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अयोध्या / ‘सनातन संस्कृति’ की अभिव्यक्ति का वो ‘अमिट पल’

  • योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री, उत्तरप्रदेश।

जासु बिरहं सोचहु दिन राती। रटहु निरंतर गुन गन पॉंती।।
रघुकुल तिलक सुजन सुखदाता। आयउ कुसल देव मुनि त्राता।।

सकल आस्था के प्रतिमान रघुनन्दन प्रभु श्रीराम की जन्म स्थ‍ली धर्मनगरी श्री अयोध्या जी की पावन भूमि पर श्री रामलला के भव्य और दिव्य‍ मंदिर की स्थापना की प्रक्रिया गतिमान है।

लगभग पांच शताब्दियों की भक्त पिपासु प्रतीक्षा, संघर्ष और तप के उपरांत, कोटि-कोटि सनातनी बंधु-बांधवों के स्वप्न को साकार करते हुए 05 अगस्त 2020 को अभिजीत मुहूर्त में मध्यान्ह बाद 12.30 से 12.40 के बीच आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के कर-कमलों से श्री रामलला के चिरअभिलाषित भव्य-दिव्य मंदिर की आधारशिला रखी जाएगी।

नि:सन्देह यह अवसर उल्लास, आह्लाद, गौरव एवं आत्म सन्तोष का है, सत्य जीत करूणा का है। हम भाग्यशाली हैं कि प्रभु श्रीराम ने हमें इस ऐतिहासिक घटना के साक्षी होने का सकल आशीष प्रदान किया है। भाव-विभोर कर देने वाली इस वेला की प्रतीक्षा में लगभग पांच शताब्दियां व्यतीत हो गईं, दर्जनों पीढियां अपने आराध्य का मंदिर बनाने की अधूरी कामना लिए भावपूर्ण सजल नेत्रों के साथ ही, इस धराधाम से परमधाम में लीन हो गईं, किन्तु प्रतीक्षा और संघर्ष का क्रम सतत जारी रहा।

वास्तव में दीर्घकालीन, दृढ़प्रतिज्ञ, संघर्षमय और भावमयी करूणा प्रतीक्षा की परिणति अनंत सुखद होती है। आज वह शुभ घड़ी आ ही गई कि जब कोटि-कोटि सनातनी आस्थावानों के त्याग और तप की पूर्णाहुति हो रही है। मर्यादा के साक्षात प्रतिमान,पुरूषोतम, त्यागमयी आदर्श चरित्र के अवधपुरी के प्राणपिय राजा श्रीराम आज अपने वनवास की पूर्णाहुति कर हमारे हृदयों के भावपूरित संकल्प स्वरूप सिंहासन पर विराजने जा रहे हैं।

सत्य ही कहा गया है, आस्था से उत्पन्न भक्ति की शक्ति का प्रताप अखंड होता है। श्री रामजन्म भूमि मंदिर निर्माण में अवरोध विगत पांच शताब्दियों से सनातन हिन्दू समाज की आस्थावान सहिष्णुता की कठोर परीक्षातुल्य था। आज उस परीक्षा के शुभ परिणाम का उत्सव मनाने का अवसर है। श्री रामलला विराजमान की भव्य प्राण-प्रतिष्ठा भारत की सांस्कृतिक अन्तरात्मा की समरस अभिव्यक्ति का प्रतिमान सिद्ध होगा।

श्री राम जन्म भूमि मंदिर के निर्माण हेतु भूमि पूजन के बहुप्रतीक्षित अवसर पर आज सहज ही दादागुरू ब्रह्मलीन गोरक्षपीठाधीश्वेर महंत श्री दिग्विजयनाथ जी महाराज और पूज्य गुरूदेव ब्रह्मलीन गोरक्षपीठाधीश्वर महंत श्री अवेद्यनाथ जी महाराज का पुण्य स्मरण हो रहा है। मैं अत्यंत भावुक हूं कि हुतात्मा भौतिक शरीर से इस अलौकिक सुख देने वाले अवसर के साक्षी नहीं बन पा रहे किंतु आत्मिक दृष्टि से आज उन्हें असीम संतोष की अनुभूति अवश्य हो रही होगी।

ब्रितानी परतंत्रता काल में श्रीराममंदिर के मुद्दे को स्वर देने का कार्य महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज ने किया था। सन् 1934 से 1949 के दौरान उन्होंने राम मंदिर निर्माण हेतु सतत् संघर्ष किया। 22-23 दिसम्बर 1949 को जब कथित विवादित ढांचे में श्रीरामलला का प्रकटीकरण हुआ, उस दौरान वहां तत्कावलीन गोरक्षपीठाधीश्वर, गोरक्षपीठ महंत श्री दिग्विजयनाथ जी महाराज कुछ साधु-संतों के साथ संकीर्तन कर रहे थे।

28 सितंबर 1969 को उनके ब्रह्मलीन होने के उपरांत अपने गुरूदेव के संकल्प को महंत श्री अवेद्यनाथ जी महाराज ने अपना बना लिया, जिसके बाद श्री राम मंदिर निर्माण आंदोलन के निर्णायक संघर्ष की नवयात्रा का सूत्रपात हुआ। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मार्गदर्शन, पूज्य संतों का नेतृत्वत एवं विश्व् हिन्दू परिषद की अगुवाई में आजादी के बाद चले सबसे बड़े सांस्कृातिक आंदोलन ने न केवल प्रत्येक भारतीय के मन में संस्कृति एवं सभ्यता के प्रति आस्था का भाव जागृत किया अपितु भारत की राजनीति की धारा को भी परिवर्तित किया।

21 जुलाई, 1984 को जब अयोध्या के वाल्मीकि भवन में श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति का गठन हुआ था तो सर्वसम्मति से पूज्य गुरूदेव गोरक्षपीठाधीश्वर महंत श्री अवेद्यनाथ जी महाराज को अध्यक्ष चुना गया। तब से आजीवन श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के महंत श्री अवेद्यनाथ जी महाराज अध्यक्ष रहे। पूज्य संतों की तपस्या के परिणाम स्वरूप राष्ट्र वैचारिक चेतना में विकृत, पक्षपाती एवं छद्म धर्मनिरपेक्षता तथा साम्प्रादायिक तुष्टीकरण की विभाजक राजनीति का काला चेहरा बेनकाब हो गया।

वर्ष 1989 में जब मंदिर निर्माण हेतु प्रतीकात्मक भूमिपूजन हुआ तो भूमि की खोदाई के लिए पहला फावड़ा स्वयं पूज्य गुरूदेव महन्त श्री अवेद्यनाथ जी महाराज एवं पूज्य सन्त परमहंस रामचन्द्र दास जी महाराज ने चलाया था। इन पूज्य सन्तों की पहल, श्रद्धेय अशोक सिंघल जी के कारण पहली शिला रखने का अवसर श्री कामेश्वर चौपाल जी को मिला। आज श्री कामेश्वर जी श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के सदस्य होने का सौभाग्य धारण कर रहे हैं।

जन्म भूमि की मुक्ति के लिए बड़ा और कड़ा संघर्ष हुआ है। न्याय और सत्य के संयु‍क्त विजय का यह उल्लास अतीत की कटुस्मृ‍तियों को विस्मृत कर, नए कथानक रचने, और समाज में समरसता की सुधा सरिता के प्रवाह की नवप्रेरणा दे रहा है।

सनातन संस्कृति के प्राण प्रभु श्रीराम की जन्मस्थली हमारे शास्त्रों में मोक्षदायिनी कही गई है। आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश सरकार इस पावन नगरी को पुन: इसी गौरव से आभूषित करने हेतु संकल्पबद्ध है।

श्री अयोध्या जी वैश्विक मानचित्र पर महत्वपूर्ण केन्द्र के रूप में अंकित हो और इस धर्मधरा में रामराज्यय की संकल्प मूर्त भाव से अवतरित हो इस हेतु हम नियोजित नीति के साथ निरन्तर कार्य कर रहे हैं। वर्षों तक राजनीतिक उपेक्षा के भंवर जाल में उलझी रही अवधपुरी, अध्यात्मिक और आधुनिक संस्कृ्ति का नया प्रमाण बनकर उभरेगी।

निश्चित रूप से, 05 अगस्त को श्री अयोध्या जी में आयोजित भूमिपूजन/शिलान्यास कार्यक्रम में सहभागिता हेतु प्रभु श्रीराम के असंख्य भक्तगण परम् इच्छुत होंगे, किन्तु, वर्तमान वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा। इसे प्रभु इच्छा, मानकर सहर्ष स्वी्कार करना चाहिए।

आदरणीय प्रधानमंत्री जी सवा सौ करोड़ देशवासियों की आकांक्षाओं के प्रतिबिंब हैं, वह स्वयं भूमिपूजन/शिलान्यांस करेंगे यह प्रत्येक भारतीय के लिए गौरव का क्षण होगा। आदरणीय प्रधानमंत्री जी के कारण ही देश और दुनिया लगभग पांच शताब्दी। बाद इस शुभ मुहूर्त का अहसास कर पा रहा है।

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