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अध्यात्म

अगर आप रीढ़ की शारीरिक बनावट के बारे में जानते हैं, तो आप जानते होंगे कि रीढ़ के दोनों ओर दो छिद्र होते हैं, जो वाहक नली की तरह होते हैं, जिनसे होकर सभी धमनियां गुजरती हैं। ये इड़ा और पिंगला, यानी बायीं और दाहिनी नाड़ियां हैं। शरीर के ऊर्जा‌-कोष…
आपके सभी विचार, सोच, भावनाएं या मूल्य आपके नहीं हैं, ये आपने किसी ओर से लिए हैं और ये आपके अंदर राज करते हैं। ठीक इसी तरह सफलता का विचार आपका अपना विचार है, ही नहीं। सफलता क्या है, ये किसी ओर का विचार है। आपके धर्म, समाज और संस्कारों…
तमिल में लोकतंत्र को जननायक कहते हैं जिसका मलतब है कि जनता ही नेता है। दुर्भाग्य की बात है कि आम लोग यह भूल गए हैं कि वे नेता हैं। लोकतंत्र में न कोई नेता होता है और न कोई जनता। बस लोग होते हैं। होना यह चाहिए कि हर…

अंतर / आध्यात्मिक या सांसारिक क्या हैं आप?

आजकल बहुत से लोगों को आध्यात्मिकता के प्रति एक चिढ़ सी होती है। इसका एक कारण यह है कि आध्यात्मिकता को दयनीय ढंग से रहने के रूप में चित्रित किया जाता है। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि लोगों के मन में आध्यात्मिकता की छवि को तुच्छ ढंग से प्रस्तुत किया…

शुभ-मुहूर्त / …तो क्या आपका भविष्य ग्रह-नक्षत्र तय कर रहे हैं?

आजकल, लोग कुछ भी करना चाहें तो वे पहले ग्रह-नक्षत्रों को देखना पसंद करते हैं। अपने घर से बाहर निकलने से पहले आप चाहते हैं कि सारे ग्रहों को आपके लिये अपनी सही स्थिति में आ जाना चाहिए। लोग शुभ-मुहूर्त निकालते हैं, ये भी देखते हैं कि समय खराब तो…

आत्मज्ञान / ‘खुद को जानने के वो आसान तरीके’, जो आप जानना चाहते हैं

प्राचीन एथेन्स के विशाल मंदिर डेल्फी की दीवारों पर यह शब्द मिलते हैं, ‘अपने आप को जानो’ यानी आत्मदीपो भवः। यह वाक्य उस दौर में लोग समझते थे, लेकिन आज हम ये शब्द समझ कर भी नहीं समझ रहे हैं। यह शब्द भारतीय वैदिक ग्रंथों में मिलते हैं। ये पूरी…

जीवंतता / जीवन बेकार क्यों लगने लगता है

आप को अपना ध्यान हर समय उस चीज़ पर केंद्रित करना चाहिए, जो आप करना चाहते हैं। किसी चीज़ पर अपना ध्यान लगातार एक घंटे तक लगाना शुरू कीजिए, फिर उसे बढ़ा कर एक पूरे दिन तक ऐसा करिए। अगर आप अपना ध्यान लगाए रख सकते हैं और उसमें पर्याप्त…

जीवन / क्या सभी के साथ, विनम्र रहना जरूरी है?

कभी किसी को आदर के साथ मत देखो। कभी किसी के को तिरस्कार के साथ मत देखो। सिर्फ जीवन को उसके असली रूप में देखना सीखें। तो सहजता से अपने जीवन से गुजर जाएंगे। यह वो मूल सिद्धांत है जो आपको ताउम्र खुश और तनाव मुक्त रखेगा। आप देखेंगे स्कूल…

अध्यात्म / कुछ ऐसा तैयार करना जिसे मृत्यु न छीन सके

अध्यात्म यानी ये प्रक्रिया जन्म और मृत्यु के बारे में नहीं है, ये कुछ ऐसा तैयार करने के बारे में है जिसे मृत्यु न छीन सके। इसे ऐसे समझिए जैसे जब हम कहते हैं कि शिव संहारक हैं, तो इसका मतलब यह नहीं होता कि शिव मृत्यु की वजह हैं,…

समाधान / पारिवारिक कलह मिटाकर, प्रेम के पौधे करें रोपित

घर-परिवार में कलह, विवाद, लड़ाई-झगड़ा आम बात है। लेकिन कैसे संभालें, ये बड़ा पेचीदा सवाल है। कई बार ऐसे हालात भी बन जाते हैं कि पारिवारिक कलह के कारण घर टूट जाते हैं या ये कलह लोगों की अंतिम सांस बन जाती है। मतभेद हर जगह हैं, मनभेद नहीं होना…

विमर्श /अध्यात्म से ‘ये कैसी चिढ़’, ऐसा क्यों करते हैं लोग

आज बहुत से लोग को आध्यात्मिकता के नाम से ही चिढ़ (इरीटेड होना – एक मानसिक बीमारी) जाते हैं। इसका कारण है और वो ये कि आध्यात्मिकता को दयनीय ढंग से रहने के रूप में चित्रित किया जाता है। यहां आप, यदि पढ़ रहे हैं तो आध्यात्मिक होने के सच्चे…

ज्ञान / ये संभव है! हिंदू मंदिर में मुस्लिम पुजारी

डॉ. वेदप्रताप वैदिक। कर्नाटक से चमत्कारी खबर आई है। एक हिंदू मंदिर में एक मुसलमान पुजारी को नियुक्त किया गया है। यह मठ लिंगायत संप्रदाय का है। कर्नाटक में दलितों के बाद लिंगायतों की संख्या सबसे ज्यादा है। कर्नाटक के कई बड़े नेता जैसे बी.डी. जत्ती, निजलिंगप्पा, बोम्मई, येदियुरप्पा आदि…

समाधान / इच्छाओं में उलझे मन को कुछ इस तरह सुलझाएं

इच्छा कभी आत्म ज्ञान की ओर नहीं ले जा सकती, लेकिन बिना इच्छा के कोई गति नहीं होती। इसका अर्थ है कि हमें बिना कोई इच्छा पैदा किये तीव्रता बनाए रखनी होगी। आपको समझना होगा कि यह आपकी इच्छा ही है जिसने भूत, वर्तमान और भविष्य जैसी चीजों को बनाया…

प्रबंधन / ध्‍यान देने की क्षमता को बढ़ाने के लिए यहां ध्यान दें

राय एक कल्पना है। जैसे ‘यह तो बहुत बुद्धिमान है, यह मूर्ख है, यह अच्छा है, यह बुरा है।’ ये सब कल्पना है। क्यों न हम कल्पना किए बिना यूं ही देखें? आप लोगों को कम उम्र में ही यह गुण अपने अंदर पैदा करना चाहिए। अगर आप राय नहीं…

समाधान / हर समस्या का हल है आपके पास, बस! तलाश कीजिए

मन वो उपकरण है जो हमारे आस पास होने वाली हर चीज़ का बोध कराता है। ऐसे में अगर मन पुरानी बातों की छाप अपने ऊपर ढो रहा हैं, तो चीजों को साफ-साफ और गहराई से देखना मुश्किल हो जाएगा। सब कुछ साफ देखने के लिए मन दर्पण की तरह…