Press "Enter" to skip to content

मुमकिन है / जब आप खुश होंगे, तभी आएगीं दूसरी संभावनाएं

हम जीवन में जो भी करते हैं, खुशी पाने के लिए करते हैं, लेकिन दुर्भाग्य से खुश रहना काफी मुश्किल काम लगता है। हमें लगता है कि खुश रहने के लिए कुछ खास तरह के हालात होने चाहिए, तभी हम खुश रह सकते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है।

सद्‌गुरु जग्गी वासुदेव बताते हैं कि जब आप बुनियादी रूप से खुश होते हैं, तब आपको खुश रहने के लिए कुछ करना नहीं पड़ता, तो आपके जीवन के हर आयाम में बदलाव आ जाएगा। आपके अनुभवों में और खुद को व्यक्त करने के तरीकों में बदलाव आ जाएगा। आपको पूरी दुनिया बदली हुई लगेगी। आपका अब कोई निहित स्वार्थ नहीं होगा क्योंकि चाहे आप कुछ करें या न करें, चाहे आपको कुछ मिले या न मिले, चाहे कुछ हो या न हो, आप स्वभाव से ही आनंदित होंगे।

खुश रहना आपकी बुनियादी जिम्मेदारी है

किसी इंसान की पहली और सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी एक खुशमिजाज प्राणी होना। खुश रहना जीवन का चरम पहलू नहीं है। यह जीवन का बुनियादी पहलू है। अगर आप खुश नहीं हैं, तो आप अपने जीवन में क्या कर सकते हैं? एक बार आप खुश हों, तभी दूसरी महान संभावनाएं खुलती हैं।

चाहे आप जो भी करें, आप अपने अंदरूनी गुणों को ही विस्तार देते हैं और जगाते हैं। चाहे आप इस बात को पसंद करें या नहीं, हकीकत यही है। जब तक कि कोई महत्वपूर्ण चीज आपके भीतर घटित नहीं होती, आप दुनिया के लिए कुछ बहुत महत्वपूर्ण नहीं कर सकते। इसलिए अगर आप दुनिया के बारे में चिंतित हैं, तो पहली चीज आपको यह करनी चाहिए कि खुद को एक खुशमिजाज प्राणी में रूपांतरित करें।

खुशी आपकी मूल प्रकृति है

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप अपने जीवन में क्या कर रहे हैं, चाहे वह कारोबार हो, सत्ता, शिक्षा या सेवा, आप ऐसा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि आपके भीतर कहीं गहराई में एक भावना है कि इससे आपको खुशी मिलेगी। इस धरती पर हम जो कुछ भी करते हैं, वह खुश रहने की इच्छा से करते हैं, क्योंकि यह हमारी मूल प्रकृति है। जब आप बच्चे थे, तो आप यूं ही खुश थे। वही आपकी प्रकृति है। खुशी का स्रोत आपके भीतर है, आप उसे हमेशा के लिए एक जीवंत अनुभव बना सकते हैं।

चीजों का महत्व पहचानें

आज सुबह, क्या आपने देखा कि सूर्य बहुत अद्भुत तरीके से उगा? फूल खिले, कोई सितारा नीचे नहीं गिरा, तारामंडल बहुत अच्छी तरह काम कर रहे हैं। सब कुछ व्यवस्थित है। आज समूचा ब्रह्मांड बहुत बढ़िया तरीके से काम कर रहा है मगर आपके दिमाग में आया किसी विचार का एक कीड़ा आपको यह मानने पर मजबूर कर देता है कि आज बुरा दिन है।

यह भी पढ़ें : रिपोर्ट / इंसानियत के लिए भारत और चीन कर रहे हैं कुछ ऐसा

कष्ट मुख्य रूप से इसलिए होता है क्योंकि ज्यादातर इंसान इस जीवन के प्रति सही नजरिया खो बैठे हैं। उनकी मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया अस्तित्व की प्रक्रिया से कहीं बड़ी हो गई है या सीधे-सीधे कहें तो आपने अपनी रचना को स्रष्टा की सृष्टि से कहीं अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। यह सारी पीड़ा का बुनियादी स्रोत है। हम इस बात की पूरी समझ खो बैठे हैं कि यहां जीवित रहने के क्या मायने हैं।

अगर आप कहते हैं, ‘मुझे यह व्यक्ति पसंद नहीं है’, तो आप किसी भी और से ज्यादा उस इंसान से ग्रहण करेंगे। आपके पास कोई चारा नहीं है। अगर आपको इस बात की जानकारी हो कि उसे ठीक करके कैसे इस्तेमाल करना है, तो यह कूड़ेदान उपयोगी हो सकता है। असर और जानकारी का यह ढेर, जो आपने जमा किया है, वह सिर्फ दुनिया में जीवित रहने के लिए उपयोगी है। आप कौन हैं, इससे उसका कोई संबंध नहीं है।

मन से अपने बुनियादी अस्तित्व की ओर बढ़ें

जब हम किसी आध्यात्मिक प्रक्रिया की बात करते हैं, तो हम मन से अपने बुनियादी अस्तित्व की ओर जाने की बात करते हैं। जीवन का संबंध इस सृष्टि से है जो यहां मौजूद है उसे पूरी तरह जानना और उसके असली रूप में उसका अनुभव करना, अपने मनमुताबिक उसे विकृत न करना ही जीवन है।

अगर आप अस्तित्व की हकीकत की ओर बढ़ना चाहते हैं, तो सरल शब्दों में आपको बस इस बात का ध्यान रखना होगा कि जो आप सोचते हैं, वह महत्वपूर्ण नहीं है, जो आप महसूस करते हैं, वह महत्वपूर्ण नहीं है। आप जो सोचते हैं, उसका हकीकत से कोई लेना-देना नहीं है।

यह भी पढ़ें : इंटरव्यू / यहां कोई गॉडफादर नहीं, खुद को मजबूत बनाएं और इस प्रोफेशन में आएं

उसका जीवन के लिए कोई बड़ा महत्व नहीं है। मन बस उन फालतू चीजों में उलझा रहता है, जो आपने कहीं और से इकट्ठा किया है। अगर आपको वह महत्वपूर्ण लगता है, तो आप कभी उसके परे नहीं देख पाएंगे।

(आप हमें फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, लिंक्डिन और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।)

More from अध्यात्मMore posts in अध्यात्म »

Be First to Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *