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इष्ट देवता / आध्यात्मिक उन्नति में इष्ट देवता की भूमिका

हमारी परंपरा में आमतौर पर किसी परिवार, कुल या फिर व्यक्ति विशेष के अपने इष्ट देवी/देवता होते हैं। क्या हम खुद ही अपना इष्ट देवी/देव चुन सकते हैं? क्या इष्ट देव आध्यात्मिकता उन्नति दे सकते हैं?

सबसे पहले आपको यह समझना होगा कि इष्ट देवता यानी आपकी पसंद का देवता। इसका मतलब है कि आपने देवता को बनाया, हो सकता है कि आपने भावनात्मक रूप से कोई देवता बना लिया दरअसल आपने ऊर्जा का एक स्वरूप तैयार कर लिया, जिसके साथ आप एक खास तरीके से जुड़े रहते हैं। लेकिन यह कोई ऐसे देवता नहीं होते जो स्वर्ग से उतरकर आए हों।

सद्गुरु कहते हैं इन्हें आपने यहीं बनाया है। अब सवाल यह है कि आप ऐसी चीजों को बनाते क्यों हैं? पहली बात तो यह है कि यह एक तरह का उपकरण या साधन है। उपकरण वह चीजें भी कर सकता है, जो आप आम तौर पर नहीं कर सकते। उपकरणों को इस्तेमाल करने की योग्यता होने के कारण ही इंसान इस धरती पर सबसे प्रभावशाली ताकत है।

आप एक माइक्रोफोन के जरिए अपनी बात दूर तक पहुंचा सकते हैं। माइक्रोफोन आपकी आवाज को केवल बढ़ा रहा है। माइक्रोफोन आपके लिए तभी कारगर है जब आप बोल सकते हैं। अगर आप बोल ही नहीं पाते तो माइक्रोफोन आपके लिए बेकार होता। यानी उपकरण आपकी योग्यताओं को बढ़ाने का काम करते हैं। तो हमने इसी तरह से उपकरण के रूप में ऊर्जा के स्वरूप स्थापित कर लिए हैं, जिनके साथ हमारा बेहद गहरा संबंध है।

लेकिन ये सभी स्वरूप ऊर्जा-पिंड नहीं हैं। इनमें से कई तो केवल भावनाओं की उपज हैं, क्योंकि जो कोई इंसान भक्ति में होता है, वह इस बात की परवाह नहीं करता कि ऐसी किसी चीज का अस्तित्व है या नहीं। उसे बस अपनी भावनाओं की शक्ति के बारे में पता होता है। जिस तरह से आप अपनी बुद्धि की शक्ति का इस्तेमाल करते हैं, उसी तरह आप अपनी भावनाओं की शक्ति का इस्तेमाल करके भी शानदार काम कर सकते हैं।

जब आप एक भक्त बन जाते हैं, तब इससे फर्क नहीं पड़ता कि आपकी भक्ति किसके लिए है किसी देवता, बंदर या भैंसे के लिए। बस आप समर्पित होते हैं। चूंकि आपमें भक्ति है, आप समर्पित हैं, इसलिए आपका रूपांतरण होगा। यह रूपांतरण देवता के द्वारा नहीं, आपकी भक्ति के द्वारा होगा। अगर आप किसी से प्रेम करने लगें, भले ही वह शख्स बेवकूफ ही क्यों न हो, तो प्रेम करने के कारण आप भी खूबसूरत हो जाते हैं।

किसी देवता के प्रेम में पडऩे का फायदा यह है कि वह आपको निराश नहीं करेंगे। इंसानों से आपको निराशा मिल सकती हैं। इसलिए नहीं कि उनमें कोई कमी है, बल्कि इसलिए क्योंकि आपकी उनसे अपेक्षाएं अवास्तविक होती हैं। एक काम करके देखिए। कोई ऐसा शख्स ढूंढिए जिसे आपने प्रेम किया और अब आपको उससे समस्या होने लगी है। अब उन उम्मीदों की सूची बनाइए जो आपने उस शख्स से लगा ली थीं।

अब खुद से पूछिए कि अगर आप उनकी जगह होते तो क्या आप उन उम्मीदों को पूरा कर पाते? आप पाएंगे कि उन उम्मीदों को पूरा कर पाना संभव नहीं है। लेकिन आप चाहते हैं कि वे इन उम्मीदों को पूरा करें, क्योंकि आपको लगता है कि वह तो सुपरमैन हैं। सोचने में अच्छा लग सकता है, लेकिन सच्चाई तो यही है कि वह भी आपकी ही तरह एक आम इंसान है।

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