपने प्लेटफार्म से हटा दिया था और ये भरोसा भी दिलाया था कि फर्म ने डेटा डिलीट कर दिया है। लेकिन, ऐसा हुआ नहीं।

ब्रिटिश चैनल 4 पर एनालिटिका के सीईओ एलेग्जेंडर निक्स ने माना था कि चुनाव जीतने के लिए फर्म लड़कियों का इस्तेमाल करती है, रिश्वत देती है। उन्होंने ये भी कहा कि डेटा पर काम के चलते ट्रंप को बड़ी जीत मिली।

More from सोशल हलचलMore posts in सोशल हलचल »

Be First to Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *