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बुक रिव्यू / घर में पूजा क्यों और कैसे?

मंदिर वो जगह है जहां मन में आस्था और विश्वास लिए श्रद्धालु जाते हैं और घर वो जगह जहां वो अपनों के साथ अपनी जिंदगी को बेहतर तरह से जीते हैं, मंदिर में तो सभी पूजा करते हैं यदि घर को मंदिर की तरह बनाना है तो घर में पूजा करना उतना ही जरूरी है जितना की मंदिर जाना।

जिंदगी की भागमभाग में समय बहुत कम है, ऐसे में घर में पूजा क्यों और कैसे की जाए? इस प्रश्न का उत्तर डॉ. शैलेंद्र मिश्रः अपनी पॉकेट बुक में बहुत सुंदरता से लिखते हैं। उन्हें ‘घर में पूजा क्यों और कैसे की जाए?’ पॉकेट बुक लिखने की प्रेरणा आम जनता की जिज्ञासा से मिली। वो बताते हैं कि सभी पूजा तो करना चाहते हैं लेकिन उन्हें पूजा विधि मालूम नहीं होने के कारण वो संकोच में रहते हैं। ऐसे में संक्षिप्त पूजा विधि से अवगत करना इस किताब का उद्देश्य है ताकि सभी निःसंकोच निर्भय होकर पूजा अर्चना कर सकें।

22 पेज की इस पॉकेट बुक में हिंदू पूजा विधि को बहुत ही सरल और संक्षिप्त में बताया गया है, जिसे आप रोजमर्रा की जिंदगी में अपने आराध्य की आराधना के लिए उपयोग कर सकते हैं। इसमें संस्कृत के श्लोकों, पूजा करने की षोडसोपचार, पंचोपचार विधि का उल्लेख है। भगवत्पूजा में उपचारों का विशेष महत्व न होकर श्रद्धा, भाव, भक्ति, भावना, समर्पण एवं आर्त स्वर से प्रार्थना का महत्व है। इस बात का भगवान ने श्रीमद्भगवद गीता के 9वें अध्याय के 26वें श्लोक में कहा है…

पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति।
तदहं भक्त्युपहृतमश्नामि प्रयतात्मनः।।

श्लोक का अर्थ है,‘जो भक्त मेरे लिए प्रेम से पत्र,पुष्प,फल,जल आदि अर्पण करता है, उस शुद्धबुद्धि निष्काम प्रेमी भक्त द्वारा प्रेम पूर्वक अर्पण किया हुआ वह सब मैं स्वीकार करता हूं।’

लेखक और गीतकार डॉ. शैलेंद्र मिश्रः आगे बताते हैं कि उन्होंने इस संक्षिप्त कृति में 30 बिंदुओ में मंत्रोत्चार और उनके अर्थ को समाहित किया है। ताकि लगभग 30 मिनिट के अंदर यानी कम समय में विधि-विधान से पूजा की जा सके। वो बताते हैं कि रात्रि में सोने से पहले हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। ऐसा करने से नींद में डरावने सपने नहीं आते हैं। दिन या रात में कभी भी कितनी बार भी हनुमान चालीसा का पाठ किया जा सकता है।

घर में जब भी आप पूजा करें तो गुरु/इष्ट देवी या देवता की मूर्ति/चित्र, जल, अक्षत, चंदन, पुष्प माला, धूपबत्ती, शुद्ध घी, दीपक, नैवेद्य (भोग/प्रसाद), फल आदि होना जरूरी है। घर में रोज पूजा करने से सकारात्मक ऊर्जा घर में बनी रहती है और किसी भी तरह की नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं करती है।

आधुनिक युग में व्यस्तताओं के चलते, कम समय में संपूर्ण पूजा कैसे की जाए इसी प्रश्न का उत्तर यह पॉकेट बुक (घर में पूजा क्यों और कैसे) देती है, जिसे लेखक ने बहुत ही सरल तरह से प्रस्तुत किया है। डॉ. शैलेंद्र मिश्रः बताते हैं, ‘यदि हर दिन घर में हवन करना संभव न हो तो सिर्फ गायत्री मंत्र का जप किया जा सकता है। ऐसा करने से आत्मा की शुद्धि तो होती ही है साथ में घर भी सकारात्मकता से शुद्ध बना रहता है।’

यह पॉकेट बुक आप नर्मदा सेवा ट्रस्ट से narmadasevatrust@gmail.com ई-मेल के जरिए बहुत ही कम मूल्य में खरीद सकते हैं।

यदि आप घर में नित्य रुद्राष्टकम् (नमामीशमीशान निर्वाणरूपं। विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपं।।) का जप करें तो भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। तो वहीं, नर्मदाष्कटम् (सबिंदुसिंधुसुस्खलत् तरंगभंग भंगरंजितम द्विषत्सुपापजातजातकारिवारिसंयुतम कृतांतदूत कालभूत भीतिहारि वर्मदे त्वदीयपादपंकजम नमामि देवी नर्मदे।) का नित्य पाठ करने से अक्षय पुण्य (सभी इच्छाओं को पूर्ण करने वाला पुण्य) की प्राप्ति होती है।

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