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सहानुभूति / ध्यान से जुड़ी वो बातें जो नहीं हैं आध्यात्मिक

ध्यान वो अभ्यास है जो हमें दिमाग के अनचाहे शोर से दूर.. स्थिरता और शांति की ओर ले जाता है। इसे किसी विशेष आध्यात्मिक मान्यताओं की आवश्यकता नहीं होती है। कई अलग-अलग धर्म के लोग बिना किसी विवाद के और अपनी धार्मिक मान्यताओं के साथ ध्यान का अभ्यास करते हैं।

दुनिया में ऐसे कई साधक हैं जिनका विशेष धार्मिक विश्वास नहीं होता है और ना ही वो आस्तिक या नास्तिक होते हैं। वो आंतरिक शांति पाने के लिए या कई शारीरिक स्वास्थ्य लाभ पाने के लिए इसका अनुभव करते हैं जैसे कि, रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए, तनाव कम करने के लिए या अनिंद्रा को खत्म करने के लिए ध्यान (मेडिटेशन) करते हैं।

आध्यात्मिक गुरु दीपक चोपड़ा कहते हैं कि ध्यान के बारे में यह सोचना गलत है कि यह एक गूढ़ अभ्यास है जो केवल संतों, पवित्र इंसानों और आध्यात्मिक विशेषज्ञों द्वारा ही किया जा सकता है। वास्तविकता में, जब आप इसे किसी अनुभवी या जानकार गुरु से सीखते हैं तो इसे सीखना आसान हो जाता है और इसे सीखने में मजा भी आता है। तकनीक को आसान बनाया जा सकता है जैसे कि, सांसों पर ध्यान केंद्रित करना और खामोशी से मंत्र को दुहराना।

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हमें ध्यान करना कठिन लगता है और इसका एक कारण यह भी है कि हम अपने मन को केंद्रित करने में काफी मेहनत करते हैं या हमें पता नहीं होता है कि हम इसे सही तरीके से कर रहे हैं या नहीं। एक शिक्षक आपको अपने अनुभवों को समझने में मदद करेगा। वो आपकी बाधाओं को खत्म करेगा और आप एक सही दैनिक अभ्यास कर पाएंगे।

ध्यान से दीर्घकालिक और तत्काल दोनों तरह के लाभ मिलते हैं। आप पहली बार बैठकर ध्यान करने की शुरुआत कर या शुरुआत के कुछ दिनों के बाद भी इससे मिलने वाले फायदे का अनुभव कर सकते हैं। कई वैज्ञानिक अध्ययनों ने ये प्रमाण दिए हैं कि अभ्यास के कुछ हफ्तों के भीतर ही मन-शरीर के क्रियाविज्ञान पर गहरा असर पड़ता है।

उदाहरण के लिए हार्वर्ड विश्वविद्यालय और मैसाचुसेट्स जनरल अस्पताल के नेतृत्व में किए गये अध्ययन में यह पाया गया कि आठ सप्ताह तक ध्यान करने से ना केवल लोगों के चिंता में कमी हुई है बल्कि यह लोगों को शांति का भी अनुभव कराता है। यह दिमाग की यादाश्त, सहानुभूति, आत्म और तनाव विनियमन की भावना के साथ जुड़े हिस्से में भी वृद्धि करता है।

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कुछ लोग निराश हो जाते हैं जब उन्हें ध्यान में अंतर्दृष्टि, देवदूतों की आवाज, दिव्यज्ञान इत्यादि का अनुभव नहीं होता। जबकि ध्यान करने में इन सबसे अलग अदभुत अनुभव प्राप्त होता है। यह अनुभव आनंद और एकता का होता है। ध्यान का वास्तविक लाभ हमें रोज के दिन के बाकी बचे समय में

मिलता रहता है। जब हम ध्यान के सत्र से बाहर आते हैं तो हम अपने साथ स्थिरता और शंति लिए होते है जो हमें और अधिक रचनात्मक और केंद्रित बनाता है और खुद से और दूसरों से और अधिक प्यार करने की अनुमति देता है।

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