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सलाह / बच्चों को तय करने दीजिए कि उन्हें क्या करना है

भविष्य में खाली किताब सबसे बढ़िया होगी! क्योंकि आजकल आप हर चीज़ को मशीन बना रहे हैं। सिर्फ आप के लिए ‘उपयोगी’ हो सके, आप यही चाहते हैं, लेकिन एक मनुष्य के जीवन में इसके अलावा और भी आयाम होते हैं।

यह ज़रूरी नहीं है कि एक मनुष्य किसी के लिए उपयोगी हो। बात सिर्फ ये है कि गाड़ी में बंधे बैल जंगल में छलांगे मारते हिरनों को देख कर सोचते हैं, ‘वे अपना जीवन बरबाद कर रहे हैं, किसी के लिए कोई काम के नहीं हैं, बेकार हैं’। लेकिन हिरन मौज में हैं, आनंद कर रहे हैं। आप बंधे हुए हैं और आप में कोई आनंद नही है।

सद्गुरु जग्गी वासुदेव बताते हैं कि उपयोगी होने के प्रयत्न में अगर आप एक आनंद-रहित मनुष्य हो जाते हैं तो जीवन के सभी उद्देश्य हार जाते हैं। आप क्या कर रहे हैं, इसका कोई अर्थ नहीं रह जाता। समाज की नज़र में चाहे आपको वैसा चेहरा ले कर घूमने के लिए, और आप ने दुनिया के लिए जो कुछ भी किया है, उसके लिए शायद कुछ इनाम मिल जाए लेकिन जीवन के लिए इसका कोई मतलब नहीं है।

हर सामान्य बच्चा एक पूर्ण जीव की तरह होता है। आप एक बच्चे को सिर्फ उसकी पूर्ण क्षमता प्राप्त करने के लिए पोषित कर सकते हैं। आप उनको कुछ और नहीं बना सकते। अगर आप के ख्याल में नारियल का वृक्ष ही एक आदर्श वृक्ष हो, और आप के बगीचे में एक आम का पौधा उग आता है तो आप क्या करेंगे ? चूंकि यह नारियल के वृक्ष की तरह नहीं दिखता तो क्या आप उसकी सिर्फ एक सीधी डाल छोड़ कर बाक़ी सब डालें काट डालेंगे ? यह तो एक बहुत ही ख़राब आम का पेड़ होगा।

‘क्या सब कुछ ठीक होगा? ये सही हो सकता है, ये गलत भी हो सकता है, मुद्दा ये नहीं है। लेकिन अगर बच्चा अपनी बुद्धि का उपयोग करते हुए बड़ा होता है तो गलत होने की संभवना बहुत कम है। अगर वो गलती भी करता है तो उसे सुधारने के लिए उसके पास बुद्धि है।’

आप सिर्फ एक काम कर सकते हैं कि बच्चे को उसकी पूर्ण बुद्धिमत्ता, शारीरिक खुशहाली तथा भावनात्मक खुशहाली प्राप्त करने के लिए पोषित करें। यह तभी होगा जब आप उसको सिर्फ पोषण दें, उससे छेड़छाड़ न करें।

Feature Podcast: बच्चों को तय करने दीजिए कि उन्हें क्या करना है

बच्चे आप के माध्यम से दुनिया में आते हैं, वे आप में से नहीं आते। यह कभी मत सोचिए कि वे आप के हैं। यह आप का विशेष अधिकार है कि वे आप के द्वारा आए हैं। तो आप का काम यह है कि आप उन्हें प्रेमपूर्ण तथा सहायक वातावरण प्रदान करें। उन पर अपने विचार, फिलोसफी, अपनी भावनाएं, एवं विचार प्रणाली और अन्य फालतू की चीज़ें मत थोपिए। उनके पास खुद की काफी बुद्धि है कि वे अपना रास्ता बना सकें। अगर आप उसके लिए आवश्यक और अनुकुल वातावरण बनायें जिससे उसकी बुद्धिमत्ता पूर्ण विकसित हो सके तो वह अपने हिसाब से सब कुछ संभाल लेगा।

‘हर सामान्य बच्चा एक पूर्ण जीव की तरह होता है। आप एक बच्चे को सिर्फ उसकी पूर्ण क्षमता प्राप्त करने के लिए पोषित कर सकते हैं। आप उनको कुछ और नहीं बना सकते। आप सिर्फ एक काम कर सकते हैं कि बच्चे को उसकी पूर्ण बुद्धिमत्ता, शारीरिक खुशहाली तथा भावनात्मक खुशहाली प्राप्त करने के लिए पोषित करें।’

क्या सब कुछ ठीक होगा? ये सही हो सकता है, ये गलत भी हो सकता है, मुद्दा ये नहीं है। लेकिन अगर बच्चा अपनी बुद्धि का उपयोग करते हुए बड़ा होता है तो गलत होने की संभवना बहुत कम है। अगर वो गलती भी करता है तो उसे सुधारने के लिए उसके पास बुद्धि है। जब तक वे सिर्फ अपनी खुशहाली के लिए काम कर रहे हैं और अपने जीवन के ही विरुद्ध कुछ नकारात्मक नहीं कर रहे, आप को प्रतीक्षा करनी चाहिए।

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जब तक बच्चा 21 साल का न हो जाये तब तक आप को ऐसे रहना चाहिए जैसे कि आप गर्भवती हैं। आप बस प्रतीक्षा कीजिए। जब बच्चा अंदर था तब आप कुछ नहीं करते थे, है न ? बस अपने आप को सही ढंग से पोषित किया और प्रतीक्षा की। बस वैसे ही, सही वातावरण बनाइए और प्रतीक्षा कीजिए।

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