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अनुराग / रिश्तों की उलझन को सुलझाने का यह है सबसे सरल उपाय

अगर आप मानव अस्तित्व की सबसे बुनियादी समस्या यानी रिश्तों में उलझन से निबटने की कोशिश करते हैं, तो बाकी सभी समस्याएं छोटी और अर्थहीन नजर आती हैं। अगर आप इस स्थिति तक नहीं पहुंचे हैं तो कोई बात नहीं, लेकिन फिर भी जुकाम ठीक करने के लिए कीमो का इस्तेमाल करना ठीक नहीं।

सद्गुरु जग्गी वासुदेव कहते हैं, ‘यह बेहद अफसोस की बात है कि जब आप ध्यान करते हैं, केवल तभी आपके मन में कुछ स्पष्टता रहती है, बाकी समय आपके मन में भारी हलचल या कोलाहल रहता है। इसकी वजह है आपके भीतर बुनियादी तौर पर एक भ्रम है। आप यह मान लें कि न ही मैं शरीर हूं और न ही मन हूं। अगर आपने यह चीज अनुभव के स्तर पर समझ ली तो आपकी बाकी समस्याएं एक झटके में गायब हो जाएंगी।’

पारिवारिक समस्याओं को ऐसे करें हल

आज अमूमन हर परिवार की किसी छोटी-मोटी समस्या हैं जिसने होश उड़ा रखे हैं। इसे ठीक करने के लिए आप ध्यान का सहारा कभी मत लीजिए। इसके लिए टहलिए, तैराकी कीजिए और अपना होश दुरुस्त कीजिए ऐसा करने पर आपके मन में सकारात्मक विचारों के बीज अंकुरित होंगे।

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आखिरकार आपने अपने कल्याण के लिए, अपनी खुशहाली के लिए अपने आसपास परिवार खड़ा किया है। अगर यह आपकी बेहतरी के खिलाफ काम कर रहा है, तो फिर आपको यह देखने की जरूरत है कि इस पूरे मामले में आप कहां गलती कर रहे हैं।

खुद को पहचानने की कोशिश करें

आप नहीं जानते कि आप इस दुनिया में क्यों आए हैं और आपके अस्तित्व की प्रकृति क्या है? अगर आप अपने अस्तित्व की मूल प्रकृति को जानते तो फिर ये सारी चीजें आपके लिए महज एक खेल होतीं, एक नाटक होता। आप जिंदगी के इस खेल या नाटक को जब तक, जहां तक और जिस तरह खेलना चाहते, अपनी जरूरत के हिसाब से खेल सकते थे।

हर व्यक्ति को एक ही तरह से, एक ही स्तर तक नाटक खेलने की जरूरत नहीं है। कुछ लोग इस जीवन लीला में पूरी तरह से लीन हो जाते हैं तो कुछ लोग इस नाटक में सिर्फ ऊपरी तौर पर शामिल होते हैं। आप कह सकते हैं कि ‘अरे, आप मेरे परिवार, मेरे काम और मेरे रोजगार को एक नाटक कह रहे हैं।’

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अगर आप अभी इस बात को नहीं समझे तो आपको यह सब तब समझ में आएगा, जब नाटक का पर्दा गिरने वाला होगा। बेहतर होगा कि आप अभी इसे समझ जाएं। अगर अभी आप समझ गए तो इस जीवनरूपी नाटक का आनंद ले पाएंगे। अगर आप इस नाटक के कारण दुख झेल रहे हैं तो जीवन बेकार है।

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