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लक्ष्य / चीन में, साल 2030 और 2060 क्यों हैं खास?

चीन का ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन प्लांट। चित्र सौजन्य : चाइना पावर सीएसआईएस आर्गनाइजेशन।

  • अखिल पाराशर, बीजिंग, चीन।

साल 2060 तक, ‘कार्बन तटस्थता’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, चीन ने एक मार्गदर्शक दस्तावेज प्रकाशित किया है, जिसमें आने वाले दशकों में जलवायु और पर्यावरण के मुद्दों को विशेषतौर पर उठाया जाएगा।

फिलहाल, दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अपनी जलवायु महत्वाकांक्षा और आर्थिक विकास को संतुलित करने की कोशिश कर रही है। विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा, परिवहन क्षेत्रों में विकास और निवेश के माध्यम से, कार्बन उत्सर्जन को कम करने की दिशा में, चीन के पास एक मजबूत आर्थिक रणनीति है। यह इसलिए क्योंकि दुनिया एक साथ जलवायु परिवर्तन से जुड़े खतरों का सामना कर रही है।

चीनी अर्थव्यवस्था द्वारा कार्बन उत्सर्जन को कम करने की दिशा में किए जा रहे प्रयास से ना केवल नए रोजगार में बढ़ेंगे, बल्कि तकनीकी नवाचार बेहतर होंगे, और घरेलू उद्यमों की प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा। मार्गदर्शक दस्तावेज के अनुसार, ‘साल 2060 तक चीन पूरी तरह से एक स्वच्छ, कम कार्बन, सुरक्षित और कुशल ऊर्जा प्रणाली स्थापित कर लेगा, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा के संसाधनों का विकास अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच जाएगा।’

सौर व पवन ऊर्जा, जल विद्युत उत्पादन में एक वैश्विक लीडिरशिप के तौर पर उभरेगी। चीन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्वच्छ ऊर्जा के लिए अपना एक अलग स्थान रखता है। चीन की ग्रीन रेवोलुशन न केवल अपनी घरेलू कंपनियों बल्कि हरित प्रोद्योगिकी को बेहतर करेगा। ऐसे में वैश्विक निवेशकों के लिए चीन में व्यापार के लिए अवसर भी लाएगा।

आंकड़े बताते हैं कि चीन की कंपनियों ने साल 2020 तक 416 अंतरराष्ट्रीय जलविद्युत सहयोग परियोजनाओं में भाग लिया था, जिसमें उसी वर्ष 11 नए हस्ताक्षर किए गए थे। उस वर्ष, चीन की पवन टरबाइन इकाइयों को 1.1 अरब अमेरिकी डॉलर के व्यापार मात्रा के साथ 22 देशों को निर्यात किया गया था, जो 20 प्रतिशत से अधिक था।

चीन ने स्थापित क्षमता, सौर पैनल निर्माण और प्रौद्योगिकी निर्यात के मामले में सौर ऊर्जा उद्योग में एक मजबूत स्थिति स्थापित की है। इन तीन स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्रों के नए आर्थिक विकास बिंदु बनने की उम्मीद है क्योंकि विश्व स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा का अधिक से अधिक प्रयोग करने में कार्य कर रहा है।

इलैक्ट्रिक वाहन, चीन के आर्थिक विकास का एक और नया स्तंभ है क्योंकि यह कार्बन उत्सर्जन को कम करता है। चीन में नव ऊर्जा वाहन (एनईवी) की बिक्री साल दर साल 10.9 प्रतिशत बढ़कर 2020 में 13.7 लाख यूनिट हो गई, जो कि उनके उपयोग को प्रोत्साहित करने और पर्यावरण पर दबाव कम करने के सरकारी प्रयासों के बीच है। बाजार में हिस्सेदारी का दावा करने के लिए नए खिलाड़ी इस उद्योग में बढ़ते जा रहे हैं। एनईवी की बढ़ती लोकप्रियता बाद से देश भर में बैटरी चार्जिंग स्टेशनों और स्वैपिंग (अदला-बदली) स्टेशनों के निर्माण को बढ़ावा देती है।

स्वच्छ ऊर्जा की तलाश के अलावा, देश ऊर्जा स्रोत पर उत्सर्जन में कटौती करने के लिए पुरानी उत्पादन सुविधाओं और उच्च ऊर्जा खपत वाले उद्यमों को भी दूर कर रहा है। इसका कुछ स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं पर तत्काल प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन औद्योगिक उन्नयन और डी-कार्बोनाइजिंग चीन के आर्थिक विकास को गति प्रदान कर सकते हैं और इसे लंबी अवधि में स्वस्थ और अधिक टिकाऊ बना सकती हैं।

जलवायु परिवर्तन’ के लिए चीन की नई नीति

चीनी संवाददाता वनिता बताती हैं कि चीन ने हालही में जलवायु परिवर्तन से निपटने की चीन की नीति का श्वेत पत्र जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन मानव जाति का सामने सबसे बड़ी चुनौती है। चीन जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए संवेदनशील है। दुनिया में सबसे बड़े विकासशील देश के रूप में चीन ने अपनी आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयों को दूर करते हुए सिल-सिलेवार तरह से जलवायु परिवर्तन रणनीतियों, उपायों और कार्रवाइयों को लागू किया, वैश्विक जलवायु शासन में भाग लिया और जलवायु परिवर्तन के मुकाबले में सकारात्मक उपलब्धियां प्राप्त कीं हैं। जैसा कि चीन की सरकारी मीडिया द्वारा दावा किया जाता है।

श्वेत पत्र में यह परिचय दिया गया कि चीन जलवायु परिवर्तन पर सक्रिय रूप से प्रतिक्रिया देने के लिए एक राष्ट्रीय रणनीति लागू करता है, जलवायु परिवर्तन की प्रतिक्रिया में लगातार सुधार करता है, हरित और निम्न-कार्बन विकास के पथ का दृढ़ता से पालन करता है, प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करता है, बाजार तंत्र की भूमिका को पूरी तरह से निभाता है और राष्ट्रीय कार्बन बाजार के निर्माण को बढ़ावा देता है।

जलवायु परिवर्तन पर चीन की प्रतिक्रिया में ऐतिहासिक परिवर्तन हुए हैं। अर्थव्यवस्था और समाज का स्वस्थ विकास होने के दौरान कार्बन उत्सर्जन की तीव्रता में काफी गिरावट आई है। ऊर्जा उत्पादन और खपत क्रांति में उल्लेखनीय परिणाम प्राप्त हुए, गैर-जीवाश्म ऊर्जा तेजी से विकसित हुई है, और ऊर्जा खपत की तीव्रता में काफी कमी आई है।

2030 से पहले, चीन क्या करने वाला है?

चीनी सरकार ने हाल ही में साल 2030 से पहले ‘कार्बन डाइ ऑक्साइड पीकिंग’ संबंधी कार्यवाही योजना जारी की। चीनी संवाददाता वेइतुंग बताते हैं, ‘योजना में कहा गया कि चीन कार्बन डाइ ऑक्साइड पीकिंग और कार्बन डाइ ऑक्साइड तटस्थता को आर्थिक और सामाजिक विकास में शामिल करेगा, ताकि साल 2030 से पहले कार्बन डाइ ऑक्साइड पीकिंग का लक्ष्य पूरा किया जाए।’

इस योजना में गैर-जीवाश्म ऊर्जा के उपभोग का अनुपात, ऊर्जा क्षमता की उन्नति और कार्बन डाइ ऑक्साइड उत्सर्जन की गिरावट के ठोस लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।

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