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व्यसन / जी नही! नशा करना एक आध्यात्मिक प्रक्रिया नहीं है

कोई भी व्यक्ति, समाज या देश समृद्धि चाहता है क्योंकि पहले स्तर पर यह हमें अपने पसंद का आहार चुनने के विकल्प देती है। अगले स्तर पर यह हमें अपनी पसंद की जीवनशैली चुनने की क्षमता प्रदान करती है। अमेरिका जैसे समृद्ध देश में जहां अपनी पसंद के खान-पान और जीवन-शैली के कई प्रकार मौजूद हैं, 70 प्रतिशत जनसंख्या चिकित्सीय इलाज पर है। बाकी 30 प्रतिशत इसे गलत तरीके से खरीदते हैं। अमेरिका में 30 करोड़ की जनसंख्या के लिए तीन लाख करोड़ डॉलर स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च होते हैं।

अगर खान-पान और रहन-सहन के इतने विकल्प मौजूद हों तो अच्छे स्वास्थ्य की आशा करना स्वाभाविक ही है। लेकिन ऐसा अगर नहीं हो रहा है तो हमें इस पर गौर करना होगा। क्योंकि यह सवाल केवल अमेरिका ही नहीं बल्कि दुनिया में हर जगह लागू होगा। क्योंकि अमेरिका आज सबके लिए एक महत्त्वाकांक्षा बन गया है तो हर कोई प्रयास कर रहा है बस वहां तक पहुंचने के लिए और परिणामस्वरूप बीमार होने के लिए।

उदाहरण के लिए, 40-50 साल पहले जब लोगों को अपनी बेटियों का ब्याह करना होता था तो वो कहते थे, ‘ओह, उस घर के लोग शराब पीते हैं, वहां हम अपनी बेटियों का ब्याह नहीं करेंगे।’ लेकिन आज अगर शराब न हो तो आपके यहां शादी में कोई नहीं आएगा। इतना बदलाव हम इस दुनिया में पिछले पचास वर्षो में ही देखने लगे हैं।

दरअसल हम उस जगह पहुंच रहे हैं जहां स्वस्थ रहने के लिए हमें केमिकल्स चाहिए, खुश रहने के लिए केमिकल्स चाहिए, शांति के साथ रहने के लिए केमिकल्स चाहिए, और तो और, परमानंद के लिए तो एक्स्टैसी नाम की ड्रग है ही।

लोग आतंरिक अनुभव के लिए किसी प्रकार के केमिकल्स की तरफ क्यों जा रहे हैं? चाहे वो भांग, चरस, शराब, गांजा, कोकेन, एलएसडी या कुछ और हो, यह सब हमारी आतंरिक रुकावटों को कुछ देर के लिए समाप्त कर हमें आजादी का अनुभव कराती हैं।

मान लीजिए किसी को ‘मेथ’ केमिकल की आदत है, उसे इतने शानदार अनुभव होते हैं कि वो इसे छोड़ नहीं सकता। लोगों के दिमाग में इतना मैल भरा है कि उन्हें थोड़ा खुलने के लिए केमिकल्स की जरूरत पड़ती है। आपको ये समझना चाहिए कि ये आपकी क्षमताओं की कीमत पर आता है। क्या आपको लगता है की आप अपनी क्षमताओं को कम करके जीवन की ऊंचाइयों को छू सकते हैं?

ये केमिकल आपको अपने अंदर विस्तार का एक अनुभव तो कराते हैं किन्तु यह अनुभव कृत्रिम है। लेकिन एक बार आप इसे लेना शुरू कर दें तो अपनी क्षमताओं को कुछ समय के बाद कम करने लगते हैं। कुछ दिनों के बाद अगर कुछ बाकी रहता है तो वह है केवल ड्रग्स।

समस्या केवल यह नहीं है कि केमिकल आपके शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं और आपको मार सकते हैं। इससे भी बड़ी समस्या यह है कि ये आपको आजादी का एक बनावटी अनुभव कराते हैं – आपको ये अगर कुछ दे रहा है तो केवल एक व्यसन, एक विवशता।

अगर आप यह जान जाएं कि इंसान का शरीर किस तरह काम करता है तो स्वाभाविक ही आप अपने लिए उच्चतम श्रेणी का आनंद उत्पन्न करेंगे। प्रश्न केवल इस बात का है कि क्या आपने इस सम्भावना का पता लगाया है?

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