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अद्वैत / जिंदगी में चाहते हैं आगे बढ़ना तो यह राह जाती है मंजिल की ओर

आप जैसे ही आध्यात्मिकता में कदम रखते हैं, जीवन आपके साथ जबर्दस्त तरीके से घटित होता है, मानो सब कुछ तेजी से भाग रहा हो। अगर आप किसी चीज की पहचान अच्छे या बुरे के रूप में नहीं करते, तो आप देखेंगे कि जीवन बहुत जबर्दस्त तीव्रता से घटित हो रहा है, बस। अच्छी या बुरी जैसी कोई चीज नहीं होती। जीवन घटित होता है। कुछ लोग उसका आनंद उठाते हैं, कुछ लोग उसे झेलते हैं।

सदगुरु जग्गी वासुदेव बताते हैं कि हम बस इस बात का ध्यान रख सकते हैं कि हर कोई इसका आनंद उठाए। मूलभूत स्तर पर, इस धरती पर होने वाली घटनाएं कोई महत्व नहीं रखतीं। चाहे अभी बिजली गिर जाए और हम सब इसमें फंस कर जल जाएं, मैं नहीं समझता कि यह कोई मुसीबत है – यह बस एक घटना है।

यदि आप आध्यात्मिकता की ओर मुड़ना चाहते हैं, तो कुदरती तौर पर आप जीवन के एक बड़े हिस्से की चाह करते हैं। बल्कि आप जीवन में जिस चीज को भी पाने की कोशिश करते हैं, वह जीवन का एक बड़ा हिस्सा पाने की कोशिश होती है। अगर आप सिर्फ जीवन की एक छोटा सी फांक खा रहे होते, तो भले ही वह पूरी तरह मिठास से भरा होता, मगर फिर भी वह रहेगा तो पतला सा टुकड़ा ही। अगर आप कोई केक लें और सिर्फ उसकी आइसिंग खाएं, तो कुछ समय बाद, मिठास आपके लिए ज़हर बन जाएगी।

आप कह सकते हैं, ‘मेरे जीवन से बहुत से लोगों को ईर्ष्या हो सकती थी,’ मगर आप जानते हैं कि वह कितना खोखला था। जिन लोगों के पास कार नहीं होती, उन्हें लगता है कि कार वाले लोग बड़े खुशकिस्मत होते हैं। कार निश्चित रूप से आरामदेह और सुविधाजनक होती है, मगर वह कोई खुशकिस्मती नहीं है। अगर दुनिया में कारें होती ही नहीं, तो किसी को कार पाने की इच्छा नहीं होती। समस्या यह है कि आप दूसरों से इस तरह अपनी तुलना करते हैं ‘अरे, उसके पास यह है, मेरे पास नहीं है।’ अगर जिन लोगों के पास कार नहीं है, वे कार वाले लोगों से अपनी तुलना न करें, तो उन्हें पैदल चलने या साइकिल चलाने में कोई समस्या नहीं होगी।

जब आपने कहा कि ‘मेरे जीवन से लोगों को ईर्ष्या होती थी’, तो आप मूलभूत रूप में जीवन के बारे में बात नहीं कर रहे थे। आप अपनी सामाजिक स्थिति बता रहे थे। मैं अस्तित्व के रूप में जीवन की बात कर रहा हूं। अभी, आप बहुत सी ऐसी चीजों को जीवन मानते हैं, जिनका गहराई में जीवन से कोई वास्ता नहीं है। इसका हकीकत से कोई वास्ता नहीं है, यह एक मानसिक अवस्था है। सारे दुख उसी पागलपन से पैदा होते हैं।

आपके प्रारब्ध कर्म तेज़ी से चलते हैं

जब आप आध्यात्मिक रास्ते पर चलते हैं, तो आपके अंदरूनी हालात बहुत तेज गति से भागते हैं। इसकी तमाम वजहें हैं। एक मूलभूत कारण आपका प्रारब्ध है, मतलब इस जीवन के लिए आपको जो कर्म मिले हैं। सृष्टि बहुत करुणामयी है। अगर वह आपको इसी जीवन में आपके सारे कर्म दे देती, जिसे संचित कर्म कहते हैं, तो आप मर जाते। आपमें से बहुत से लोग इसी जीवन की स्मृतियों को नहीं झटक पाते।

मान लीजिए, अगर मैं आपको गहरी तीव्रता में आपके सौ जीवनकालों की याद दिला दूं, तो ज्यादातर लोग उस याददाश्त का बोझ न सह पाने पर तुरंत प्राण त्याग देंगे। इसलिए, प्रकृति आपको उतना प्रारब्ध देती है, जितना आप संभाल सकें। अगर आप प्रकृति द्वारा सौंपे गए कर्मों पर ही चले और मान लीजिए, आप कोई नया कर्म उत्पन्न नहीं करते जो संभव नहीं है तो सौ जन्मों के कर्मों को नष्ट करने के लिए, आपको कम से कम सौ और जन्म लेने पड़ेंगे। मगर इन सौ जीवनकालों की प्रक्रिया में, आप और हजार जीवनकालों के लिए कर्म इकट्ठा कर सकते हैं।

आध्यात्मिक लक्ष्य तक पहुंचने की जल्दी

जब आप आध्यात्मिक पथ पर होते हैं, तो आप अपने गंतव्य पर पहुंचने की हड़बड़ी में होते हैं। आप सौ या हजार जीवनकाल नहीं लेना चाहते, आप चाहते हैं कि आप जल्द से जल्द अपने लक्ष्य को पा लें। अगर एक खास रूप में दीक्षा दी जाए, तो उससे ऐसे आयाम खुलते हैं जो अन्यथा नहीं खुलते। अगर आप आध्यात्मिक रास्ते पर नहीं होते, तो हो सकता है कि आप ज्यादा आरामदेह और शांतिपूर्ण जीवन बिता रहे होते, मगर साथ ही एक निर्जीव जीवन भी जी रहे होते। जब आपके साथ कोई मूलभूत चीज घटित नहीं होती, तो आप जीवन से ज्यादा मौत के करीब होते हैं।

अगर आप कोमा में अपना जीवन बिताना चाहते हैं, तो यह आपकी मर्जी है। मैं कहूंगा कि बहुत से लोग अपना जीवन कोमा में बिता रहे हैं। वे रोज एक ही समय पर उठते हैं, अपनी कॉफी पीते हैं, खाना खाते हैं, काम पर जाते हैं, एक और कॉफी पीते हैं, वापस आते हैं और सो जाते हैं। अपनी सुविधा को खोने के डर से, वे एक भी फालतू काम नहीं करेंगे या आजमाएंगे। बहुत से लोग चाहते हैं कि हर सुबह चटनी एक ही स्वाद की हो। खासकर, जैसे-जैसे लोगों की उम्र बढ़ती है, थोड़ा सा भी फर्क आने पर उनकी पूरी जिंदगी अस्त-व्यस्त हो जाती है। इसे अपनी मर्जी, अपना स्वभाव या और कुछ और बकवास बताते हुए, वे अपने जीवन को कोमा में बिताने की कोशिश कर रहे हैं। क्या आपका इरादा वही है?

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