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ध्यान / अपने आस-पास देखिए खुद को समझना आसान होगा

अगर आप यह आलेख नहीं पढ़ेंगे तो क्या आपको पता चल सकेगा कि यहां आपके लिए कुछ खास लिखा जा रहा है। जीवन का हर पहलू इसी तरह है यदि आप ध्यान नहीं देते हैं, तो आपको पता नहीं चलेगा कि आप क्या खा रहे हैं? कैसी सांस ले रहे हैं?

बहुत से लोग फूलों की खुशबू पर ध्यान नहीं देते हैं बल्कि वो ऐसी चीज के नजदीक से गुजर जाते हैं। बेल की तरह… ये विकास प्रक्रिया में पीछे जाना हुआ। आप विकसित होकर इंसान बने हैं। इसमें लाखों साल लगे हैं। इंसान होने की अनूठी चीज यह है कि हम वही चीजें करते हैं जो जानवर करते हैं। फर्क इतना है कि हम उसे जागरुक होकर करते हैं। ये बहुत बड़ा फर्क है। किसी चीज को जागरुकता से करना तब तक संभव नहीं होगा जब तक आप उन चीजों पर पर्याप्त ध्यान नहीं देते हैं, जो आप करते हैं या नहीं करते हैं। विशेष रूप से वो चीजें जो आप नहीं करते हैं आपको उन पर पूरा ध्यान देना चाहिए।

लोग आज जानकारियों को शिक्षा समझते हैं। फिलहाल हमारी पूरी शिक्षा व्यवस्था ही ऐसी है। आप पर जानकारियों से भर देना। आप अपने दिमाग में जितनी ज्यादा जानकारी को भर लेगें। तो आपकी ध्यान देने की रुचि कम हो जाएगी। क्योंकि कुछ भी जाने बिना जानकारी आपको झूठी भावना देती है कि आप सब जानते हैं। ये अब एक फैशन बन गया है। आज आपको एक डिनर पार्टी में आमंत्रित किया गया है। तो गूगल पर आप ऐसी कई जानकारी एकत्र कर पार्टी में पहुंचते हैं और आप इस बारे में बात करते हैं और सभी को लगता है आप स्मार्ट हैं।

पूरी दुनिया के साथ फिलहाल यही समस्या है। हम सूचना को बुद्धि समझने की गलती कर रहे हैं। एक व्यापारी या कोई इंसान जो किसी भी परिस्थिति में रास्ता खोजना चाहता है। उसे बुद्धि की जरूरत है ना की सूचना की। सूचना थोड़ी उपयोगी हो सकती है लेकिन बुद्धि ही आपको किसी विशेष स्थिति में पहुंचने का रास्ता दिखाएगी।

हम सूचना का बुद्धि समझने की गलती कर रहे हैं। जब आप अपने अंदर ज्यादा जानकारी का ढेर लगा लेते हैं तो ध्यान देना मुश्किल हो जाता है। जब आप बिल्कुल ध्यान नहीं देते और ना ही आपमें ध्यान देने की क्षमता होती है। तो आपने अपनी बुद्धि तक पहुंचने की क्षमता भी खो दी है। आप बस याददाश्त से सूचनाएं बाहर निकालते रहेंगे।

इंसान में चित्त नाम की एक चीज होती है अंग्रेजी भाषा में सिर्फ माइंड होता है। ज्यादातर मन के यादों से जुड़े हिस्से को मन माना जाता है। यौगिक सिस्टम में मन के चार प्रमुख पहलू हैं। लेकिन मन के यादों वाला हिस्सा कम महत्वपूर्ण है। चित्त जो चेतना से जुड़ा होता है। वो सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि आप चित्त को आकार दे दें तो वो आकार हमेशा वो सच्चाई बनेगा। क्योंकि इसमें जीवन बनाने वाली शक्ति है जिसे हमें शब्दों की कमी की वजह से चेतना कह रहे हैं। वो जो जीवन का आधार है। जब आपका मन उससे जुड़ जाता है तब आपका मन जो आकार लेता है।

मन एक बादल की तरह है उसे आप कोई भी आकर दे सकते हैं। आप अपने चित्त को जो आकार देते हैं वो बेशक वो दुनिया में सच्चाई बनेगा। क्योंकि इसे जीवन को ऊर्जा बनाने वाली शक्ति मिलती है। तो यही मन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। ना कि यादें। यादें सिर्फ भौतिक चीजों को संभालने के लिए जरूरी हैं।

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