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समाधान / तो क्या इस वजह से होता है डिप्रेशन, बाहर आने का ये है उपाय!

अगर आप खुद को डिप्रेशन की स्थिति में ला रहे हैं, तो इसका मतलब यह है कि आप पर्याप्त मात्रा में तीव्र भावनाएं और विचार अपने मन में पैदाकर रहे हैं, लेकिन गलत दिशा में। अगर किसी विशेष बात के लिए आप की भावनाएं बहुत प्रबल नहीं हैं या आप के विचार अत्यन्त तीव्र नहीं हैं तो आप का मन निराश नहीं हो सकता, आप डिप्रेशन में नहीं हो सकते। बात बस ये है कि आप ऐसे विचार और भावनाएं पैदा कर रहे हैं जो आप के खिलाफ काम कर रही है, आप के लिए नहीं। तो अपने आपको डिप्रेशन की स्थिति में लाने के लिए आप पर्याप्त रूप से समर्थ हैं।

आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव कहते हैं, ज़्यादातर डिप्रेशन खुद अपने ही बनाए हुए होते हैं। बहुत कम ही लोग वास्तव मेंकिसीरोग के कारण डिप्रेशन में होते हैं। वे कुछ नहीं कर सकते, उनका डिप्रेशन अंदर से, किसी आनुवांशिक कमज़ोरी या ऐसे ही किसी अन्य कारण से होता है। बाकी लगभग सभी लोगों को पागल किया जा सकता है क्योंकि स्थिर मानसिकता और पागलपन की सीमारेखा में अंतर बहुत ही पतला, महीन होती है। लोग इसे लगातार धक्का मारते रहते हैं, इसे पार करने में लगे रहते हैं।

जब आप गुस्सा होते हैं तब आप इस बीच के अंतर को कम कर देते हैं। वास्तव में आप जानते भी हैं कि आप इस रेखा को पार कर रहे हैं, अंतर को कम कर रहे हैं। इसीलिए कई बार लोग ऐसा कहते हैं, ‘मैं आज उस पर (गुस्से से) पागल हो गया था’। कृपया देखिए, आप किसी पर पागल नहीं होते, आप बस पागलपन की ओर जा रहे होते हैं। आप ‘किसी पर पागल’ नहीं हो सकते। आप बस स्थिर मानसिकता की सीमारेखा को कुछ समय के लिये लांघते हैं, पागलपन की अवस्था तक पहुंचते हैं और फिर वापस आ जाते हैं।

आप इसे रोज़ क्यों नहीं आज़माते? हर दिन 10 मिनट, किसी पर जबरदस्त, तीव्र गुस्सा करके देखें! आप देखेंगे कि 3 महीनों में आप, डिप्रेशन के रोगी हो जाएंगे। हां, क्यों नहीं? अगर आप चाहते हैं तो ऐसा कीजिए, कोशिश कीजिए! क्योंकि अगर आप उस सीमा रेखा को पार करते रहेंगे, अगर आप रोज़ पागलपन करते रहेंगे तो एक दिन आप बिलकुल वापस नहीं आ पाएंगे। तब आप को चिकित्सकीय रूप से बीमार घोषित कर दिया जाएगा। आप को यह समझना चाहिये कि अगर एक पल के लिए भी आप बीमार होते हैं तो आप बीमार ही हैं। शायद आप को ऐसी कोई मेडिकल रिपोर्ट न दी गई हो कि आप बीमार हैं पर आप उसी अवस्था की ओर जा रहे हैं, है कि नहीं?

आप को क्या लगता है, आपको इस तरह आक्रोश प्रकट करने का अधिकार है? आप को क्या लोगों पर इस तरह गुस्सा होने का अधिकार है? आप को क्या ऐसा लगता है कि डिप्रेशन में होना किसी ख़ास तरह का अधिकार है, जिससे लोगों का ध्यान आप की तरफ रहेगा? अगर आप ऐसा ही करते रहे तो एक दिन ऐसा आएगा कि आप वापस नहीं आ सकेंगे और उस दिन आप को एक डॉक्टर की ज़रूरत पड़ेगी।

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