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प्रबंधन / ध्‍यान देने की क्षमता को बढ़ाने के लिए यहां ध्यान दें

राय एक कल्पना है। जैसे ‘यह तो बहुत बुद्धिमान है, यह मूर्ख है, यह अच्छा है, यह बुरा है।’ ये सब कल्पना है। क्यों न हम कल्पना किए बिना यूं ही देखें? आप लोगों को कम उम्र में ही यह गुण अपने अंदर पैदा करना चाहिए। अगर आप राय नहीं बनाना चाहते, तो आपको अपने मन में एक खास संतुलन लाना होगा। सिर्फ वही मन साफ-साफ देख पाता है, बाकी सभी में बस राय और खयाल भरे हुए हैं। वे वास्तविकता को नहीं देख पाते।

दरअसल, लोगों को पता होना चाहिए कि आप या तो रहस्यवादी हैं या एक भूल हैं। दूसरा कोई तरीका नहीं है। या तो आप चीजों को उस तरह देखते हैं, जैसी वे वाकई हैं या आप अपने दिमाग में कल्पनाएं कर रहे हैं। आपका दिमाग कल्पना करने के लिए नहीं है। आपके अंदर बुद्धि, राय कायम करने के लिए नहीं है। आपको ऐसी बुद्धि मिली हुई है कि आप चीजों को उनकी सतह से परे देख सकते हैं।

आप चीजों को उनकी वास्तविकता में देख सकते हैं, न कि जैसे वे ऊपरी तौर पर हैं। इंसानी बुद्धि का यही मतलब है। सदगुरु कहते हैं कि बुद्धि भेदने वाली होनी चाहिए, काल्पनिक नहीं। आपकी राय काल्पनिक होती है। जिस पल आप किसी चीज को अच्छा और दूसरी चीज को बुरा समझते हैं, सब लोग किसी न किसी श्रेणी में आ जाते हैं।

आपको समझना होगा कि हर जीवन अपने आप में अनूठा है। कोई किसी श्रेणी में नहीं आता। अगर आप जान जाएं कि अपने आस-पास के हर जीवन रूप के अनूठेपन को कैसे पहचानना है, तो आप देख पाएंगे कि हर जीवन कितना असाधारण है।

जीवन के हर रूप को ध्यान से देखें

आपको थोड़ा सा समय किसी भी जीवन पर ध्यान देते हुए बिताना चाहिए, इंसानों पर नहीं। वह कोई चींटी भी हो सकती है। अगर आप चींटी की तरह चलने वाला कोई वाहन ईजाद कर सकें, तो क्या वह सबसे बढ़िया वाहन नहीं होगा? अगर हम हर चीज को उस तरह देख सकें, जैसी वह वाकई है, तो हम हर पच्चीस साल में वैज्ञानिक खोजें करने और मूर्खतापूर्ण निष्कर्ष पर पहुंचने से बच जाएंगे।

हम जानते हैं कि पच्चीस साल पहले हम गलत थे और अगले पच्चीस साल में फिर से गलत होंगे। अगर आप हर जीवन पर पर्याप्त रूप से ध्यान देंगे, तो आप इस अस्तित्व में हर जीवन की अहमियत जान जाएंगे। आपको यह बात पता होगी कि इस धरती के सभी कीट अगर इसी समय गायब हो जाएं, तो धरती का सारा जीवन बारह से अठारह महीने में खत्म हो जाएगा। अगर नन्हें जीव-जंतु, कीड़े-मकोड़े गायब हो जाएं, तो धरती का सारा जीवन तीन से चार साल में समाप्त हो जाएगा। लेकिन अगर आप और मैं गायब हो जाएं, अगर पूरी मानव जाति गायब हो जाए, तो धरती फलेगी-फूलेगी।

खुद को याद दिलाएं कि आप एक छोटा सा कण हैं

धरती पर अलग-अलग जीवन रूपों की अहमियत के क्रम में हम सबसे नीचे हैं, मगर हम खुद को बहुत ऊंचा समझते हैं। जब आप खुद को बहुत अहम समझते लगते हैं, तो आप सिर्फ राय ही बनाएंगे। चाहे आप जो कोई भी हों, अभी ही नहीं, अपने जीवन के अंत समय में भी, चाहे आपने बहुत सारी चीजें ग्रहण कर ली हों, समझी हों, मगर फिर भी हम जो कुछ जानते हैं, वह इस ब्रह्मांड का एक बहुत छोटा सा हिस्सा है।

अगर आप लगातार इस बात को ध्यान में रखें, तो आप किसी चीज के बारे में राय नहीं बनाएंगे। आप राय तभी बनाते हैं, जब आपको लगता है कि आप सब कुछ जानते हैं। आप इस अस्तित्व में एक बहुत ही सूक्ष्म कण हैं। अगर आप यह जानते हैं तो आप राय नहीं बनाएंगे। अगर आपको लगता है कि आप बहुत बड़ी हस्ती हैं, तो आपका राय बनाना स्वाभाविक है।

बुद्धिमान और मूर्ख के बीच का अंतर समझना होगा

राय या विचार को छोड़ने की कोशिश मत कीजिए। ये कोई ऐसा काम नहीं जो किया जा सकता है। आप खुद के बारे में जिन चीज़ों पर विश्वास करते हैं, उसे छोड़ दीजिए, वह बकवास है। क्या लोग आपको ये सिखा रहे हैं, ‘खुद पर विश्वास कीजिए।’? आप बस यह समझ लीजिए कि आप एक मूर्ख हैं जो अपने अस्तित्व की प्रकृति तक को नहीं जानता।

इंसान की वास्तविकता यही है। ‘मैं मूर्ख हूं’ यह समझने के लिए बहुत बुद्धि चाहिए। एक बुद्धिमान व्यक्ति और मूर्ख व्यक्ति में यही अंतर है। बुद्धिमान जानता है कि वह मूर्ख है, मगर मूर्ख नहीं जानता कि वह मूर्ख है। यह बहुत बड़ा अंतर है। अगर आप जानते हैं कि आप मूर्ख हैं तो आप कोई राय कायम नहीं करेंगे।

आप हर चीज पर अधिक से अधिक ध्यान देंगे। अगर आप समझ लेते हैं कि आप बहुत कम जानते हैं तो आप हर चीज को बहुत ध्यान से देखेंगे। अगर आपको लगता है कि आप सब कुछ जानते हैं तो आप बिना देखे भी राय बनाने लगेंगे। यदि आप रोज ध्यान करते हैं तो यह पूरी प्रक्रिया आपके लिए और भी आसान हो जाएगी।

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