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चीनी सिनेमा : चीन में रहती है ‘अंकल आमिर’ की धूम

चित्र : लाल सिंह चड्डा फिल्म में आमिर खान।

  • अखिल पाराशर, बीजिंग, चीन।

चीन में कोटा प्रणाली के चलते चीनी सिनेमाघरों में केवल कुछ अंतरराष्ट्रीय फिल्में ही रिलीज हो सकती हैं। ज्यादातर हॉलीवुड की फिल्में ही चीनी सिनेमाघरों में नजर आती हैं। कुछ साल पहले चीनी सिनेमाघरों में मुश्किल से इक्का-दुक्का ही भारतीय फिल्में रिलीज होती थीं, लेकिन चीन में आमिर खान का जादू ऐसा चला कि आमिर खान की पीके, दंगल के बाद अन्य भारतीय सितारों की फिल्म जैसे सलमान खान की बजरंगी भाईजान और सुलतान, इरफान खान की हिन्दी मीडियम, अक्षय कुमार की टॉयलेट-एक प्रेम कथा और पैडमैन, रानी मुखर्जी की हिचकी आदि भी रिलीज हुई। इन फिल्मों ने चीनी बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचाया।

चीन में ज्यादा स्क्रीन हैं, इसलिए हिंदी फिल्मों के यहां ज्यादा शो होते हैं और चीन में हिंदी फिल्में कुछ तो चीनी सबटाइटल्स के साथ, या कुछ चीनी भाषा में डबिंग के साथ रिलीज होती हैं, इसलिए हिन्दी फिल्में यहां जबरदस्त कमाई कर रही हैं। वैसे, चीन में उन्हीं फिल्मों को रिलीज किया जाता है जो चीन के कल्चर के साथ मेल खाती हैं और इस काम में सरकार की अहम भूमिका रहती है और इसके लिए विभाग भी तय किए गए हैं।

आमिर खान चीन में बहुत बड़े सितारे

एक समय था जब चीन में राज कपूर काफी लोकप्रिय हुआ करते थे और उनकी फिल्म ‘आवारा’ रिलीज हुई। राज कपूर की ये क्‍लासिक फिल्‍म पहली बॉलीवुड फिल्‍म थी, जो चीन में रिलीज हुई थी। इस फिल्‍म को चीन के अलावा रूस में भी रिलीज किया गया था। लेकिन अब आमिर खान उनकी जगह ले चुके हैं। चीन में उनकी फिल्मों की वजह से उन्हें ‘अंकल आमिर’ के नाम से जाना जाता है।

बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान चीन में बहुत बड़े सितारे बन चुके हैं। हिंदी फिल्मों का चीन में बाजार बनाने का श्रेय भी उन्हीं को जाता है। इसकी शुरुआत 3 इडियट्स फिल्म से हुई, उसके बाद पीके और दंगल से यह बाजार और बड़ा हो गया।

चीनियों को इमोशनल फिल्में पसंद

दरअसल, चीनी दर्शकों को आंखे नम कर देने वाली इमोशनल फिल्में बहुत ज्यादा पसंद आती हैं। चीन में बाहुबली जैसी फिल्में इतना कमाल नहीं कर पाईं, जितना दंगल और सीक्रेट सुपरस्टार ने किया। आमिर खान की फिल्म ‘दंगल’ में बाप और बेटियों का इमोशनल नाता भी था और एक कड़क पिता का किरदार भी था। ऐसे सख्त पिता चीन में दिखाई दे सकते हैं। इस फिल्म ने चीन में इतिहास रच दिया।

दंगल ने चीन में 1300 करोड़ की कमाई की। चीनी लोगों को लड़कियों-महिलाओं के मुद्दे काफी पसंद आते हैं। यही कारण है सीक्रेट सुपरस्टार भी यहां चीनी बॉक्स ऑफिस पर बेहद सफल रही। आमिर खान इस बात से इत्तेफाक रखते हैं कि चीनी लोगों को भारतीय लोगों की तरह इमोशनल फिल्में ज्यादा पसंद है।

चीन में ‘दंगल’ का कहर

हिंदी फिल्मों की चीन में लोकप्रियता बढ़ने की एक और वजह यह भी है कि पश्चिम के मुकाबले भारत और चीन की संस्कृति आपस में काफी मिलती-जुलती है। भारतीय फिल्मों में गाने और डांस चीनी लोगों के लिए लिए खास होता है, क्योंकि चीनी फिल्मों में ये सब नहीं होते। खुद चीनी लोग बरसों से अपनी स्पेशल इफेक्ट्स वाली एक्शन फिल्मों और युवा प्रेमियों की लव स्टोरी देख-देखकर पक चुकी हैं।

अगर चीन की मुख्यभूमि के सिनेमा पर नजर डालें, और कुछ अपवादों को छोड़ दें, तो साल 2000 में आई आंग ली की ‘क्राउचिंग टाइगर हिडन ड्रैगन’ और 2002 में आई ‘हीरो’ के बाद शायद ही ऐसी कोई कमाल फिल्म चीन में बनी है जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हटकर कमाल दिखाया हो। यही वो सबसे बड़ी वजह है, जिसके चलते आमिर खान की फिल्म ‘दंगल’ ने चीन में कामयाबी के कीर्तीमान स्थापित किए।

फिल्म की प्रेरणादायक रियलिस्टिक ‘कहानी’ और उसके अंदर रचे-बसे बेमिसाल जमीनी ड्रामा से चीनी दर्शक इस कदर अभिभूत हुए कि चीनी भाषा में डब न होने के बावजूद सिर्फ चीनी सबटाइटल्स के साथ हिंदी में इसे इतना ज्यादा देखा कि यह चीन के इतिहास में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली पहली गैर-हॉलीवुड फिल्म बन गई।

हॉलीवुड फिल्में भले ही चीन में कमाई के मामले में आगे रहती हैं, लेकिन ‘दंगल’ ने लोगों के दिलों पर एक अलग छाप छोड़ी। ‘दंगल’ रिलीज होने के बाद चीनी दर्शकों ने इसकी कहानी से खुद को इस कदर जुड़ा हुआ महसूस किया कि ‘वर्ड ऑफ माउथ’ ही ‘दंगल’ की सबसे बड़ी पब्लिसिटी बन गयी।

किसी को ‘दंगल’ और बौद्ध धर्म में समानता नजर आई तो कुछ को लड़कियों द्वारा पितृसत्ता के खिलाफ खड़ा होना लुभाया। जिस कड़क पिता की वजह से फिल्म की आलोचना हिंदुस्तान में हुई, उसी पिता और उसके संघर्षों को देखकर चीनी जनता की आंखें नम हुईं।

चीनी राष्ट्रपति शी, को पसंद हैं भारतीय फिल्में

चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग भी भारतीय फिल्मों के मुरीद हैं। उन्होंने न केवल हिंदी फिल्में, बल्कि भारत की कई क्षेत्रीय भाषाओं में बनी भारतीय फिल्में भी देखी हैं। यही वजह है कि वह चाहते हैं कि चीन में भारतीय फिल्में ज्यादा दिखाई जाएं।

साल 2018 में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वुहान वार्ता के लिए चीन दौरे पर आये थे, तब दोनों नेताओं के बीच आध्यात्मिकता, व्यापार, तकनीक, परंपरा के साथ-साथ फिल्म और मनोरंजन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर बात हुई थी। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को बताया कि उन्होंने कई बॉलीवुड और क्षेत्रीय फिल्में देखी हैं। यह एक अच्छा विचार होगा कि ज्यादा भारतीय फिल्में चीन आएं और बड़ी संख्या में चीन की फिल्में भारत जाएं।

पायरेसी से शुरू हुआ ट्रेंड

चीन में भारतीय फिल्मों के हिट होने का ट्रेंड साल 2011 में आया। उस समय आमिर खान की फिल्म ‘थ्री इडियट्स’ पायरेसी के माध्यम से चीन पहुंची। उस समय यह फिल्म चीन के ताइवान और हांगकांग में भी काफी प्रसिद्ध थी। हालांकि चीनी सिनेमाघरों में जब यह रिलीज हुई तो अच्छा बिजनेस नहीं कर पाई। साल 2014 में जब चीनी राष्ट्रपति शी चिनिफिंग ने भारत का दौरा किया तो भारत और चीन में को-प्रोडक्शन एग्रीमेंट हुआ। इसके बाद धूम-3 और हैप्पी न्यू ईयर चीन में रिलीज की गई।

भारत के पास सुनहरा मौका

देखा जाए तो चीन और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनातनी और भारतीय फिल्मों को लेकर चीनी लोगों के खास लगाव के चलते भारत के पास चीन में अपना बाजार बढ़ाने का सुनहरा मौका है। भारत के प्रोड्यूसर्स को अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध का फायदा उठाना चाहिए। चीन के बड़े बाज़ार और इस देश में भारतीय फिल्मों की सफलता को देखते हुए भारत चीनी बाजार के लिए खास रणनीति बना सकता है। भारत को-प्रोडक्शन जैसी तकनीकों के सहारे चीन के बाजार में अपनी पैठ भी बना सकता है।

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