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सद्भाव / ऐसा नास्तिक देश जहां इस खास वजह से मौजूद है धार्मिक एकता

चीन दुनिया का आधिकारिक रूप से एक नास्तिक देश है। चीन में भले ही धार्मिक आज़ादी मिली हुई है, लेकिन वहां धार्मिक गतिविधियां को स्वतंत्र होकर अंजाम नहीं दिया जा सकता है। अगर चीन में धर्म की बात होती है तो ‘कन्फ्युसियनिजम’, ‘बौद्ध’ और ‘ताओइजम’ इन तीन धर्मों पर जरूर विचार किया जाता है। यह धर्म कहीं न कहीं अध्यात्म के जरिए लोगों को इस तरह से आपस में जोड़े हुए हैं कि लोग आज भी उतना ही मानते हैं, जितना की पहले उनके पूर्वज मानते थे।

कन्फ्युसियनिजम और अध्यात्म : कन्फ्यूशियस के अनुसार, ‘आध्यात्मिक विकास शारीरिक, भावनात्मक और मानसिक विकास के बाद आता है। सबसे पहले खुद को जानना और सम्मान करना सीखना चाहिए।’ कन्फ्यूशियस ने कहा था, ‘यदि आप नहीं जानते कि किसी व्यक्ति के रूप में कैसे रहना है, तो आप आत्मा की सेवा कैसे कर सकते हैं?’

कन्फ्यूशियस ने असाधारण चीजों, ताकत (हिंसा), विकार, और धार्मिक देवताओं के बारे में बात करने से परहेज किया है। कन्फ्यूशियनिज्म आध्यात्मिक होने पर जोर देता है, लेकिन धार्मिक नहीं।

ताओइजम और अध्यात्म : ताओ शब्द का अर्थ पथ या रास्ता है। ताओ धर्म के अनुसार सभी भौतिक चीजों के पीछे और दुनिया में सभी परिवर्तन एक मौलिक, सार्वभौमिक सिद्धांत है जो रास्ता या ताओ है। यह सिद्धांत सब कुछ, सभी परिवर्तन और सभी जीवन को नियंत्रित करता है। ताओ कहते थे कि दुनिया की बहुतायत और विरोधाभासों के पीछे एकता है।

ताओ धर्म का आध्यात्मिक रूप से झुकाव का पता इसी बात से लगाया जाता है कि प्रसिद्ध चीनी दार्शनिक  ‘लाओ त्सू’ द्वारा रचित धर्म ग्रन्थ ‘ताओ ते चिंग में लिखा है , ‘अनुभव के द्वार से परे जो रास्ता बहता है, वह दुनिया से कहीं अधिक बड़ा और अधिक सूक्ष्म है।’ अध्यात्म का मूल भाव भी यही है।

दरअसल, ताओ धर्म चीन का एक मूल धर्म और दर्शन है। पहले ताओ एक धर्म नहीं बल्कि एक दर्शन और जीवनशैली थी। बाद में बौद्ध धर्म के चीन पहुंचने के बाद ताओ ने बौद्धों से कई धारणाएं उधार लीं और एक ‘धर्म’ बन गया।

बौद्ध धर्म और अध्यात्म : बौद्ध धर्म प्राप्ति और अनुभव के बारे में है, यह संस्थान या दिव्य अधिकार नहीं है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयुक्त बनाता है जो खुद को आध्यात्मिक मानते हैं, लेकिन धार्मिक नहीं।

बौद्ध धर्म का मत है कि यहां सब कुछ बदलता है। अन्य धर्मों की तरह बौद्ध धर्म आध्यात्मिक वास्तविकता का वर्णन करता है और हमें इस धर्म के बारे में विस्तार से पढ़ने पर पता चलता है कि मरने के बाद क्या होता है? यह पूरी तरह से मानव मन की गहराई मापने के लिए ध्यान के मार्ग की ओर ले जाता है।

चीन में बौद्ध धर्म के बारे में कहा जाता है कि यह एकमात्र विदेशी धर्म है जिसकी चीन में सबसे ज़्यादा स्वीकार्यता है। चीन में बौद्ध धर्म दूसरी शताब्दी में आया था। आज की तारीख में बौद्ध धर्म चीन के कई हिस्सों में एक महत्वपूर्ण ताकत है। ग्रामीण चीन में इसका खास प्रभाव है।

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