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संवाद / ‘स्वच्छ भारत मिशन’ व ‘स्मार्ट सिटी’, यहां लिखें, क्या है आपकी राय?

नोट : इस आलेख के संदर्भ में यदि आप ‘स्वच्छ भी, स्मार्ट भी’ विषय पर विचार रखते हैं, तो कमेंट बॉक्स में लिखें, हम उन्हें प्रकाशित करेंगे।

  • अमिताभ श्रीवास्तव। सलाहकार, अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान, भोपाल, मध्य प्रदेश।

स्वच्छ भारत मिशन व स्मार्ट सिटी इन दोनों शब्दों से वर्तमान में शायद ही कोई अनजान हो, सभी के जहन में यह शब्द समाए हुए है। स्वच्छ भारत मिशन-भारत सरकार के इस पावन अभियान ने देश के नागरिकों में स्वच्छता संबंधी सोई हुई चेतना को पुर्नजीवित किया है। इस अभियान से जो प्रतिस्पर्धा की भावना व सकारात्मक जागरूकता उत्पन्न हुई है वह निःसंदेह इस नेक कार्य को मुकाम तक पहुंचाने में सफल होगी।

दूसरी तरफ यदि हम इसके दूसरे पहलू को देखें तो यह भी चिंतनीय है कि आजादी के 75 साल बाद आज भी साफ-सफाई के लिए सरकारों को अभियान चलाने की जरूरत पड़ रही है।

साफ-सफाई कोई सिखाने वाली चीज नहीं है फिर भी इस कार्य के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए लाखों-करोड़ों रूपये विज्ञापनों पर व्यय करने पड़ रहे है। यदि हम सभी इस विषय में जागरूक होते और और साफ-सफाई चाक-चौबंद रखते तो विज्ञापनों पर खर्च होने वाली राशि किसी अन्य कल्याणकारी कार्य में लगाई जा सकती।

मध्य प्रदेश विभिन्न वार्डां के मध्य सबसे सुदंर व स्वच्छ वार्ड की प्रतियोगिता कराई जा सकती है इससे सबसे निचले पायदान को भी हम स्वच्छ व सुंदर बना सकते है क्योंकि सर्वविदित है कि प्रतिस्पर्धा की भावना ही जुनून पैदा कर सकती है। वार्डों में सबसे बेहतर वार्ड साबित करने की होड़ प्रारंभ हो सकेगी जो कि पार्षदों और जनप्रतिनिधियों की छवि निखारने में भी सहायक होगी।

राज्य स्तर से पुरस्कार प्रदान किया जा सकता है। प्रतियोगिता के मापदंड भारत सरकार के मापदंडों के अलावा कुछ अन्य भी निर्धारित किये जा सकते है, वार्ड-वासियों की जिम्मेदारी भी सुनिश्चित की जा सकती है। क्योंकि स्वच्छता मिशन अपने आप में एक अनूठा मिशन है जिसकी सफलता धरातल पर होना जरूरी है।

वहीं जब हम स्मार्ट सिटी की बात करते है तो स्मार्ट शब्द से हम सभी भली भांती परिचित हैं। पहले व्यक्ति स्मार्ट हुआ करते थे फिर समय के साथ साथ मोबाइल फोन और टी. व्ही. भी स्मार्ट होने लगे हैं और अब इसी श्रंखला में शहर भी स्मार्ट होने जा रहे हैं।

स्मार्ट सिटी के पीछे मुख्य मकसद शहर की आर्थिक उन्नति के साथ साथ लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाना व विकास कार्यों को बढावा देना साथ ही टेक्नोलाजी के माध्यम से सुगमता और सहजता से सेवायें प्रदाय करना है। स्मार्ट बनाने से पहले सिटी को सिटी की तरह मेन्टेन रखना आवश्यक है। हमें अपनी पुरानी धरोहरों को भी सहेज के रखना है। प्रत्येक शहर को प्रकति ने किसी न किसी सुंदरता से नवाजा है।

तो क्यों न आम नागरिकों के मध्य प्रतियोगिता कराई जाए और इस पर भी उनसे सुझाव मांगे कि शहर के अंदर और इसके 20 किलोमीटर आसपास क्षेत्र में ऐसे कौन-से स्थान हैं जो अपने आप में प्रकति की सुंदरता बनाए हुए हैं उन्हें और कैसे विकसित किया जा सकता है साथ ही शहर को कैसे और अधिक सुंदर बनाया जा सकता है क्योंकि हमें टेक्नोलाजी के माध्यम से स्मार्ट सिटी बनाने के इस दौर में यह बात भी अपने जहन में रखना होगी कि हम अपने शहर की प्राकतिक सुंदरता को न खो दें।

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