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दर्शन / इस धरती पर जन्मा हर व्यक्ति हिंदू है, लेकिन कैसे? यहां जानें

Clip art Courtesy: wikiHow

क्या योग हिंदू है? यह सवाल अमूमन राजनीतिक गलियारों में उठाया जाता है। लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है क्योंकि योग दुनिया में सभी धर्मों की शुरूआत के कई साल पहले से पृथ्वी पर मौजूद है। इस बात को बेहद सटीक और तर्क संगत तरह से बताते हुए सद्गुरु जग्गी वासुदेव कहते हैं…

योग में किसी भी तरह की पूजा नहीं होती। यह 15000 हजार साल से भी अधिक पुराना है। जब आदियोगी ने पहले योग सूत्र दिए थे। 15 हजार पहले इंसानों के लिए धर्म जैसी कोई चीज नहीं थी। तब उन्होंने योग के जरिए समझाया कि इस इंसानी तंत्र को हम कैसे उच्च स्तर तक ले जा सकते हैं।

योग के जरिए आप खुश भी रह सकते हैं। लेकिन, खुश रहना अपने आप में लक्ष्य नहीं है। यदि आप अपने खुद के स्वभाव से खुश हैं तो इसका मतलब है कि आपके अंदर दुःखी होने का डर चला गया है। जब दुःखी होने का डर न हो सिर्फ तभी आप अपने जीवन को पूरी तरह से जी पाएंगे। नहीं तो आप हमेशा आधा कदम ही बढ़ाएंगे।

हम जिन्हें धर्म कह रहे हैं वो दुःखी होने का नाजायज फायदा उठा रहे हैं। योग उस बारे में नहीं है। यह आपको दुःखी होने के डर से आजाद करता है। यह आपको किसी भी सत्ता के बंधन से मुक्त करता है। चाहे वह कोई गुरु, संगठन या भगवान हों ये आपको उन सभी से मुक्त करता है।

यहां जन्मा एक केंचुआ भी हिंदू है

हिंदू फिलोस्फी क्या है? क्या कोई इस बारे में बिल्कुल सटीक बता सकता है। शायद नहीं। यहां हजारों तरह की चीजें हो रही हैं। दरअसल, हिंदू एक भौगोलिक पहचान है। हिमालय और हिंदूसागर (हिंद महासागर को पहले इसी नाम से जाना जाता था।) इनके बीच की जो धरती या कहें भूमि है वो ‘हिंदू’ है। इस धरती पर पैदा हुआ एक केंचुआ भी हिंदू है। जब आप कहते हैं कि अफ्रीका में पैदा हुआ हाथी अफ्रीकी हाथी है, तो केंचुआ हिंदू क्यों नहीं है?

चूंकि अब आप राजनीतिक झमेलों में उलझ गए हैं। उस वजह से कहते हैं कि हिंदू का मतलब ये है, वो है। जबकि, हिंदू भौगोलिक पहचान है। क्यों कि हम लोगों को अहसास हो गया था कि इन भौगोलिक पहलू के बिना हम फल-फूल नहीं सकते थे। हम हिमालय और हिंद महासागर की वजह से ही 5 हजार सालों से चैन की जिंदगी जी रहे थे। तो हम इन दोनों को आदर की दृष्टि से देखने लगे।

यह विश्वास करने वालों की भूमि नहीं

भौगोलिक दृष्टि से क्या सबसे बड़ा विद्वान जानता है कि हिंदू फिलोस्फी क्या है। ऐसी कोई चीज ही नहीं है। ये एक ऐसी भूमि है, जिसने हर तरह की फिलोस्फी को जन्म दिया है। क्योंकि यह हमेशा खोज करने वालों की भूमि रही है। विश्वास करने वालों की नहीं। इस देश में परम लक्ष्य मुक्ति और आजादी रहा है। भगवान कभी नहीं। कभी कोई विश्वास प्रणाली नहीं रही। हमेशा सवाल उठाना, हर चीज पर विश्वास करना, खोज करना ही जीवन का तरीका रहा है। तो हिंदू धर्म जैसी किसी चीज का सवाल ही कहां उठता है?

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