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सलाह / डिप्रेशन दूर करने का ये है सबसे सरल उपाय

डिप्रेशन यानी अवसाद यह मन में तब पैदा होता है, जब आप कुछ खो देते हैं या फिर जिंदगी के ऐसे मोढ़ पर आ जाते हैं जहां पर कुछ समझ नहीं आता है। जब आप यह पूरी तरह मान लेते हैं कि डिप्रेशन प्रकृति ने दिया है, तो वहां से वापिस आना मुश्किल हो जाता है। डिप्रेशन  जैसी समस्या को केवल आपका आनंद में रहना ही दूर होने का सबसे सरल उपाय माना गया है।

कुछ इस तरह जन्म लेता है डिप्रेशन

जब आपका जीवन विवशता से चलता है, तो डिप्रेशन बहुत स्वाभाविक है क्योंकि बाहरी हालात कभी भी सौ फीसदी आपके काबू में नहीं होते हैं। दुनिया में बहुत सारी चीजें घटित हो रही हैं, अगर आप विवशता में प्रतिक्रिया करते हैं, तो उसमें खो जाना और दुखी होना स्वाभाविक है। आप उस जिंदगी के जितने संपर्क में होंगे, उतने ही दुखी होंगे।

लोग कई तरह से डिप्रेशन पैदा करते हैं। वह जिस भी चीज को कीमती मानते हैं, अगर आप उनसे वह चीज छीन लें, तो वे डिप्रेस्ड हो जाएंगे। खास तौर पर संपन्न समाज में त्रासदी यह है कि उनके पास सब कुछ होते हुए भी कुछ नहीं है। डिप्रेशन का मतलब है कि कहीं न कहीं एक निराशा घेरे हुए है।

अगर आप देश के उन गांव में जाएं जहां वाकई दरिद्र लोग रहते हैं, तो देखेंगे कि उनके चेहरे पर आपको आनंद‍ दिखाई देगा क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि उनका कल, आज से बेहतर होगा। संपन्न समाज में वह उम्मीद खत्म हो रही है।

डिप्रेशन से निकलने का फंडा

डिप्रेशन इसलिए आता है क्योंकि बाहर इस्तेमाल होने वाली हर चीज की व्यवस्था हमने कर ली है। एक गरीब आदमी सोचता है, ‘कल अगर मुझे खाने के लिए दोनों वक्त का भोजन मिल जाए तो सब कुछ ठीक हो जाएगा।’ अगर उसे भोजन मिल जाता है, तो वह चेहरे पर परम आनंद लिए हुए एक राजा की तरह चलेगा। संपन्न समाज में बाहरी चीजें ठीक होती हैं, लेकिन अंदर अमूमन सब कुछ गड़बड़ चल रहा होता है, इसलिए निराशा और अवसाद जन्म लेते हैं।

जिस तरह हम बाहरी चीजों को ठीक करते हैं, उसी तरह अंदर भी मनः स्थिति को भी ठीक करना चाहिए। जब ऐसा होगा तभी दुनिया खूबसूरत होगी। जिसे हम आध्यात्मिक प्रक्रिया कहते हैं, वह सिर्फ यही है।

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