Press "Enter" to skip to content

रहस्य / वैसे आप मृत्यु के बाद कहां जाएंगे?

अगर सब कुछ ‘यहीं और अभी’ है, तो हम कहां जाएंगे ? दरअसल, हम ‘यहां-अभी’ में जाएंगे। ‘यहां और अभी’ सिर्फ आध्यात्मिक शब्द नहीं है, माडर्न फ़िज़िक्स इस पहलू में बहुत गहन दिलचस्पी रखती है। जब हम ‘यहां और अभी’ की बात करते हैं, तो हम समय और स्थान की बात कर रहे होते हैं।

सदगुरु जग्गी वासुदेव बताते हैं कि समय और स्थान सभी भौतिक चीजों की रचना के लिए एक बुनियादी आयाम है। अगर समय और स्थान नहीं होगा, तो सृष्टि का प्रश्न ही नहीं है, सब कुछ यहीं और अभी है। इसका मतलब है कि समय और स्थान आपका खुद का बनाया हुआ है। जिस तरह आप अपने शरीर और मन को बनाते हैं, उसके साथ ही आप समय और स्थान को बनाते हैं। शरीर और मन के संग्रह आपको समय और स्थान के नाटक के लिए तैयार करते हैं।

माडर्न फ़िज़िक्स बताती है कि किस तरह शून्यता की स्थिति हल-चल से भरी और रचना करने वाली ताक़तों से भरपूर होती है और यह ब्रह्मांड लगातार फैल रहा है। सिर्फ यही नहीं, कहा जाता है कि जिस तरह एक बिग बैंग हुआ, यह संभव है कि किसी दिन एक ‘बिग क्रंच’ हो जो हर चीज को अभी और यहीं शून्य कर दे।

‘अगर आप अपने अस्तित्व को उसके भीतर मौजूद पुरानी चीज़ों के रूप में ही जानते हैं, तो आपको सिर्फ अनस्तित्व (शून्य) ही आकर्षित करता है।’

दूसरे शब्दों में कहें तो जिस तरह यह ब्रह्मांड एक बहुत छोटी चीज से बहुत विशाल चीज में फैल रहा है, किसी दिन इसकी उल्टी घटना भी हो सकती है। यह ऐसी चीज है जिसे हम योगिक प्रक्रिया में हमेशा से अपने अंदर जानते रहे हैं। जब हम निर्वाण, मोक्ष, शून्य की बात करते हैं, तो हमारा मतलब यही होता है। आप शून्य से आए और इतने विशाल हो गए, अगर आप इसे फिर से वहीं ले आएं, जहां से चले थे तो वह फिर से पूर्ण शून्य हो जाएगा।

फिर आप कहां जाएंगे? जब जाना रुक जाता है, तो वहीं खेल ख़त्म हो जाता है। लगातार जाते रहना तब तक रोमांचक रहता है, जब तक आप काफ़ी जगहों पर नहीं गए हैं। अगर आपके लिए जगहें बची हैं, तो अस्तित्व उत्साहजनक होता है। अगर आप अपने अस्तित्व को उसके भीतर मौजूद पुरानी चीज़ों के रूप में ही जानते हैं, तो आपको सिर्फ अनस्तित्व (शून्य) ही आकर्षित करता है। ‘मुक्ति’ का अर्थ वातावरण की सीमाएं तोड़ कर आकाश में विलीन होना नहीं है। आप आकाश से भी मुक्ति चाहते हैं।

तो चरम आजादी क्या हो सकती है?

यह एक सरल, बचकानी प्रक्रिया है। मान लीजिए हम आपको एक छोटे से बक्से में कैद कर देते हैं और फिर आपको एक बड़े कमरे में छोड़ देते हैं, दो दिन तक आप आजाद महसूस करेंगे, मगर तीसरे दिन से आप फिर से कैदी महसूस करेंगे। अगर हम उससे बड़े कमरे में आपको छोड़ दें, तो फिर आप आजाद महसूस करेंगे मगर कुछ ही दिनों में आप फिर से कैद महसूस करने लगेंगे। तो चरम आजादी क्या हो सकती है? जब कोई और कमरा न हो, आप स्थान से बंधे हुए न हों और चूंकि समय और स्थान का एक-दूसरे के बिना अस्तित्व में नहीं हो सकते, इसलिए आप समय से भी बंधे नहीं होंगे। अगर स्थान नहीं होगा, तो समय भी नहीं होगा। इसीलिए हम ‘यहां और अभी’ की बात करते हैं।

‘अगर कोई स्थान और समय नहीं होगा, तो आपका अपना भौतिक या कोई अन्य स्थान भी नहीं होगा। इसका अर्थ है कि आपका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।’

‘यहां और अभी’ आध्यात्मिक शब्द नहीं हैं। यह भौतिकी विज्ञान के शब्द हैं। ‘यहां और अभी’ विलीन होने का अर्थ है, स्थान और समय की सीमाओं को पार कर लेना। यह सोचना मूर्खतापूर्ण होगा कि आप स्थान और समय से परे जा सकते हैं।

यह भी पढ़ें…

अगर कोई स्थान और समय नहीं होगा, तो आपका अपना भौतिक या कोई अन्य स्थान भी नहीं होगा। इसका अर्थ है कि आपका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। तो आप कहां जाते हैं? आप कहीं नहीं जाते। सारा जाना ही समाप्त हो चुका है। यही चरम मुक्ति है।

(आप हमें फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, लिंक्डिन और यूट्यूब  पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।)

More from अध्यात्मMore posts in अध्यात्म »

Be First to Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *