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रूस / कौन है नवेलनी जो बन गया है व्लादिमीर पुतिन की मुसीबत

चित्र : एलेक्सी नवेलनी

सरकार के खिलाफ, विरोध प्रदर्शन सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि रूस में भी चल रहा है। फर्क इतना है कि यहां किसानों का विरोध प्रदर्शन सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ है और वहां विपक्षी नेता और राष्ट्रपति पुतिन के अलोचक एलेक्सी नवेलनी के समर्थन में लोग सड़कों पर उतरे हैं। ये लोग राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का विरोध कर रहा हैं।

क्यों कर रहे हैं विरोध : दरअसल रूस में मास्को की एक अदालत ने विपक्षी नेता एलेक्सी नवेलनी को ढाई साल से ज्यादा कैद की सजा सुनाई है। नवेलनी अभी जमानत पर बाहर थे और कोर्ट ने उन्हें जमानत की शर्तों के उल्लंघन का दोषी करार देते हुए ये सजा सुनाई थी। नवेलनी और उनके समर्थक उन पर लगे आरोपों को राजनीति से प्रेरित कहकर ख़ारिज करते रहे हैं।

उनका दावा है कि रूस की सरकार उन्हें जेल में डाले रखना चाहती हैं क्योंकि वो घोटालों और भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करते हैं। पहले रूस की सरकार नवेलनी को ऐसा ब्लॉगर कहकर ख़ारिज करती रही है जिसे कोई नहीं जानता है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तो सार्वजनिक तौर पर उनका नाम तक नहीं लेते हैं। लेकिन अब सरकार को उनके आरोपों पर जवाब देने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

विदेश मामलों के जानकार डॉ. वेदप्रताप वैदिक कहते हैं कि व्लादिमीर पुतिन के एक छत्र राज्य में यह सब क्यों हो रहा है? यह हो रहा है, एलेक्सी नवेलनी के नेतृत्व में। नवेलनी 46 साल का चिर-युवा है, जिसने सरकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ देश व्यापी अभियान चला रखा है और जिसे अगस्त 2020 में जहर देकर मारने की कोशिश की गई थी।

नवेलनी यूं तो 2008 से ही कई सरकारी कंपनियों और नेताओं के भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए रूस में प्रसिद्ध हो गए थे लेकिन पिछले दिनों जब एक हवाई यात्रा के दौरान वे अचानक बेहोश हो गए तो उन्हें इलाज के लिए जर्मनी ले जाया गया।

जर्मन डाक्टरों ने सिद्ध किया कि उन्हें जहर दिया गया था। इसी तरह का ‘नोविचेक’ नामक जहर रूसी जासूस सर्गेइ स्कृपाल को भी देकर मारा गया था। यूरोपीय संघ ने नवेलनी के मामले में कई रूसी संस्थाओं पर प्रतिबंध भी लगा दिए हैं। वैसे नवेलनी को कोई प्रभावशाली नेता नहीं माना जाता था लेकिन उसके उग्र राष्ट्रवादी तेवरों और भ्रष्टाचार-विरोध के कारण रूसी नौजवान उसके तरफ आकर्षित होने लगे थे। 2011 के चुनावों में उसका असर भी दिखाई पड़ने लगा।

पुतिन की ‘यूनाइटेड रशिया’ पार्टी को वह ‘गुंडों और चोरों का अड्डा’ कहने लगा। उसे दो-तीन बार जेल भी हुई लेकिन वह डरा नहीं। अब उसने पुतिन के भ्रष्टाचार पर सीधा आक्रमण शुरु कर दिया है। अब पुतिन की तरह उसे भी सारी दुनिया जानने लगी है। जर्मनी से इलाज करवाकर लौटने पर उसे दुबारा जेल में डाल दिया गया है।

नवेलनी की रिहाई के लिए हजारों प्रदर्शनकारी गिरफ्तारियां दे रहे हैं। ‘ब्लेक सी’ पर अरबों रु. से बने महल को पुतिन का बताया जा रहा है। इन आरोपों को पुतिन बराबर रद्द करते आ रहे हैं और कह रहे हैं कि वे रूस में शांति और व्यवस्था बनाए रखने में कोई कसर नहीं रखेंगे। पश्चिमी राष्ट्र रूस की इस मुसीबत का मजा ले रहे हैं।

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