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पर्यटन / खूबसूरत लोगों का सुन्दर शहर जहां की हर बात है रोमांचक

  • संजीव शर्मा।

मिजोरम की राजधानी आइज़ोल खूबसूरत लोगों का सुन्दर शहर है, जहां खूबसूरती केवल चेहरों की नहीं बल्कि व्यवहार की, साफ़ दिल की, शांति और सद्भाव की, अपने शहर को साफ़-स्वच्छ बनाने की जिजीविषा की और मदद को हमेशा तत्पर सहयोगी स्वभाव की है।

सड़कों पर बिंदास एसयूवी दौड़ाती युवतियां, स्कूटी पर फर्राटा भरती लड़कियां और पेट्रोल पंप से लेकर हर छोटी-बड़ी दुकान को संभालती महिलाएं, बेख़ौफ़, बिंदास, बिना किसी भेदभाव के सिगरेट के कश लगाती हैं और नए दौर की बाइक पर खिलखिलाती मस्तीखोर युवा पीढ़ी… न कोई डर और न ही कोई बंदिश… जीने का कुछ अलहदा सा अंदाज़ और इसके बाद भी पूरी तरह से अनुशासित जीवनशैली। कुछ ऐसी ही है आइज़ोल में रहने वालों की जिंदगी के रंग।

पूर्वोत्तर में आइज़ोल का कोई मुकाबला नहीं

लोग सुबह शाम चर्च में प्रार्थना और सेवा के लिए सज-धजकर निकलते हैं और बाकी समय पार्कों में समय काटते हैं। शहर में न तो कोई सिनेमाघर है और न ही कोई नामी मॉल,फिर भी मस्ती से समय काटते लोग हैं। फैशन का यह हाल है कि शायद समूचे पूर्वोत्तर में आइज़ोल का कोई मुकाबला नहीं है। साड़ी तो दूर सलवार कमीज में भी कोई महिला दिख जाए तो आपकी किस्मत वरना घुटनों तक चढ़े शानदार बूट, जींस, स्कर्ट और टॉप पहने लड़कियां और जींस-टीशर्ट में कसे लड़के यहां की पहचान हैं।

पान है यहां की कमजोरी

जियो और जीने दो को चरितार्थ करते हाथों में हाथ डाले बेलौस घूमते जोड़े आपस में ही खोये रहते हैं। मैदानी इलाकों के उलट न तो वे किसी को घूरते हैं और न ही उन्हें कोई घूरता है। यदि कोई मुड़कर देखते नज़र आ रहा है तो आप सीधे जाकर हिंदी में बात कर सकते हैं क्योंकि शर्तियां वह किसी मैदानी इलाक़े से ही होगा। हां पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों की तरह पान यहां की भी कमजोरी है।

पत्रकारों के लिए जन्नत है यह शहर

लगभग 175 वर्ग किलोमीटर में बसा यह शहर तक़रीबन 4 हजार फुट की ऊंचाई पर बसा है इसलिए तापमान आमतौर पर 10 से 30 डिग्री सेल्शियस के बीच बना रहता है। पूर्वोत्तर की पहचान बारिश यहां भी जमकर होती है। पत्रकारों के लिए तो यह इस लिहाज से स्वर्ग है कि महज तीन से चार किलोमीटर के दायरे में पूरी रिपोर्टिंग हो जाती है। अगर आप पहाडी सड़कों के आदी हैं तो पैदल ही दिन में दो चक्कर लगा कर आ सकते हैं। पड़ोसी राज्य मणिपुर, नागालैंड और असम की तुलना में तो यह बिलकुल शांत हैं।

देश में ही जाकर उठाएं ‘विदेशी शहर’ का लुत्फ़

पहाड़ पर दूर दूर तक फैले रंग-बिरंगे और आकर्षक घर बरबस ही अपनी और ध्यान खींच लेते हैं। खासतौर पर हम जैसे मैदानी इलाकों से आने वाले लोगों के लिए तो ये घर भी किसी आकर्षण से कम नहीं हैं। वैसे तो आमतौर पर पहाड़ी इलाकों में इसतरह के घर आम बात है लेकिन पूर्वोत्तर और फिर आइज़ोल में तो यहां की विरासत की छाप खुलकर नज़र आती है। रात में यह शहर ऐसा दिखाई देता है जैसे किसी ने पहाड़ पर रंग-बिरंगे सितारे बिखेर दिए हों। वक्त मिले तो एक बार आइज़ोल जरुर आइए क्योंकि महज तीन दिन में आप अपने देश में मौजूद इस ‘विदेशी शहर’ का लुत्फ़ उठा सकते हैं। वैसे यहां आने के लिए एक तरह के पासपोर्ट यानी ‘इनर लाइन परमिट’ की जरुरत पड़ती है इसलिए भी यहां की यात्रा और भी रोमांचक लगने लगती है।

क्या होता है इनर लाइन परमिट

इनर लाइन परमिट (आईएलपी) भारत सरकार द्वारा जारी एक आधिकारिक यात्रा दस्तावेज है, जो एक सीमित अवधि के लिए एक संरक्षित क्षेत्र में भारतीय नागरिक को यात्रा की अनुमति देता है। यह परमिट तय समय सीमा और कुछ लोगों के लिए ही मान्य होता है।

आईएलपी दो प्रकार का होता है। एक यहां ट्रेवल करने के लिए और दूसरा उन लोगों के लिए जो यहां लंबे समय तक रहना चाहते हैं और रोजगार प्राप्त करना चाहते हैं। वैसे ये परमिट भारत में सिर्फ तीन राज्यों मिजोरम, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में ही पूरी तरह से लागू है। हालांकि, इन राज्यों के अलावा दूसरे देशों के बॉर्डर लाइन पर भी इस परमिट की आवश्यकता होती है।

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