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दिशा / यदि आध्यात्मिक बनना चाहते हैं? तो ये हैं वो सरल तरीके!

आध्यात्मिक प्रक्रिया तक पहुंचने के तीन तरीके हैं। पहला तरीका है, कुछ जीवनकालों के दौरान सही चीजें करते हुए आप धीरे-धीरे वहां तक पहुंच सकते हैं। दूसरा तरीका है कि आप अपनी वर्तमान परिस्थितियों में बने रहें, अपनी ओर से बेहतरीन काम करें, खुद को खुला और केंद्रित रखें और खुद को उस प्रक्रिया के लिए उपलब्ध बनाएं। आपके जीवन के आखिरी पल में, हम ध्यान रखेंगे कि आपके साथ वह प्रक्रिया घटित हो।

एक और तरीका यह है कि आप इसी वक्त कुछ जानना चाहते हैं। आप अभी अपनी सीमाओं को तोड़ कर उन सीमाओं से परे जाना चाहते हैं। अगर ऐसा है तो आपको इस बात की चिंता नहीं होनी चाहिए, कि आपके आस-पास क्या घटित हो रहा है, क्योंकि बहुत सी चीजें होंगी, जिन्हें कोई स्वीकृति नहीं देगा।

इन चीजों को समाज मंजूर नहीं करेगा, लोग स्वीकृति नहीं देंगे, आपका परिवार स्वीकृति नहीं देगा। सद्गुरु बताते हैं कि वे आपसे सिर्फ इसलिए जुड़े थे क्योंकि आप एक विशेष तरह के इंसान थे। अगर आप दूसरी तरह के इंसान बन गए, तो फिर वे आपसे जुड़ नहीं पाएंगे।

जैसे, आपने किसी से शादी की। उन्होंने आपसे शादी इसलिए की क्योंकि आप एक विशेष तरह के इंसान थे। अगर आप किसी और तरह के इंसान बन गए, तो हो सकता है कि उस तरह का इंसान भी खूबसूरत हो मगर फिर भी वह एक अलग इंसान होगा। फिर आप अचानक उनके लिए अजनबी हो जाते हैं।

वे आपके साथ नहीं रह सकते, जब तक कि उनके अंदर आपको एक महान संभावना के रूप में देखने की समझ और विवेक न हो। अगर आपके अंदर इतनी समझ है, तो अच्छी बात है, मगर इतनी समझ आने पर उस रिश्ते को रूपांतरित होना पड़ता है। वह रिश्ता पहले की तरह नहीं रह जाता। उसे कुछ और बनना होगा। एक बार जब आप समझ लेते हैं कि कोई आपसे काफी आगे निकल गया है, तो वह रिश्ता पति और पत्नी, मां और पुत्र, इसका और उसका नहीं रह जाता। वह कुछ और बन जाएगा। तो किसी न किसी रूप में, आपके लिए अहमियत रखने वाला वह रिश्ता टूट जाएगा। या तो वह भौतिक रूप से नष्ट हो जाएगा या एक ही स्थान पर रहते हुए भी आपका रिश्ता बदल जाएगा। दुनिया में कितने लोग इसके लिए तैयार हैं?

इसलिए ज्यादातर लोगों के लिए बाकी के दो विकल्प बेहतर हैं। आप सही चीजें करें, अपने गुरु के लिए उपलब्ध रहें और आखिरी पल आने पर, वह आपका ख्याल रख लेंगे। या अगर आप उपलब्ध नहीं होना चाहते, तो यह भी हो सकता है कि आप कुछ छोटी-छोटी चीजें करने के लिए तैयार हों। अपने आध्यात्मिक पोषण के लिए कुछ करते रहें, ताकि भविष्य में कुछ हो सके। वैसे मैं यह आपके लिए नहीं चाहता। आपको या तो अभी अपनी सीमाएं तोड़नी चाहिए, या कम से कम मृत्यु के पल में ऐसा होना चाहिए।

आपके और परम तत्व के बीच कोई पहाड़ नहीं खड़ा है। दोनों के बीच कुछ और नहीं, बल्कि खुद आप, आपकी अपनी मानसिक‍ संरचना है। अगर आपको उसे तोड़ना है, तो हमें कुछ उल्टी दिशा में कार्य करना होगा। यह एक सरल चीज है, जिसे आप कर सकते हैं किसी ऐसे व्यक्ति के साथ काम करें, जिसे आप पसंद नहीं करते। उस इंसान के साथ बहुत प्यार से, खुशी से, समय बिताएं। इससे बहुत सारे बंधन टूट जाएंगे। मगर आप हमेशा किसी ऐसे व्यक्ति के साथ मिल कर काम करते हैं, जिसे आप पसंद करते हैं। यह आपके लिए अच्छा नहीं है।

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