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तकनीक / रोबोट कैसे दे रहे हैं चित्रकारों को चुनौती, क्या वो सफल हो पाएंगे!

रोबोट हमारी दुनिया में हैं और वो दिन दूर नहीं जब हम रोबोट की दुनिया में होंगे, यह ठीक उसी तरह है जैसे एक पीढ़ी के बाद दूसरी बेहतर पीढ़ी का आना, रोबोट दुनिया की अगली पीढ़ी हो सकते हैं, यदि मानव उन पर इसी तरह प्रयोग करता रहा जैसा कि वो कर रहा है। कई साल पहले मशीनी मानव कपोलकल्पित कल्पना हुआ करती थी, लेकिन आज हकीकत है। रोबोट इंसान को कई क्षेत्रों में चुनौती दे रहे हैं। आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस से लेकर आर्ट (चित्रकला) तक को बेहतर तरह से करने वाले रोबोट मौजूद हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या रोबोट इंसान से बेहतर कलाकृति बना सकते हैं? क्योंकि कला को हमेशा मानवीय रचनात्मकता से जोड़कर देखा गया है और जब आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस(एआई) की मदद से कोई कलाकृति बनाई जाए तो उसे खरीदने वालों की रूचि में भी इजाफा होगा, लेकिन क्या वाकई में ऐसा हो रहा है?

वो साल 2019 था जब जर्मनी की एक संस्था ने एआई एल्गोरिदम पर बनी पहली पेंटिंग को बेचा। पहले पेंटिंग की कीमत महज कुछ हजार यूरो ही आंकी गई थी लेकिन बोली लगते लगते करीब 3.88 लाख यूरो में बिकी। हालांकि क्रिएटिव आर्ट्स में एआई का इस्तेमाल कलाकारों के हक से लेकर तकनीक के जिम्मेदार प्रयोग जैसे कई तकनीकी मसलों को उठाता है।

लेकिन कला के क्षेत्र में एआई की कल्पना का पहला लिखित दस्तावेज साल 2018 में लेखक गाब्रिएल की आई किताब, ‘द मीनिंग ऑफ थॉट’ एआई के परिणामों पर बात करती है। एक अंग्रेजी वेबसाइट को बहुत पहले दिए इंटरव्यू में गाब्रियल ने कहा था कि रोबोट द्वारा बनाई जाने वाली पेंटिंग को आर्ट कहना गलती है। उनका मानना है कि कला किसी व्यक्ति के ‘स्वंय के कार्य’ का नतीजा है। कला का सार है कि उसमें कोई सार नहीं है। वह यह भी मानते हैं कि कला को दोहराया नहीं जा सकता और वह अपने आप में अद्वितीय है।

तो वहीं इसी साल यानी 2018 में आई किताब ‘द क्रिएटिव पावर ऑफ मशीन’ के लेखक फोलांड इस बात पर सहमत होते हैं कि रोबोट की कला मूल कला और रचनात्मकता की नकल है लेकिन प्रोग्राम पर चलने वाली मशीनों में अपनी मौलिक रचनात्मक इच्छाशक्ति की कमी है।

कला एक परालौकिक अनुभव है। जैसे एक फिल्म में भावनात्मक माहौल बनाने के लिए फेशियल रेकग्निशन फीचर का इस्तेमाल किया जाता है। ठीक उसी तरह रियलिटी में भी यह प्रयोग किए जा रहे हैं। नौ साल की उम्र से प्रोग्रामिंग सीख रही डेसी ने टेक कंपनी आईकॉग की स्थापना की और ह्यूमनॉइड रोबोट सोफिया को विकसित करने में मदद की। डेसी का नारा है ‘एनीवन कैन कोड’ मतलब कोई भी कोडिंग कर सकता है। वह कोडिंग को प्रोत्साहित कर रही हैं, साथ है युवा लड़कियों को एआई से जुड़ने का मौका भी दे रही हैं।

सोफिया जो एक रोबोट हैं और उन्हें सउदी अरब की नागरिकता भी मिली हुई है। जब वह ग्लोबल मीडिया फोरम में ह्यूमनॉइड रोबोट सोफिया भी पहुंची थी। जब वह बात करती तो उनके चेहरे पर बदलते भाव लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचते। हालांकि कई विशेषज्ञों का मानना है कि रोबोट कभी भी मानव चेतना का मुकाबला करने में सक्षम नहीं होंगे। मानवता की सबसे बड़ी शक्ति उसकी कमियां हैं और कोई भी इंसान हमेशा सोच समझ कर और तार्किक ढंग से काम नहीं कर सकता।

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