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भावनाएं / प्रेम किया जाना नहीं, प्रेम में होना महत्वपूर्ण है

प्रेम एक खूबसूरत चीज है। अपनी भावनाओं के साथ जो सबसे अच्छी चीज आप कर सकते हैं, वह प्रेम ही है। आपकी भावनाएं हमेशा जितनी ज्यादा संभव हो सके, उतनी मधुर होनी चाहिए, लेकिन इसके साथ ही आपको इसकी सीमाओं को भी समझना चाहिए।

कोई कितना भी आपको प्यार करे, लेकिन उसमें शर्तें होती हैं। फिर चाहे वो आपके दोस्त हों, आपके पति या पत्नी हों, आपके माता-पिता हों, या फिर आपके बच्चे सभी लिए एक लाइन है। सदुगुरु जग्गी वासुदेव बताते हैं, ‘अगर आप उस लाइन को पार करते हैं तो प्रेम कहीं गायब हो जाता है। ये प्रेम शर्तां के साथ आता है और इसमें कोई बुराई नहीं है। आपको प्रेम करते हुए जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए, वर्ना यह टिकेगा नहीं।’

अध्यात्म कहता है प्रेम एक फूल की तरह है। अगर आपके हाथ में कोई फूल है तो आपको सावधानी से चलना चाहिए। प्रेम को जिंदा रखने के लिए बहुत सारी शर्तों या स्थितियों को पूरा करना होता है। यकीन कीजिए! अकेले होते हुए भी प्रेम मय रह सकते हैं। फिलहाल, आप किसी भी चीज को प्यार भरी नजरों से तब तक नहीं देख सकते, जब तक वह आपकी न हो।

‘प्रेम और नफरत एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। अगर सिक्का एक तरफ गिरता है तो यह प्रेम है। अगर यह दूसरे रुख की ओर गिरता है तो यह नफरत बन जाता है। अगर आप प्रेममय बन जाते हैं तो यह आपके लिए शानदार बात है।’

दरअसल, किसी भी चीज को पाने की चाहत इसलिए होती है, क्योंकि आपके भीतर एक तरह की कमी का भाव है। आपको अपने लिए कुछ चाहिए, वर्ना आप उदास महसूस करने लगते हैं। केवल तब, जब कोई चीज आपकी अपनी हो जाती है, तभी आपकी भावनाओं में मधुरता आती है। अगर आप जानते कि अपनी भावनाओं को जीवन के हर पल किस तरह से मधुर रखा जाता है, तो आपका जीवन एक बेहतर हालत में होता।

अगर कोई आपके आसपास है तो आप अपनी भावनाओं को मधुरता उसके साथ बांट सकते हैं। अगर कोई आपके आसपास नहीं है तब भी आप प्रेममय रह सकते हैं। आपकी भावनाओं के मूल में प्रेम हो सकता है। यह मत सोचिए कि इस सृष्टि के मूल में प्रेम है। जिन लोगों के जीवन में प्रेम की कमी होती है या जो लोग प्रेम से वंचित होते हैं, वहीं लोग कल्पना करते हैं कि ईश्वर ही प्रेम है या इस सृष्टि का मूल प्रेम है। जबकि ऐसा है नहीं।

प्रेम एक मानवीय भावना है। जिस पल में इंसान बिना किसी पूर्वाग्रह के और खुले दिल का होता है, वह हर किसी को प्यारभरी नजरों के साथ देखता है। उनको प्रेम का अनुभव करने के लिए, अपने सामने एक ऐसा व्यक्ति चाहिए जिसके साथ वे पहचान जोड़ सकें। वो व्यक्ति मां हो सकती है, पिता हो सकते हैं, बच्चे या कोई भी ऐसा इंसान हो सकता है, जिससे वह किसी न किसी रूप में कोई जुड़ाव रखते हों।

‘यह मत सोचिए कि इस सृष्टि के मूल में प्रेम है। जिन लोगों के जीवन में प्रेम की कमी होती है या जो लोग प्रेम से वंचित होते हैं, वहीं लोग कल्पना करते हैं कि ईश्वर ही प्रेम है या इस सृष्टि का मूल प्रेम है। जबकि ऐसा है नहीं।’

प्रेम तब एक खूबसूरत चीज है, जब यह आपके भीतर घटित होता है। दूसरे लोग प्रेम के नाम पर जो आपके लिए करते हैं, वह उनके लिए खूबसूरत होता है। आप उसकी सराहना कर सकते है। महत्वपूर्ण यह नहीं है कि लोग आपको प्रेम करते हैं, महत्वपूर्ण यह है कि आप प्रेममय हैं। यहां तक कि अगर कोई व्यक्ति यूं ही प्रेम में भरा हुआ घूमता है तो यह भी शानदार बात है।

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अगर आप भक्ति में डूब कर हर चीज के सामने झुकते हैं तो माना जा सकता है कि आपके भीतर कोई शानदार चीज घटित हुई है। वर्ना तो आप पूर्वाग्रह से भरे ही रहते हैं और किसी एक चीज को बड़ी तो किसी दूसरी चीज को छोटी के रूप में देखते हैं। प्रेम और नफरत एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। अगर सिक्का एक तरफ गिरता है तो यह प्रेम है। अगर यह दूसरे रुख की ओर गिरता है तो यह नफरत बन जाता है। अगर आप प्रेममय बन जाते हैं तो यह आपके लिए शानदार बात है। यह आपके आसपास के लोगों के लिए सुंदर होगा, क्योंकि आपके साथ रहना उनके लिए भी एक खूबसूरत अनुभव होगा।

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प्रेम वो नहीं है, जो आप करते हैं। प्रेम वो है, जिस तरह से आप हैं। इसका मतलब है कि आपकी भावनाओं में मधुरता भर गई है। अगर आप कोई बर्तन भी उठाते हैं तो उसे पूरे प्यार से उठाएंगे। अगर आप किसी दूसरे व्यक्ति का स्पर्श भी करेंगे तो बेहद प्यार से करेंगे। अगर आपके आासपास कोई नहीं भी होगा और आप बैठेंगे तो बड़े प्रेम से बैठेंगे। आपको अपने प्रेम का विचार बदलने की जरूरत है।

प्रेम किसी और के बारे में नहीं है ये आपके बारे में है। आपके भीतर मौजूद भावों की मधुरता के चलते आपका जीवन सुंदर हो जाता है। फिर चाहे आपके जीवन में सफलता आए या असफलता, आपका जीवन मधुर ही होगा।

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