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यथार्थ / यदि चाहते हैं सारे दुखों का अंत तो यहां है सुखी रहने का मंत्र

अध्यात्म सुख से सारे दुखों का अंत संभव है। यह हमारे पौराणिक ग्रंथ और जिन्होंने अध्यात्म के जरिए इस सुख से साक्षात्कार किया है, वह सदियों से कहते आ रहे हैं।

अध्यात्म सुख एक ऐसा मंत्र (हिन्दू ग्रंथों में मौजूद गद्य पारंपरिक रूप से मंत्र कहा जाता है। इसका शाब्दिक अर्थ विचार या चिंतन होता है।) है। जो व्यक्ति को जिंदगी भर कैसी भी विषम परिस्थितयां हों अंदर से खुश और सुखी रखता  है, ऐसे में जिंदगी में सही निर्णय ले पाता है और हर क्षेत्र में अपनी विजय सुनिश्चित कर पाता है।

यदि कोई भी व्यक्ति आध्यात्मिक नजर से जिंदगी को देखता है तो उसे दु:ख का पता भी नहीं चलता कि वो कब आया और कब चला गया। ऐसे में अध्यात्म सुख तभी मिल सकता है जब आप पूरी श्रद्धा से ईश्वर का ध्यान करते हैं यही अध्यात्म सुख है।

यथार्थ में खोंजे जिंदगी की खुशियां

आध्यात्मिक पहलू का अर्थ है जीवन को यथार्थ से देखना। पुराणों के अनुसार इस संसार में पांच तरह के सुख बताए गए हैं जोकि क्रमशः धन, तन, मन, बुद्धि और अध्यात्म हैं। इन पांच सुखों में अध्यात्म सुख से इंसान कैसे सबसे ज्यादा सुखी रह सकता है इसे बेहद सरल उदाहरण से समझ सकते हैं। मान लीजिए आपने कार खरीदी तो धन का सुख मिला, इसमें बैठकर कहीं घूमने गए तो तन का सुख मिला, आपने अपने भाई या बच्चों को कार चलाने दी तो मन का सुख मिला और यदि कार चलाते समय रास्ते में जा रहे किसी राहगीर को कार से टकराने से बचाया तो बुद्धि का सुख मिला।

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लेकिन अध्यात्म सुख केवल ईश्वर की भक्ति में ही मिलता है और यह सुख ‘आया राम गया राम’ की तरह नहीं होता यह आजीवन आपके साथ रहता है और यह सुख आता है खुश रहने से और खुश आप तभी रह पाएंगे जब अध्यात्म के नजदीक जाएंगे।

खुश रहने का सबसे आसान तरीका

खुश रहने का सबसे आसान उपाय है आप स्वयं खुश रहिए। प्रकृति ने आपको खुश रहने के लिए कई तरह से सजीव और निर्जीव चीजें दी हैं। लेकिन यह तभी दिखाई देंगी जब आप तनाव मुक्त होंगे और तनाव मुक्त आप तभी होंगे जब अध्यात्म की शरण में जाएंगे।

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आध्यात्मिक सुख, खुश रहने का वजह तो है, लेकिन जब आप प्रकृति और खासतौर पर अपने परिवार के बेहद नजदीक होते हैं तो यह खुशी कई गुना ज्यादा हो जाता है।

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