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चिंतन / आध्यात्मिक विकास के लिए क्या शिव की भक्ति जरूरी है

शिव को आपकी भक्ति की जरूरत नहीं है! एक जर्मन लेखक ने लिखा है कि सूरज उदय होने का आनंद इसलिए ले पाता है कि क्योंकि प्रकाश को ग्रहण करने के लिए इतने सारे मौजूद हैं। ये बिल्कुल गलत है। क्योंकि यदि आप में से कोई यहां नहीं हो तब भी सूर्य उतनी ही ऊर्जा से उदित होगा और वो आपके लिए नहीं उगता है।

ये एक बीमारी है जो इंसानों को लगी हुई है। उन्हें लगता है कि पूरा ब्रह्मांड इंसानों के इर्द-गिर्द बना है। ऐसा नहीं है यहां जो है एक बहुत ही असाधारण घटना यहां हो रही है उसका इंसान से कोई लेना देना नहीं है, लेकिन ये घटना हो रही है। इसकी प्रकृति इंसानी प्रकृति से अलग है तो शिव को आपकी भक्ति की जरूरत नहीं है।

सद्गुरु जग्गी वासुदेव बताते हैं कि पहले ये जानें की भक्ति क्या है? एक तरह से भक्ति का मतलब है आपके दिल की मिठास ये किसी भी इंसान को होने के लिए सबसे अच्छा तरीका है। यदि आप अपने दिल में ये मिठास नहीं रखते हैं तो जिंदगी आपके साथ वो चीजें करेगी और आपके साथ कड़वाहट आ जाएगी। ऐसा मत सोचिए की आप खुद को इनसे अलग कर सकते हैं आप घर बना सकते हैं, परिवार बना सकते हैं और बहुत बड़ा बैंक बैलेंस भी बना सकते हैं।

आप अमेरिका में पैदा हो सकते हैं, लेकिन आप जिंदगी से अलग होकर नहीं रह सकते हैं। जिंदगी से खुद को अलग कर लेना कुछ ही देर तक काम करता है लेकिन कुछ देर बाद किसी तरह जिंदगी आपको पकड़ लेगी। यदि आपके दिल में मिठास नहीं है तो आप कड़वाहट से भर जाएंगे। चिड़चिहाट से भरे रहेंगे ऐसा मानवता में एक बड़े हिस्से के साथ हुआ है। तो एक स्तर पर भक्ति का मतलब है एक तरह से आपके भीतर रहने वाली मिठास ऐसी मिठास जिसे बाहरी मदद की जरूरत नहीं हैं।

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मान लीजिए आपको किसी से प्यार हो जाता है। आपका दिल मिठास से भर जाता है, लेकिन ये कब तक रहेगा इसकी कोई गारंटी नहीं है। उसी प्यार की वजह से आपका दिल काफी कड़वाहट से भी भर सकता है। परिस्थितियों के कारण, बीमारी के कारण या मौत के कारण या कुछ खोने के कारण बहुत से कारण है या सिर्फ बोरियत की वजह से…वो इंसान जो रोमांस से भरा और बहुत ही बढ़िया लगता था। कुछ वजह से वो कुछ साल बाद आप उसे देखते हैं और खुद से पूछते हैं कि… क्या मैनें ही यह गलती की है? आपको यकीन नहीं होता है बहुत सी चीजें हो सकती हैं। तो भक्ति आपके भीतर हमेशा बसने वाली मिठास है, यह किसी पर निर्भर नहीं करती है। तो क्या मुझे शिव की भक्ति करनी चाहिए उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है।

‘भक्ति का मतलब है कि आप खुद से आजाद हैं और आपके बीच एक ही बाधा है और वो आप खुद है तो भक्ति का मतलब है कि आप खुद से आजाद हो जाएं यदि ये मुमकिन नही हैं तो आप इस कड़वाहट को दूर करें क्योंकि ये जब अलग होगा तो जिंदगी इस तरह विस्फोट लेगी जैसे आपकी कल्पना भी नहीं की होगी।’

भक्ति एक दूसरी तरह की बुद्धि है जो साधरणत: समझ में नहीं आती है। मौलिक स्तर की बुद्धि को यदि आप जानना चाहते हैं तो हमें उसकी कांट-छांट करनी होगी। आप किसी व्यक्ति की कांट-छांट नहीं कर सकते हैं क्योंकि ये गैर कानूनी होगा लेकिन, ‘हां’ आप मानसिक तौर पर ऐसा करते हैं और यह निष्कर्ष निकालते हैं कि और जब आपका निष्कर्ष विपरीत होता है तो मन में कड़वाहट आ जाती है। तार्किक बुद्धि का स्वभाव यही है चीजों को अलग अलग करना। चीजों को अलग-अलग करके आप उसका उपयोग समझ सकते हैं। अगर में किसी वस्तु या इंसान का विश्लेषण करना है तो मैं जान जाउंगा इनके साथ कैसा उपयोग और व्यवहार करना है। लेकिन मैं उन्हें नहीं जान पाउंगा। जब मैं पूरी तरह से उनको एक हिस्सा बना लूं तभी मैं उन्हें जान पाउंगा और कोई रास्ता नहीं है।

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यदि आप किसी ऐसे व्यक्ति को फूल देते हैं जिसमें तर्क करने की जबरदस्त शक्ति है या किसी वैज्ञानिक को फूल देते हैं। तो सबसे पहले तो वो उसके टुकड़े कर देगा वो जानना चाहेगा कि इसके अंदर क्या है। एक कवि फूल के बारे में गाने गाएगा उसे फर्क नहीं पड़ता है कि इस फूल के अंदर क्या है और उसे फर्क नहीं पढ़ता है कि इस फूल के अंदर क्या है। फूल उसे खुशी देता है एक दिव्यदर्शी नजर से यदि वह फूल को देखता है तो वो खुद, फूल बन जाएगा। क्योंकि उसके लिए एक छोटा सा फूल जो घांस में खिल रहा है और वो आसानी से नजर भी नहीं आ रहा है वहां पर भी ईश्वर का हाथ काम कर रहा है। वो उतना ही सक्रिय है जितना की हमरे भीतर है।

यदि आप घांस के तिनके को भी ध्यान से देखेंगे तो पाएंगे कि प्रकृति ने उसे बहुत ही ध्यान देकर बनाया है। तो एक भक्त बुद्धि का एक अलग ही आयाम है । वह ऐसी चीजें देखेगा जो कोई नहीं देख सकता है। भक्ति का मतलब है कि आप खुद से आजाद हैं और आपके बीच एक ही बाधा है और वो आप खुद है तो भक्ति का मतलब है कि आप खुद से आजाद हो जाएं यदि ये मुमकिन नही हैं तो आप इस कड़वाहट को दूर करें क्योंकि ये जब अलग होगा तो जिंदगी इस तरह विस्फोट लेगी जैसे आपकी कल्पना भी नहीं की होगी।

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