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आस्था / ऐसा तीर्थस्थल जहां मिलता है आध्यात्मिकता का ‘परम’ अनुभव

केदारनाथ धाम यात्रा इन दिनों जारी है। यह धार्मिक क्षेत्र हजारों-लाखों योगियों और ईश्वर-प्रेमियों का ठिकाना रहा है। उनकी ऊर्जा का अनुभव हम यहां कर सकते हैं। इन योगियों के यहां आने का सिलसिला कई हजार वर्षों से चला आ रहा है।

पौराणिक कथा कहती है कि शिव और पार्वती यहां रहते थे और वे केदार की तरफ कभी-कभार आया करते थे। इसी झील के किनारे गणपति का सृजन हुआ था। आध्यात्मिक गुरु जग्गी वासुदेव कहते हैं, ‘आध्यात्मिक विकास चाहने वाले मनुष्य के लिए केदारनाथ एक ऐसा वरदान है, जिसकी प्रबलता की कल्पना भी नहीं की जा सकती। अगर कोई मनुष्य अपने आप को एक कोरे कागज की तरह यहां लाता है, तो उसके लिए ‘परम’ का अनुभव करना पूर्ण रूप से संभव है।’

इसलिए सुरक्षित रहा केदारनाथ धाम

कुछ साल पहले जब केदारनाथ में प्रकृति का प्रकोप हुआ तो यह केदारनाथ मंदिर सुरक्षित रहा। इसकी वजह था इसका निर्माण जो प्राचीन काल में उपयोग होने वाली तकनीक की ओर इंगित करता है। केदारनाथ मंदिर के नजदीक से मंदाकिनी नदी निकलती है, जिसके दो फ्लड वे हैं। कई दशकों से मंदाकिनी सिर्फ पूर्वी वाहिका में बह रही थी। लोगों को लगा कि अब मंदाकिनी बस एक धारा में बहती रहेगी। जब मंदाकिनी में बाढ़ आई तो वह अपनी पुराने रास्ते यानी पश्चिमी वाहिका में भी बढ़ी। जिससे उसके रास्ते में बनाए गए सभी निर्माण बह गए।

कैसे हुआ था मंदिर का निर्माण यहां देखें

केदारनाथ मंदिर इस लिए बच गया क्योंकि ये मंदाकिनी की पूर्वी और पश्चिमी पथ के बीच की जगह में बहुत साल पहले ग्लेशियर द्वारा छोड़ी गई एक भारी चट्टान के आगे बना है और इसका प्राचीन संरचना के कारण मंदिर सुरक्षित रहा। नदी के फ्लड वे के बीच मलबे से बने स्थान को वेदिका या टैरेस कहते हैं। पहाड़ी ढाल से आने वाले नाले मलबा लाते हैं। हजारों साल से ये नाले ऐसा करते रहे हैं। वैसे, केदारनाथ मंदिर का निर्माण कैसे किया गया होगा इस वीडियो में देखा जा सकता है।

Video Courtesy: Cortex Company

 

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