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दर्शन /…तो क्या इंसान या प्रकृति का कोई आयाम हैं भगवान!

आध्यात्मिकता इंसान के अस्तित्व का निश्चित तरीका है। उस स्थिति तक पहुंचने के लिए बहुत कुछ करना पड़ता है। यह घर के बगीचे की तरह है। अगर मिट्टी, सूर्य का प्रकाश और पौधे का तना एक निश्चित स्थिति में हैं, तो यह फूल नहीं देगा, आपको इसके लिए कुछ करना होगा। ऐसे में कुछ खास बातों पर ध्यान देना होगा।

अगर आप अपने शरीर, मन, भावों तथा ऊर्जा को परिपक्वता के एक निश्चित स्तर तक ले जाएंगे, तो आपके भीतर कुछ और खिल उठेगा यही आध्यात्मिकता है। जब आपकी तार्किकता अपरिपक्व होती है, तो यह हर वस्तु पर संदेह करती है। जब आपकी तर्कबुद्धि परिपक्व हो जाती है, तो यह हर चीज़ को एक अलग ही प्रकाश में देखती है।

सद्गुरु जग्गी वासुदेव कहते हैं कि जब कोई आदमी कुछ ऐसा अनुभव कर पाता है, जो उसे खुद से बड़ा लगे, तो वह उसे भगवान समझने लगता है। ‘भगवान’ को लेकर सारी सोच यही है कि कुछ भी जो आपसे बड़ा हो। यह कोई इंसान या फिर प्रकृति का कोई आयाम भी हो सकता है। लेकिन क्या यही आध्यात्मिकता है? बिल्कुल नहीं, यह केवल जीवन है।

एक नास्तिक आध्यात्मिक नहीं हो सकता। लेकिन आपको यह समझना चाहिए कि एक आस्तिक भी आध्यात्मिक नहीं हो सकता है। क्योंकि नास्तिक और आस्तिक में कोई अंतर नहीं है। एक मानता है कि ईश्वर है और एक का मानना है कि ईश्वर नहीं है। दोनों ही किसी ऐसी बात के बारे में विश्वास रखते हैं, जिसके बारे में वे नहीं जानते।

आप गंभीरतापूर्वक इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं कि आपको नहीं पता और यही आपकी समस्या है। इसलिए नास्तिक और आस्तिक में कोई भेद नहीं है। ये एक जैसे लोग हैं जो अलग होने का दिखावा कर रहे हैं। एक आध्यात्मिक जिज्ञासु न तो आस्तिक होता है और न ही नास्तिक। उसे एहसास हो चुका होता है कि वह कुछ नहीं जानता, इसलिए वह खोज कर रहा है।

जिस समय आप किसी बात पर विश्वास करने लगते हैं, आप बाकी सब बातों की ओर से आंखें बंद कर लेते हैं। इस धरती पर सारा संघर्ष अच्छाई और बुराई का नहीं है, यह हमेशा एक इंसान का विश्वास बनाम दूसरे इंसान के विश्वास का संघर्ष होता है। विश्वास की जरूरत आध्यात्मिक नहीं, मानसिक है।

आप किसी चीज़ से चिपकना चाहते हैं, आप स्वयं को सुरक्षित महसूस करना चाहते हैं, आप महसूस करना चाहते हैं कि आप सब जानते हैं। यह बहुत ही अपरिपक्व दिमाग की देन है। अगर आप इस अस्तित्व के बारे में कुछ नहीं जानते तो इसमें समस्या क्या है। आप वास्तव में कुछ नहीं जानते। यह बहुत सुंदर बात है! अब आप देखें कि आप स्वयं को भीतर से सुंदर व आनंदित कैसे बना सकते हैं, जो कि आपके अपने हाथ में है।

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