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दिनचर्या / ऐसे कीजिए आध्‍यात्मिक जीवन शैली की पहचान

कई लोगों का मानना है कि धार्मिक हुए बिना भी आध्‍यात्मिक हो सकते हैं। धार्मिक व्‍यक्ति हमेशा धर्म से जुड़ी परंपराओं और मान्‍यताओं का पालन करता है, लेकिन आध्‍यात्मिक व्‍यक्ति के लिए ऐसा करना जरूरी नहीं होता। यह भी संभव है कि आपको यह ज्ञात ही न हो कि वास्‍तव में आप आध्‍यात्मिक हैं या नहीं और यह भी संभव है कि हम इसके लिए कुछ प्रेरणा चाहते हों।

अध्‍यात्‍म क्‍या है। यह सवाल बड़ा पेचीदा हो सकता है। हर किसी के लिए इसकी परिभाषा अलग हो सकती है। कोई ईश्‍वरीय भक्ति को अध्‍यात्‍म का रूप मानता है, तो किसी के लिए सेवा भाव ही वास्‍तविक अध्‍यात्‍म है, लेकिन ज्‍यादातर लोग धार्मिक स्‍थल पर जाने और अपने-अपने धर्म के अनुसार पूजा करने को ही अध्‍यात्‍म मानते हैं। लेकिन, क्‍या वास्‍तव में अध्‍यात्‍म वही है, जैसाकि प्रचलित परंपराओं द्वारा स्‍थापित किया गया है। शायद… नहीं।

अध्‍यात्‍मवाद का किससे होता है सीधा संबंध

अध्‍यात्‍म बहुत विस्‍तारित विषय है। इसे केवल धर्म और पूजा-पद्धति के साथ जोड़कर नहीं देखना चाहिए। वास्‍तव में आध्‍यात्मिक जीवन शैली अमूमन कुछ हटकर होती है। कोई भी आध्‍यात्मिक व्‍यक्ति न तो स्‍वयं को और न ही दूसरों को जज करता है।

आध्‍यात्मिक यात्रा तभी शुरू होती है जब आप स्‍वयं और अन्‍य लोगों के बारे में कोई भी निर्णयात्‍मक रवैया करने से दूर हो जाते हैं। वे दूसरों को न तो कमतर ठहराते हैं, और न ही उनके बारे में बुरा बोलते हैं। इसके स्‍थान पर वे लोगों के बारे में अच्‍छी बातें बोलते हैं और प्रेम ही फैलाते हैं। अगर सीधे शब्‍दों में कहें तो आध्‍यात्मिक व्‍यक्ति हर दिन अपने व्‍यवहार में दयालुता का भाव पैदा करने का प्रयास करता है।

तो वहीं, अध्‍यात्‍मवाद का सकारात्‍मकता से सीधा संबंध है। जब आप कोई सकारात्‍मक बदलाव करने का प्रयास करते हैं, तो वह भी एक प्रकार की आध्‍यात्मिकता ही है। आध्‍यात्मिक व्‍यक्ति के लिए मानवता ही सबसे बड़ा धर्म होता है। आध्‍यात्मिक लोग मानते हैं कि प्रेम की शुरुआत उनके भीतर से होती है। वे स्‍वयं से प्रेम करते हैं और मानते हैं कि दूसरों से प्‍यार करना भी जरूरी है। वे अपने शरीर और आत्‍म का खयाल रखते हैं। इसके लिए वे संतुलित आहार खाते हैं और व्‍यायाम करते हैं। इससे उन्‍हें अधिक आनंद, प्रेम मिलता है।

आध्‍यात्मिक जीवन शैली का मूलमंत्र

आध्‍यात्मिक व्‍यक्ति की एक पहचान यह भी है कि वह न अतीत के बंधनों से बंधा रहता है और न ही वह भविष्‍य के स्‍वप्‍नलोक में रहता है। वह वर्तमान में रहता है। अभी इसी क्षण में रहना ही उसकी खूबी होती है और मौजूदा पल में रहना ही वास्‍तव में आध्‍यात्मिक मार्ग पर चलने वाले व्‍यक्ति की पहचान होती है। आध्‍यात्मिक जीवन शैली वास्‍तव में लगातार सीखते रहने, तरक्‍की करने और बेहतर बनने की यात्रा का ही दूसरा नाम है।

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