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क्लाइमेट स्ट्राइक / ग्रेटा थनबर्ग, पर्यावरण कार्यकर्ता ने की शुरूआत, अब दिल्ली से बच्चों का भी मिला साथ

Picture: Greta Thunberg, Climate activist

क्लाइमेट स्ट्राइक 16 साल की स्वीडिश कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग द्वारा की गई मुहिम है। जो 2018 में शुरू की गई थी। स्वीडन की 16 साल की एक क्लाइमेट एक्टिविस्ट (जलवायु कार्यकर्ता) ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जलवायु परिवर्तन रोकने की दिशा में कुछ गंभीर कदम उठाने की मांग भी कर चुकी हैं।

ये एक अंतरराष्ट्रीय कैंपेन है, जिसमें ग्रेटा और उनकी पीआर टीम ने बिजनेस/क्लाइमेट स्ट्राइक के जरिए दुनियाभर के लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। पर्यावरण के प्रति जागरुकता को लेकर काम कर रहीं ग्रेटा का कहना है कि अगर आप ऐसा करने में नाकामयाब साबित हुए तो मानव इतिहास में आपको एक बड़े खलनायक के रूप में देखा जाएगा।

ग्रेटा थनबर्ग नाम की लड़की ने बीते साल 2018 ‘स्कूल स्ट्राइक’ करते हुए स्वीडिश संसद भवन के सामने धरने पर बैठ गई थी। उसके इस अभियान को अन्य स्टूडेंट्स का भी जमकर सपोर्ट मिला था। अब लड़की ने दुनियाभर के राष्ट्राध्यक्षों के नाम अलग-अलग वीडियो मैसेज जारी करते हुए उनसे जलवायु परिवर्तन को लेकर कुछ गंभीर कदम उठाने के लिए कहा है।

दिसंबर 2018 में पौलेंड में हुई यूएन क्लाइमेट चेंज कॉन्फ्रेंस में दिए अपने तीखे भाषण के बाद ग्रेटा जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई का बड़ा चेहरा बनकर उभरी थीं। वहां दिए भाषण में उसने कहा था कि हमें धरती के नीचे मौजूद तेल और खनिज भंडारों को बचाने की जरूरत है, साथ ही दुनिया में समानता लाने पर ध्यान देने की जरूरत है।

तब ग्रेटा ने कहा था ‘हम यहां विश्व के नेताओं से पर्यावरण की रक्षा के लिए भीख मांगने नहीं आए हैं, आपने पहले भी हमें नजरअंदाज किया था, और आगे भी आप ऐसा ही करेंगे। अब वक्त हमारे हाथ से निकल रहा है और हम बहानों से तंग आ चुके हैं।’

दिल्ली के बच्चों का भी मिला साथ

बीते सप्ताह ग्रेटा के इस कैंपेन का असर शुक्रवार का को राजधानी दिल्ली में देखने को मिला। सैकड़ों बच्चे सड़क पर मौजूद थे। वो हाथ में बैनर और पोस्टर लिए हुए थे। मासूम चेहरों पर गंभीरता थी। ग्लोबल क्लाइमेट स्ट्राइक जिसके लिए दिल्ली के कई स्कूल के बच्चे आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के बाहर इकट्ठा हुए।

ये बच्चे राजनेताओं और नीति निर्माताओं के लिए एक संदेश थे। उस काम को करने के लिए जो आज बेहद जरूरी है यानी धरती को सुरक्षित रखना। यदि ये नीति निर्माता आज विफल होते हैं तो आप भविष्य की कई पीढ़ियों को विफल कर देंगे, यहीं संदेश लिए तख्तियों और पोस्टरों से लेकर नारों और गीतों के साथ उन्होंने दिल्ली की युवा पीढ़ी को उन जिम्मेदारियों के लिए स्पष्ट किया।

दिल्ली के 16 साल के अमन शर्मा ने इंडिया टाइम्स को बताया कि देश में जलवायु आपातकाल घोषित करने की मांग के मामले में सबसे आगे थे, हमारे आस-पास की जलवायु एक आपातकालीन स्थिति का सामना कर रही है। यदि हम यहां नहीं हैं तो हम अपना समय बर्बाद कर रहे हैं। यदि हमें अपना सुरक्षित रखना है तो यह वह जगह है जहां हमें आज होना चाहिए ।

बारहवीं कक्षा के छात्र 17 वर्षीय श्रीनजनी ने कहा कि यह एक ऐसा मुद्दा है जो हम सभी को प्रभावित करने वाला है। इसलिए हम इसे वह महत्व नहीं दे रहे हैं जो इसकी जरूरत है। यह उच्च समय है कि हमारे नेता हमारे पर्यावरण के क्षरण और जलवायु परिवर्तन पर गंभीरता से विचार करें। अमेजन में जंगल की आग से लेकर मुंबई के आरे के जंगल में पेड़ों की कटाई और हरियाणा में अरावली की तबाही तक, भारत की युवा पीढ़ी ने कहा कि वे पर्यावरण की कीमत पर विकास का स्वागत नहीं करते हैं।

15 साल के वीर कहते हैं कि मैं अपने जीने के अधिकार के लिए लड़ रहा हूं क्योंकि मेरे नीति निर्माताओं ने मुझे अपने भविष्य से वंचित कर दिया है, मेरे ग्रह का आनंद लेने के अपने अधिकार का पालन करते हैं। क्योंकि एक बार जब मैं अपने ग्रह को खो देता हूं, तो कुछ ऐसा नहीं है जो मुझे वापस मिल जाएगा। वे मुझे देने के हकदार हैं। पर्यावरण और पेड़ वापस। भारत पहले से ही एक खराब स्थिति में है जब जलवायु आपातकाल की बात आती है।

वो बताते हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत मानक 33 प्रतिशत है, लेकिन भारत में सिर्फ 22 प्रतिशत है। मैं हरियाणा से हूं, जिसमें केवल 5 प्रतिशत वन हैं। इसके शीर्ष पर, कई कानून हैं जो हमारे पास एकमात्र जंगल पर हमला कर रहे हैं, जो कि अरावली है। महाराष्ट्र में आरे (लकड़ी काटने का औजार) से वन पर हमला हो रहा है। हमें कुछ करने और कुछ सख्त कदम उठाने की जरूरत है।

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