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उम्मीद : ज़िंदगी की अनिश्चितताएं ही सबसे बड़ी संभावनाएं हैं

प्रतीकात्मक चित्र।

जीवन अनिश्चित है, लेकिन अनिश्चितता से घृणा नहीं करनी चाहिए। सद्गुरु बताते हैं कि अनिश्चितता से घृणा क्यों नहीं करना चाहिए। जब आप एक नई जगह में जाते हैं, तो अनिश्चितता होती है, लेकिन कई नई संभावनाएं भी सामने आती हैं।

ये सच है की बाहरी दुनिया में कुछ भी निश्चित नहीं है। और ये अनिश्चितता ही चीज़ों को चुनौतीपूर्ण बनाती है। अनिश्चितता का अर्थ है की चीजें बदलती रहती हैं, दूसरे शब्दों में कहें तो कहीं कुछ ठहरा नहीं है। यदि आप तेज चल रहे हैं तो आपका हर कदम ऐसी ज़मीन पर पड़ता है जिसकी आप ठीक तरह से जांच-परख नहीं कर पाए हैं। इसी को आप अनिश्चितता कहते है।

अनिश्चितता का अर्थ है, संभावनाएं

जो नए अवसर या मौकों की तलाश में हैं, अनिश्चितता का समय उनके लिए सर्वश्रेष्ठ है। जो दूरदर्शी हैं वे अनिश्चितता को एक संभावना में बदल देते हैं। बाकी लोग अनिश्चितता को एक समस्या के रूप में देखते हैं। लेकिन, क्योंकि आप लगातार अपनी मानसिक विवशताओं की प्रतिक्रियाओं में उलझे हुए हैं, आप निश्चित्ता की इच्छा करते हैं।

निश्चित्ता एक गतिहीन स्थिति है। अगर निश्चित्ता है तो कोई बदलाव नहीं होगा, है ना? किसी भी व्यवसाय या राजनीतिक या सामाजिक व्यवस्था में बदलाव न होने का मतलब है, कोई परिवर्तन न होना। ऐसी स्थिति में कोई विकास नहीं होता। निश्चित्ता की इच्छा में आप विकासहीनता को बढ़ावा दे रहे हैं।

विकासहीन माहौल में आप ऊब जायेंगे और क्रियाशील माहौल के लिये जरुरी संतुलन आप में है नहीं। यानि समस्या माहौल की नहीं बल्कि आपकी आंतरिक अनिश्चितता की है। अगर आप सिर्फ तभी शांत रह सकते हैं, जब ये सारी दुनिया बदल जाए, तो यह संभव नहीं है। विकल्प यह है कि हम आप के भीतर परिवर्तन करें।

इसका मतलब यह है कि अगर आप अपनी मानसिक विवशताओं यानि मजबूरियों से छूट जाएं तो आप हर परिस्थिति को अपनी योग्यता अनुसार संभाल लेंगे, हो सकता है कि आप किसी और की तरह कुशल न हों पर आप हर परिस्थिति में अपनी क़ाबिलियत के अनुसार अपनी सबसे बेहतर कोशिश करेंगे, बस। और साथ ही अपनी मानसिक विवशताओं से बेबस होकर हर स्थिति में पीड़ा सहन करने से बच जाएंगे।

निश्चित्ता और अनिश्चितता से मुक्ति

आपका भीतरी तत्व अपने आप में एक अलग आयाम है। इसे बाहर की परिस्थिति के अनुसार ढाला नहीं जा सकता। ‘बाहर निश्चित्ता है तो मैं इस तरह की भीतरी स्थिति रखूंगा’, ‘अब बाहर अनिश्चितता है तो मैं दूसरी तरह की भीतरी स्थिति रखूंगा’, ‘जब मेरे इर्द-गिर्द लोग अच्छे हैं तो मैं इस तरह का अंतरमन रखूंगा’, ‘जब मेरे इर्द-गिर्द लोग बुरे हैं तो मैं दूसरी तरह का अंतरमन रखूंगा’, इस तरह करना संभव नहीं है। भीतरी स्थिति आप निर्धारित नहीं कर सकते। वो बस है। उसे किस प्रकार बनाये रखें? उसे बनाकर नहीं रखा जा सकता। अगर जागरूकता है, तो मानसिक विवशताएं नहीं होंगी।

आप यहां आये बिना किसी निवेश के मौजदू हैं। जब जायेंगे तब भी आपके हाथ में कोई पूंजी नहीं होगी। इस बीच जो कुछ भी हो, आपका तो लाभ ही होगा क्योंकि अब आपके पास जीवन का अनुभव भी होगा। महत्वपूर्ण यह है कि आप जीवन को किस तरह अनुभव करते हैं। अगर आपकी भीतरी स्थिति मानसिक विवशताओं से मुक्त, और जागरूक है तो आप अपने अनुभव खुद तय कर पाएंगे। सांसारिक परिस्थितियों को आप केवल कुछ हद तक ही निर्धारित कर सकते हैं। पर आप जीवन को किस तरह से अनुभव करेंगे ये शत प्रतिशत आप ही तय करते हैं।

भीतरी स्थिति बनाने का फार्मूला

अगर आपको लगता है कि आपका काम महत्वपूर्ण है, तो सबसे पहले अपने आप को तैयार करना होगा, ताकि बाहर चाहे कोई भी परिस्थिति हो, अन्दर से आप स्थिर रहें। जब आप कोई बड़ा व्यवसाय चला रहे हों तो ये व्यवसाय सिर्फ आपके बारे में नहीं होता। अक्सर ऐसे व्यवसाय से हजारों लोग जुड़े होते हैं। तो आप परिस्थितियों को जिस तरीके से संभालते हैं, उसका असर सिर्फ आपकी ही नहीं हजारों की जिंदगियों पर पड़ता है।

इसमें कोई शक नहीं कि जितना आपका व्यवसाय बढ़ेगा उतनी ही चुनौतियां भी बढ़ेंगी। अगर आपको घुड़सवार बनकर घोड़े का नियंत्रण करना हो, या किसी परिस्थिति का, चाहे वो कितनी ही चुनौतीपूर्ण हो, सबसे पहले अपने आप को तैयार करना होगा। अपने अन्दर एक स्थिर और आनंदमय वातावरण बनाने का तरीक़ा मैं आपको सिखा सकता हूँ। इससे जीवन में हर प्रकार के उतार-चढ़ाव का सामना करने की आपकी क्षमता बढ़ सकती है। कैसे? योग से।

योग आपको ऐसी संभावना देता है कि अगर आप यहां सहजता से बैठें तो आप और आपके शरीर के बीच ज़रा सा फासला बन जाएगा, आप और आपके विचारों के बीच ज़रा सा फासला बन जाएगा, आप और आपकी दुनिया के बीच ज़रा सा फासला बन जाएगा। जब आप ये फासला बना लेते हैं, जब आप जान जाते हैं कि आप क्या हैं और क्या नहीं हैं, उसी क्षण दुःख का अंत हो जाता है। जब दुःख का भय समाप्त हो जाता है, आप हर चीज़ को साफ़-साफ़ देख सकते हैं, और हर मुश्किल को अपनी बुद्धि और सामर्थ्य का बेहतरीन उपयोग कर के सुलझा पाते हैं। ऐसे में कोई परिस्थिति आपको हरा नहीं सकती।

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