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रिपोर्ट / स्वच्छ भारत अभियान का ‘घटता बजट, बढ़ता समय’, कौन जिम्मेदार?

चित्र : स्वच्छता सर्वेक्षण में हर बार नम्बर-1 के पायदान पर रहने वाला शहर ‘इंदौर’।

भारत में, स्वच्छता के बारे में सदियों से जागरुकता रही है, लेकिन सार्वजनिक और घरेलू स्तर पर कुछ कार्य ऐसे हैं, जो सदियों से चले आ रहे हैं, मसलन खुले में शौच और सार्वजनिक जगहों पर घरों की गंदगी को इधर-उधर फेंक देना! नालों में बहता बदबूदार पानी जो सीधे नदियों में मिला दिया जाता है।

लेकिन बीते कुछ वर्षों में चीजें बदली हैं, स्वच्छता की दिशा में उठाए गए कदमों से बदलाव हुआ है, लेकिन कार्य की गति धीमी है। बदलाव की यह शुरूआत स्वच्छ भारत अभियान के जरिए हुई। महात्मा गांधी के ‘स्‍वच्‍छ भारत’ सपने को पूरा करने की दिशा में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी 2 अक्‍टूबर 2014 को स्वच्छ भारत अभियान की शुरूआत की।

यह महत्वाकांक्षी योजना दरअसल पहले की सरकार के केंद्रीय ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम (1986-1999) और संपूर्ण स्वच्छता अभियान (1999) का बदला हुआ रूप है। संपूर्ण स्वच्छता अभियान का नाम 2012 में बदल कर निर्मल भारत अभियान कर दिया गया था। अभियान की शुरूआत से ही जितना कहा गया उतना काम नहीं, सिर्फ़ बातें होती रहीं। वास्तविक अलग और निगरानी की कोई रणनीति नहीं रही।

जब स्वच्छ भारत अभियान की ऑफिशियल वेबसाइट के रिपोर्ट कैटेगरी में जाएं तो पिछला डाटा आज-तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। आंकड़ों में एकरूपता की कमी देखी गई। उस समय प्रकाशित ‘डाउन टू अर्थ’ पत्रिका ने जब विश्लेषण किया तो पत्रिका के मुताबिक अगस्त 2014 और मार्च 2015 के बीच सात महीनों में 109 शौचालय प्रतिदिन की दर से कुल 22,838 शौचालय बनाए गए।

वहीं दूसरी ओर इस साल 27 जुलाई और 11 अगस्त के बीच यानी कुल 15 दिनों में ही 89 हज़ार शौचालय बना दिए गए यानि प्रतिदिन 5,933 शौचालय बनाए गए. यह 5,343 फ़ीसदी की वृद्धि है।

इस अभियान में उस जोर-शोर से स्वच्छता ब्रांड एम्बेसेडर नियुक्त किए गए जिनमें मृदला सिन्‍हा, सचिन तेंदुलकर, बाबा रामदेव, शशि थरूर, अनिल अम्‍बानी, कमल हसन, सलमान खान, प्रियंका चोपड़ा और तारक मेहता का उल्‍टा चश्‍मा की टीम जैसी 9 नामचीन हस्तियों को आमंत्रित किया गया कि वह भी स्‍वच्‍छ भारत अभियान में अपना सहयोग प्रदान करें, इसकी तस्‍वीरें सोशल मीडिया पर साझा करें और अन्‍य 9 लोगों को भी अपने साथ जोड़ें, ताकि यह एक श्रृंखला बन जाएं। लेकिन सेलिब्रिटीज को जोड़ना सिर्फ नाम भर का रहा स्वच्छता की दिशा में उन्होंने कुछ ऐसा कुछ भी खास नहीं किया जिसे भारतीय याद रखें और ‘चाय पर चर्चा’ कर सकें।

स्वच्छ भारत अभियान को वैश्विक स्तर पर उस समय किरकिरी का सामना करना पड़ा जब वर्ल्ड बैंक के प्रेजिडेंट ने जिम यॉन्ग किम ‘स्वच्छ भारत अभियान’ को मिस्र के प्रॉजेक्ट की ‘नकल’ बताया। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि ‘हमारे ज्ञान और नई-नई जानकारियां साझा करने का फायदा यह हुआ है कि जब भारत सरकार ने वर्ल्ड बैंक का दौरा किया तो साफ-सफाई के मुद्दे पर हमने इजिप्ट (मिस्र) के स्वच्छता मिशन को उसके साथ साझा किया। नतीजतन भारत में स्वच्छता अभियान की नींव रखी गई।’

इसके अलावा 2006 में विश्व बैंक की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत अपनी जीडीपी का 6.4 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ सफाई और हाइजीन पर खर्च करता है, लिहाज़ा साल 2019 तक देश के हर घर में शौचालय बनवाने और लोगों को गंदगी से फैलने वाली बीमारियों से सुरक्षित करने के मकसद से ‘स्वच्छ भारत मिशन’ की शुरुआत की गई।

बहरहाल, स्वच्छ भारत अभियान में नम्बर- 1 का दर्जा हर बार हासिल करने वाले इंदौर को छोड़कर मध्य प्रदेश कितना स्वच्छ हुआ। सरकार की यह रिपोर्ट दर्शाती है, जहां सभी जिलों को स्वच्छ घोषित कर दिया गया। हालांकि वास्तविक स्थितियों से जिलों में रहने वाले रहवासी बेहद बेहतर तरह से परिचित हैं। यही नहीं, अन्य राज्यों के बारे में अमूमन यही बात दोहराई गई। भारत 2014 के बाद से आज तक कितना स्वच्छ हुआ यह बहस का विषय है।

साल दर साल कम होता बजट

यहां ग़ौर करने वाली बात यह है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2020 में स्वच्छ भारत मिशन के लिए 12294 करोड़ रुपए की घोषणा की थी। पिछले कुछ वर्षों में स्वच्छ भारत अभियान के बजट में लगातार गिरावट आई है। बजट 2018-19 में इस अभियान का बजट 15373 करोड़ रुपए था जो अब तक का सबसे ज्यादा है।

केंद्र सरकार दावा करती है कि साल 2014 में जब इस अभियान की शुरूआत की गई, तब 66.42 लाख टॉयलेट बनाने का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि यह अर्बन इंडिया के लिए लक्ष्य था, ग्रामीण स्तर पर नहीं। कई सर्वे अपनी रिपोर्ट में बताते हैं कि ग्रामीण भारत को खुले में शौच मुक्त करने के लिए कम से कम 9.3 करोड़ टॉयलेट बनाने होंगे। अब तक कितने टॉयलेट्स बनाए गए इस बारे में सरकार ने जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। इस बीच, मीडिया में ऐसी भी रिपोर्टस् सामने आती रही हैं, जहां टॉयलेट्स सिर्फ कागजों में या भ्रष्टाचार के भेंट चढ़ गए

भारत के एक बड़े भौगोलिक भाग पर स्वच्छ भारत अभियान लागू किया जाना और उस पर निगाह रखना सिर्फ सरकार के दायरे में है, इस बात की प्रमाणिकता हासिल करना सरकार के लिए आसान है इसलिए सरकार की बात को गंभीरता से लें तो जमीनी स्तर पर आप (जो पाठक यह रिपोर्ट जिस शहर में रहते हुए पढ़ रहे हैं) इस बात की प्रमाणिकता अपने स्तर पर समझ सकते हैं।

ओडीएफ प्लस की राह पर केंद्र सरकार

जल शक्ति मंत्रालय द्वारा अगस्त 2021 से 100 दिवसीय ‘सुजलम’ अभियान की शुरुआत की गई। अभियान का उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर अपशिष्ट जल प्रबंधन करते हुए ज्यादा से ज्यादा गावों को ओडीएफ प्लस गांव बनाना है। साथ ही, ओडीएफ लाभ की निरंतरता बनाए रखने और 10 लाख सोखते गड्ढों का निर्माण करने के की बात कही गई है, जमीनी स्तर पर कार्य जारी है। ताकि ज्यादा से ज्यादा गावों को ओडीएफ प्लस (सरकार द्वारा गांव के विकास के लिए बनाई गई कैटेगरी) गांवों में परिवर्तित किया जा सके।

इस अभियान के माध्यम से न केवल गांवों में ग्रेवॉटर प्रबंधन के लिए वांछित बुनियादी संरचना यानी जल व्यवस्था के प्रबंधन में भी सहायता प्राप्त होगी। गांवों में या गांवों के बाहरी इलाकों में गंदे पानी का निष्कासन एक बहुत बड़ी समस्या बनी हुई है। इस अभियान से अपशिष्ट जल प्रबंधन में सहायता प्राप्त होगी, जैसा की केंद्र सरकार की इस अभियान में कहा गया है।

स्वच्छ भारत मिशन का दूसरा चरण

अक्टूबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट ने प्रमुख कार्यक्रमों – स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) और अटल मिशन फॉर रिजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (अमृत) 2.0 के दूसरे संस्करण को मंजूरी दी गई। यहां ध्यान देने वाली बात यह है स्वच्छ भारत अभियान का पहला चरण अभी पूरी तरह से पूरा नहीं हुआ है, कई कार्य भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए तो कई कार्य सरकारी लेटलतीफी की कारण अधर में पढ़े हुए हैं।

कैबिनेट ने 2025-26 तक स्वच्छ भारत अभियान (शहरी) को मंजूरी दी है, जिसमें खुले में शौच मुक्त परिणामों की स्थिरता, सभी शहरों में ठोस कचरे के वैज्ञानिक प्रसंस्करण को प्राप्त करने और 2011 की जनगणना में 1 लाख से कम आबादी वाले शहरों में अपशिष्ट जल का प्रबंधन करने पर ध्यान दिया गया।

अटल मिशन पर, एक सरकारी बयान में कहा गया है, ‘कैबिनेट समझता है कि शहरी परिवारों को विश्वसनीय और सस्ती जलापूर्ति और स्वच्छता सेवाएं प्रदान करना एक राष्ट्रीय प्राथमिकता है। यह सभी घरों को कार्यात्मक नल कनेक्शन प्रदान करके, जल स्रोत संरक्षण/वृद्धि, जल निकायों और कुओं का कायाकल्प, उपचारित उपयोग किए गए पानी के पुनर्चक्रण/ पुन: उपयोग और वर्षा जल संचयन द्वारा प्राप्त किया जाएगा।

बयान में कहा गया है कि कायाकल्प और शहरी परिवर्तन के लिए अटल मिशन जून 2015 में 500 शहरों में नल कनेक्शन और सीवर कनेक्शन प्रदान करके जीवन को आसान बनाने के लिए शुरू किया गया था।

स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) को 2025-26 तक जारी रखने को मंजूरी में सरकार एसबीएम-शहरी 2.0 के तहत 2021-22 से 2025-26 की अवधि के लिए, 36,465 करोड़ रुपये की केंद्रीय हिस्सेदारी के साथ एसबीएम-यू 2.0 के लिए कुल 1,41,600 करोड़ रुपए का वित्तीय परिव्यय तय किया जाएगा है, जो मिशन के पिछले चरण के 62,009 करोड़ रुपए के वित्तीय परिव्यय से 2.5 गुना ज्यादा है।

स्वच्छ भारत मिशन : शहरी 2.0

मौजूदा केंद्र सरकार दावा कर रही है कि वो अगले 5 साल में, प्रधानमंत्री द्वारा 1 अक्टूबर 2021 को लॉन्च किए गए एसबीएम-यू 2.0 का मुख्य जोर देते हुए ‘गारबेज मुक्त’ शहरी भारत के लक्ष्य को हासिल करेगी।

यह अभियान कागज रहित, डिजिटल होगा और जीआईएस चिह्नित कचरा प्रबंधन इन्फ्रास्ट्रक्चर, मजबूत यूजर इंटरफेस, ऑनलाइन शिकायत समाधान व्यवस्था, परियोजना निर्माण से लेकर फंड जारी करने तक परियोजना की ऑनलाइन निगरानी और एकीकृत जीआईएस आधारित प्लेटफॉर्म पर परियोजना की प्रगति की निगरानी के माध्यम से पूर्ण रूप से पारदर्शिता व विश्वसनीयता के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाएगा।

अभियान में अगले 5 साल के दौरान रोजगार और बेहतर अवसरों की खोज में ग्रामीण से शहरी इलाकों में जाने वाली अतिरिक्त आबादी को सेवाएं देते हुए स्वच्छता सेवाओं तक पूर्ण पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाएगा। ऐसा 3.5 लाख व्यक्तिगत, सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालयों के निर्माण के माध्यम से किया जाएगा।

एसबीएम-शहरी के अंतर्गत पेश किए गए एक नए भाग- 1 लाख से कम जनसंख्या वाले शहरों में पूर्ण तरल कचरा प्रबंधन से हर शहरों में प्रणालियों और प्रक्रियाओं की स्थापना सुनिश्चित होगी, जिससे सभी अपशिष्ट जल को सुरक्षित रूप से समाहित, संग्रहित, उसका परिवहन और शोधन हो, साथ ही किसी प्रकार का अपशिष्ट जल हमारे जल स्रोतों को प्रदूषित नहीं कर सकेगा।

ऐसे होगा टिकाऊ ठोस अपशिष्ट प्रबंधन

  • प्रत्येक शहर में सिंगल यूज प्लास्टिक को चरणबद्ध रूप से समाप्त करने पर ध्यान केन्द्रित करते हुए, फंक्शनल मैटेरियल रिकवरी फैसिलटी (एमआरएफ) के साथ कचरे का शत-प्रतिशत स्रोत अलग किया जाएगा।
  • राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) वाले शहरों और 5 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में निर्माण और तोड़-फोड़ (सीएंडडी) अपशिष्ट प्रसंस्करण सुविधाओं की स्थापना तथा मैकेनिकल स्वीपर की तैनाती की जाएगी।
  • सभी पुरानी डंपसाइटों का जीर्णोद्धार, ताकि 15 करोड़ टन पुराने कचरे से ढकी 14,000 एकड़ भूमि को मुक्त किया जा सके।
  • आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए, शहरी स्‍थानीय निकायों (यूएलबी) और सभी संबंधित हितधारकों की मजबूत क्षमता निर्माण तथा संवाद और प्रचार के जरिए नागरिकों को शामिल करके उपर्युक्‍त लक्ष्‍य तक पहुंचा जा सकेगा।
  • स्वच्छता और अनौपचारिक अपशिष्ट श्रमिकों के व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण और सुरक्षा किट, सरकारी कल्याण योजनाओं के साथ जुड़ाव के साथ-साथ क्षमता निर्माण के प्रावधान के माध्यम उनके कल्याण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

‘स्वच्छ भारत मिशन, शहरों में अब तक क्या हुआ

  • गूगल मैप्स पर एसबीएम शौचालय जैसे डिजिटल नवाचार के माध्यम से स्वच्छता सुविधाओं तक पहुंच में और सुधार किया गया है, जहां 3,300 से अधिक शहरों में 65,000 से अधिक सार्वजनिक शौचालयों को दर्शाया गया है।
  • शहरी भारत को 2019 में खुले में शौच मुक्त घोषित किया गया था? जिसके बाद मिशन ने शहरी भारत को स्थायी स्वच्छता के पथ पर अग्रसर किया है, जिसमें 3,300 से अधिक शहरों और 960 से अधिक शहरों को क्रमशः ओडीएफ1+ और ओडीएफ ++2 प्रमाणित किया गया है।
  • शहर जल+ प्रोटोकॉल-3 के तहत जल+ प्रमाणीकरण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जो अपशिष्ट जल के शोधन और इसके पुन: उपयोग पर केन्द्रित है।
  • वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में, भारत में अपशिष्ट प्रसंस्करण 2014 में 18 प्रतिशत से चार गुना बढ़कर आज 70 प्रतिशत हो गया है।
  • 97 प्रतिशत वार्डों में 100 प्रतिशत डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण और 85 प्रतिशत वार्डों में नागरिकों द्वारा किए जा रहे कचरे के स्रोत से अलग किया जाता है।
  • यह अभियान समाज कल्याण योजनाओं से जुड़े 5.5 लाख से अधिक सफाई कर्मचारियों के साथ स्वच्छता कार्यकर्ताओं और अनौपचारिक अपशिष्ट श्रमिकों के जीवन में महत्‍वपूर्ण बदलाव लाने में सक्षम रहा है। अग्रिम मोर्चे के सफाई कर्मियों की निर्बाध सेवाओं ने कोविड-19 महामारी के दौरान शहरी भारत की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा 2016 में डिजिटल शिकायत निवारण प्लेटफॉर्म के तौर पर स्‍वच्‍छता ऐप जैसे डिजिटल सामर्थ्‍य से जन शिकायत निवारण के प्रबंधन को एक नया रूप मिला है। ऐप ने अब तक नागरिकों से सक्रिय जुड़ाव के साथ 2 करोड़ से अधिक जन शिकायतों का समाधान किया है। आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने हाल ही में स्वच्छता ऐप 2.0 का नया संस्करण लॉन्च किया है।
  • एसबीएम-शहरी के तहत 4,000 से अधिक शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) को कवर करने वाला दुनिया का सबसे बड़ा शहरी स्वच्छता सर्वेक्षण – स्वच्छ सर्वेक्षण 2016 में शुरू किया गया था। सर्वेक्षण कार्यक्रम कई वर्षों में विकसित हुआ है और आज एक अनूठा प्रबंधन उपकरण बन गया है, जो स्वच्छता परिणामों को प्राप्त करने के लिए जमीनी स्तर के कार्यान्वयन को तेज करता है।
  • महामारी से उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद स्वच्छ सर्वेक्षण 2021 को रिकॉर्ड समय में पूरा किया गया। इन वर्षों में, सर्वेक्षण को कुल मिलाकर 7 करोड़ से अधिक नागरिकों की ओर से प्रतिक्रिया मिली हैं।

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