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समाधान / देश का अस्तित्व उसकी सरहदों से है, चाहे आप पसंद करें या नापसंद

किसी देश को बनाने वाली एक जरुरी चीज देश की सीमाएं हैं क्योंकि देश का अस्तित्व उसकी सरहदों से है। किसी देश को एक देश बनाने वाली सबसे पहली बात सिर्फ उसकी भौगोलिक सीमाएं हैं? ताकि लोग यहां-वहां जा सकते हैं, लोग अपनी भाषा, धर्म, विश्वास और विचारधाराएं बदल सकते हैं पर उसे एक राष्ट्र बनाने वाला पहला आयाम उसकी ज़मीन है, जिसे वह नहीं बदल सकते वह कहीं भी चले जाएं वह कहीं न कहीं उनका जन्म कहां हुआ वह हमेशा उसी जगह से पहचाने जाएंगे।

तो इन सीमाओं को आज़ादी के बाद इतना ज्यादा नहीं घसीटा जाना चाहिए था। ये एक बहुत बड़ी गलती है। उन्हें तुरंत ही तय कर देना चाहिए था। पर दुर्भाग्य से, उन्होंने इन्हें तय नहीं किया।

आध्यात्मिक गुरु जग्गी वासुदेव कहते हैं कि इसे कई तरह से बताया जा चुका है, वो उस चीज़ के लिए लड़ रहे हैं जिसपर उनका विश्वास है। आप उस चीज़ के लिए लड़ने की कोशिश कर रहे हैं, जिसपर आपका विश्वास है। ये लगातार चलता जाएगा, आप समझे? या तो आप अपने विश्वास को बदलिए या वे अपने विश्वास को बदलें और निकट भविष्य में ऐसा होता नहीं दिख रहा। ऐसा नहीं लग रहा या तो आपमें दुश्मनी को ख़त्म करने की समझ हो, आप दुश्मनी को मार दें, आपमें ऐसी समझ होनी चाहिए।

‘अगर आप विस्तार में जाएं, तो प्रदेश हो सकते हैं, धर्म हो सकते हैं, जातियां और हर तरह की चीजें हो सकती हैं। वहां मत जाइए। देश के बारे में कुछ कीजिये क्योंकि ये सबसे बड़ी जनसंख्या है जिस तक आप पहुंच सकते हैं।’

अगर ऐसी समझ संभव नहीं है, तो दुर्भाग्य से, ये स्वाभाविक रूप से दुश्मन को मारने में बदल जाएगा। ये स्वाभाविक रूप से होगा। क्या मैं ये कह रहा हूं? नहीं। ये स्वाभाविक रूप से होगा चाहे आप इसे पसंद करें या नापसंद। तो, बस इसलिए कि कोई सरहद के पार रहता है, क्या आप उसे मार देना चाहते हैं? बिलकुल नहीं। पर साथ ही, क्या आप ये चाहते हैं कि आप इस देश की रक्षा करें? ये इन्सान होने की एक दुर्भाग्यपूर्ण दुविधा है।

अगर आप जानवर होते, और अगर कोई आपकी सीमा लाँघ कर आपके क्षेत्र में आ जाता तो आप उसे मार देते, ठीक है? ये मनुष्य होने की दुविधा है, कोई आपकी सीमा पार करता है, आपको उसे मारना पड़ सकता है पर आप सच में मारना नहीं चाहते।

ये मनुष्य होने का संघर्ष है। ये संघर्ष मनुष्य में हमेशा होना चाहिए। अगर ये संघर्ष चला जाए तो आप पशु बन जाएंगे। हमारे भीतर ये संघर्ष होना चाहिए पर देश के कल्याण के लिए हमें निर्णायक कदम उठाना होगा। मैं राष्ट्र की बात क्यों कर रहा हूं? मेरे लिए राष्ट्र राजनीतिक सत्ता नहीं है, राष्ट्र मेरा देशप्रेम नहीं है। मैं वैसा नहीं हूं। मेरे लिए, देश वो सबसे बड़ा जनसमूह है, जिसके बारे में आप कुछ कर सकते हैं। अगर आप खुशहाली लाना चाहते हैं, तो आप पूरी दुनिया के बारे में कुछ नहीं कर सकते। हेलो?

‘आप उस चीज़ के लिए लड़ने की कोशिश कर रहे हैं, जिसपर आपका विश्वास है। ये लगातार चलता जाएगा, आप समझे? या तो आप अपने विश्वास को बदलिए या वे अपने विश्वास को बदलें और निकट भविष्य में ऐसा होता नहीं दिख रहा।’

आप पूरी दुनिया के बारे में यूं ही कुछ नहीं कर सकते, आपके पास वैसे साधन नहीं हैं कि आप ऐसा कर सकें। सबसे अच्छा होगा, कि आप सबसे बड़े मानव समूह के बारे में कुछ करें जो राष्ट्र है। अगर आप विस्तार में जाएं, तो प्रदेश हो सकते हैं, धर्म हो सकते हैं, जातियां और हर तरह की चीजें हो सकती हैं। वहां मत जाइए। देश के बारे में कुछ कीजिये क्योंकि ये सबसे बड़ी जनसंख्या है जिस तक आप पहुंच सकते हैं।

इस संदर्भ में, देश की सीमाएं सबसे महत्वपूर्ण है। हालाँकि, जो हमें करना है, वो हमें करना ही पड़ेगा पर हमारे दिल में तब भी तकलीफ होनी चाहिए जब हम किसी ऐसे इंसान को नुकसान पहुंचाते हैं, जो हमारे लिए खतरा है। हमारे दिल में थोड़ी तकलीफ होनी चाहिए, वरना हम अपनी मानवता खो देंगे।

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