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वामपंथ / नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्रों में केंद्र सरकार करेगी ‘विकास की बौछार’

चित्र सौजन्य : गृह मंत्रालय/पीआईबी। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह नक्सलवाद से संबंधित बैठक के दौरान, आगंतुक मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों का अभिवादन करते हुए।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को नई दिल्ली में वामपंथी उग्रवाद पर समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में कई केंद्रीय मंत्रियों और 10 राज्यों के मुख्यमंत्री को बुलाया गया। इनमें बिहार, ओडिशा, महाराष्ट्र, तेलंगाना, मध्य प्रदेश और झारखंड के मुख्यमंत्री और आंध्र प्रदेश की गृह मंत्री, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और केरल के वरिष्ठ अधिकारी, केन्द्रीय गृह सचिव, केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के शीर्ष अधिकारी और केन्द्र तथा राज्य सरकार के अनेक वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।

हालांकि नक्सलवाद से पिछले कई सालों से ज्यादा प्रभावित राज्य छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल मौजूद नहीं थे, जिसे लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा बनी हुई है, लेकिन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मीडिया से कहा कि, ‘बैठक में मुख्य सचिव और डीजीपी दोनों शामिल हुए हैं, मैं इसलिए नहीं जा पाया क्योंकि बैठक बुलाए जाने से बहुत पहले ही मैंने एक कार्यक्रम को अपना समय दे दिया था इसलिए इसे राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।’

बहरहाल, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, ‘प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए कार्य किया जा रहा है। वामपंथी उग्रवाद पर नकेल कसने में केंद्र और राज्यों के साझा प्रयासों से बहुत सफलता मिली है। एक तरफ जहां वामपंथी उग्रवाद की घटनाओं में 23 प्रतिशत की कमी आई है वहीं मौतों की संख्या में 21 प्रतिशत की कमी आई है।’

शाह ने कहा कि, ‘हम सब जानते हैं कि जब तक हम वामपंथी उग्रवाद की समस्या से पूरी तरह निजात नहीं पाते तब तक देश का और वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्यों का पूर्ण विकास संभव नहीं है। इसको खत्म किए बिना न तो लोकतंत्र को नीचे तक प्रसारित कर पाएंगे और न ही अविकसित क्षेत्रों का विकास कर पाएंगे, इसलिए हमने अब तक जो हासिल किया है उस पर संतोष करने की बजाय जो बाकी है उसे प्राप्त करने के लिए गति बढ़ाने की जरूरत है।

ग्राफ : नक्सवाद का भौगोलिक प्रसार।

वामपंथी उग्रवाद पिछले कई दशकों से एक अहम सुरक्षा चुनौती रहा है। हालांकि यह मुख्य रूप से राज्य का विषय है लेकिन केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने वामपंथी उग्रवाद के ख़तरे से समग्र रूप से निपटने के लिए 2015 में एक ‘राष्ट्रीय नीति और कार्य योजना’ बनाई। इस योजना की प्रगति और स्थिति की लगातार सघन निगरानी की जा रही है।

यह योजना नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में ग़रीब और कमज़ोर वर्ग तक विकास पहुंचाने के लिए विकासशील गतिविधियों पर अधिक ज़ोर दे रही है। इसके साथ ही, हिंसा के प्रति शून्य सहिष्णुता, वामपंथी उग्रवाद के खतरे से निपटने की ‘राष्ट्रीय नीति और कार्य योजना’ के महत्वपूर्ण पहलू हैं।

इस नीति के अंतर्गत, केन्द्रीय गृह मंत्रालय, सीएपीएफ बटालियनों की तैनाती, हेलीकॉप्टरों और यूएवी के प्रावधान और भारतीय रिजर्व बटालियनों (आईआरबी)/विशेष भारत रिजर्व बटालियनों (एसआईआरबी) की मंजूरी के जरिए क्षमता निर्माण और सुरक्षा तंत्र की मज़बूती के लिए राज्य सरकारों को समर्थन दे रहा है। राज्य पुलिस के आधुनिकीकरण और प्रशिक्षण के लिए पुलिस बल के आधुनिकीकरण (एमपीएफ), सुरक्षा संबंधी व्यय (एसआरई) योजना और विशेष बुनियादी ढांचा योजना (एसआईएस) के तहत भी धनराशि उपलब्ध कराई जाती है।

ग्राफ : वामपंथी उग्रवाद संबंधी घटनाएं।

वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्यों के विकास के लिए, भारत सरकार ने कई विकासात्मक पहल की हैं जिनमें 17,600 किलोमीटर सड़कों को मंज़ूरी शामिल है, जिसमें से 9,343 किलोमीटर सड़कों का निर्माण आरआरपी-I, आरसीपीएलडब्ल्यूई के तहत पूरा हो चुका है। वामपंथी उग्रवाद प्रभावित ज़िलों में दूरसंचार सुविधाओं में सुधार के लिए 2,343 नए मोबाइल टावर लगाए गए हैं और अगले 18 महीनों में 2,542 अतिरिक्त टावर लगाए जाएंगे।

केंद्र सरकार का कहना है कि वामपंथी उग्रवाद प्रभावित ज़िलों में लोगों के वित्तीय समावेशन के लिए 1,789 डाकघर, 1,236 बैंक शाखाएं, 1,077 एटीएम और 14,230 बैंकिंग प्रतिनिधि खोले गए हैं और अगले एक वर्ष में 3,114 डाकघर और खोले जाएंगे। वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस) खोलने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वामपंथी उग्रवाद प्रभावित ज़िलों के लिए कुल 234 ईएमआरएस स्वीकृत किए गए हैं, इनमें से 119 कार्यरत हैं।

सबसे अधिक प्रभावित ज़िलों में विकास को और गति देने के लिए विशेष केंद्रीय सहायता (एससीए) योजना के तहत, 10,000 से अधिक परियोजनाएं शुरू की गई हैं, जिनमें से 80% से अधिक पूरी हो चुकी हैं। इस योजना के तहत वामपंथी उग्रवाद प्रभावित राज्यों को 2,698.24 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। एसआईएस के तहत 992 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंज़ूरी दी गई है और 152 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि जारी कर दी गई है। एसआरई के तहत अप्रैल, 2014 से पिछले 7 वर्षों में 1,992 करोड़ रुपए की राशि जारी की गई है, जो कि सात वर्षों से पहले की अवधि की तुलना में 85% अधिक है।

ग्राफ : घटनाओं में हुई मृत्यु की संख्या।

केन्द्रीय गृह मंत्रालय का कहना है कि कुछ ज़िलों को वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित ज़िलों के रूप में वर्गीकृत किया था और वामपंथी उग्रवाद से निपटने के लिए प्रभावित राज्यों को विशिष्ट संसाधन जुटाने के लिए सुरक्षा संबंधी व्यय (एसआरई) योजना के तहत कवर है। इन एसआरई जिलों में से, देश भर में वामपंथी उग्रवाद संबंधी हिंसा वाले ज़िलों में से 85% से अधिक जिलों को सुरक्षा और विकास से संबंधित संसाधनों की केन्द्रित उपलब्धता के लिए ‘सबसे अधिक प्रभावित ज़िलों’ के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

पिछले एक दशक में, हिंसा के आंकड़ों और इसके भौगोलिक फैलाव, दोनों में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। वामपंथी उग्रवाद संबंधित हिंसा की घटनाएं 2009 में 2,258 के उच्चतम स्तर से 70% कम होकर वर्ष 2020 में 665 रह गई हैं। मौतों की संख्या में भी 82% की कमी आई है जो वर्ष 2010 में दर्ज 1,005 के उच्चतम आंकड़े से घटकर वर्ष 2020 में 183 रह गई हैं। माओवादियों के प्रभाव वाले ज़िलों की संख्या भी वर्ष 2010 में 96 से वर्ष 2020 में घटकर सिर्फ 53 ज़िलों तक सीमित रह गई है। माओवादियों को अब सिर्फ़ 25 ज़िलों तक सीमित कर दिया गया है जो कि देश के कुल वामपंथी उग्रवाद की 85% हिंसा के लिए ज़िम्मेदार हैं।

चित्र : दिल्ली में वामपंथी उग्रवाद पर समीक्षा बैठक में कई केंद्रीय मंत्रियों और 10 राज्यों के मुख्यमंत्री को बुलाया गया।

बेहतर स्थिति के कारण, एसआरई जिलों की संख्या की पिछले तीन वर्षों में दो बार समीक्षा की गई, जो अप्रैल, 2018 में 126 ज़िलों से घटकर 90 और फिर जुलाई, 2021 में 70 हो गए। सबसे अधिक वामपंथी उग्रवाद प्रभावित ज़िलों की संख्या भी अप्रैल, 2018 में 35 से घटकर 30 और फिर जुलाई, 2021 में इसे और कम करके 25 कर दिया गया।

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