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मृदा संरक्षण : …तो क्या साल 2082 तक उपजाऊ मिट्टी नष्ट हो जाएगी!

  • सद्गुरु जग्गी वासुदेव।

पर्यावरण में मिट्टी का स्वस्छ होना उतना ही जरूरी है, जितना की हवा में कोई जहरीली गैस का ना होना। हमें यह पक्का करना होगा कि हमारी मिट्टी समृद्ध और उपजाऊ है, सिर्फ तभी हम इस पर्यावरण से जुड़ी आपदा से बच पाएंगे।

इस धरती पर जीवन अलग अलग रूपों में है, सूक्ष्म कीटाणु, कीड़े, पक्षी, पशु, मनुष्य, पेड़ पौधे और हर तरह की हरियाली। इन सब का 87% हिस्सा औसतन 39 इंच ऊपरी मिट्टी की वजह से ही रहता और बढ़ता है। इन सब को अभी बहुत बड़ा खतरा है।

पिछले 40 सालों में दुनिया की 40% ऊपरी मिट्टी का नाश हो गया है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने कहा है कि अब हमारे पास जो मिट्टी बची है, उसमें अगली 80 से 100 फसलें ही हो पाएंगी। इसका मतलब है कि हम आने वाले 45 से 60 साल यानी 2082 तक ही खेती कर पाएंगे और उसके बाद अन्न उगाने के लिए हमारे पास ज़रूरी मिट्टी नहीं बचेगी।

आप समझ सकते हैं कि हम सारी दुनिया के लिए कितना दुःख, कितनी पीड़ा की परिस्थिति बना रहे हैं! भारत की 30% जमीन की पहले ही दुर्दशा हो चुकी है और हमारे 90% राज्यों में खेती की जमीन रेगिस्तान में बदलती जा रही है। इसका मतलब है कि वहां अब कुछ भी उगाया नहीं जा सकता। तो हमारी अगली पीढ़ियों के लिये, देश की मिट्टी को बचाना और उसे खेती लायक बनाना सबसे अहम बात है।

मिट्टी का पुनरुद्धार पर्यावरण की मदद करता है, मैं जर्मनी में संयुक्त राष्ट्र संघ की एक संस्था में भाषण दे रहा था। उन लोगों ने मुझसे पूछा, ‘पर्यावरण संबंधी विनाश को रोकने के लिये कौन सी तीन चीजें हमें करनी चाहियें’? मैंने कहा, ‘तीन चीजें हैं, मिट्टी, मिट्टी और मिट्टी’! ये एक ऐसी बात है जिसकी ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा क्योंकि शहरों में तो हवा के प्रदूषण के बारे में ही बात करने की फैशन है।

मैं यह नहीं कह रहा कि ये चिंता का विषय नहीं है पर अगर आप मिट्टी को ठीक करने के लिये जरूरी काम करेंगे तो इससे पानी की समस्या भी हल हो जायेगी। अगर आप अपनी आर्थिक गतिविधियों की प्रचुरता को थोड़ा कम करने को तैयार हों तो हम हवा के प्रदूषण को थोड़े ही समय में दूर कर सकते हैं। पर, हमने जिस मिट्टी को बरबाद कर दिया है, उसे पुनर्जीवित करने के लिये हमें 15 से 20 साल लगेंगे, वो भी तब जब हम जरूरी काम तेजी से और लगातार सही ढंग से करें।

अगर आप इसे ऐसे ही, बिना किसी खास रुचि और भागीदारी के करेंगे तो मिट्टी को एक खास स्तर तक लाने में 40 -50 साल का समय निकल जायेगा। अगर मिट्टी उतने लंबे समय तक खराब हालत में रहे तो दो से तीन पीढ़ियों का समय बहुत ही तकलीफों भरा होगा।

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